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मध्यप्रदेश

वर्ष 2031 तक 88,634 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होंगी लगभग 30 हजार किलोमीटर सड़कें

भोपाल–विदिशा मार्ग 1,758 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा 4-लेन

मेट्रोपोलिटन विकास और आधुनिक सड़क नेटवर्क से नए युग में प्रवेश कर रहे हमारे शहर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल और उज्जैन–इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र बनेंगे निवेश, उद्योग, पर्यटन एवं रोजगार के नए ग्रोथ इंजन
विगत ढाई वर्षों में 29,693 किलोमीटर सड़कों का निर्माण एवं उन्नयन पूर्ण
18,166 करोड़ रुपये लागत की 444 किलोमीटर लंबी 7 प्रमुख सड़क परियोजनाओं पर तेजी से चल रहा कार्य
वर्ष 2031 तक 88,634 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होंगी लगभग 30 हजार किलोमीटर सड़कें

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश मेट्रोपोलिटन विकास, आधुनिक अधोसंरचना और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के नए युग में प्रवेश कर रहा है। भोपाल और उज्जैन–इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों की अधिसूचना प्रदेश के सुनियोजित शहरी एवं क्षेत्रीय विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। राज्य सरकार इन मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों से जुड़े शहरों, कस्बों, औद्योगिक क्षेत्रों, धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तथा आर्थिक केंद्रों को आधुनिक, सुरक्षित और निर्बाध सड़क नेटवर्क से जोड़ने की व्यापक कार्ययोजना पर तेजी से काम कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेट्रोपोलिटन विकास का अर्थ केवल बड़े नगरों की सीमाओं का विस्तार नहीं, बल्कि आसपास के छोटे शहरों, नगरीय निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इन क्षेत्रों में बेहतर सड़कें, सुगम सार्वजनिक परिवहन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए वर्तमान सड़कों का उन्नयन करने के साथ एक्सप्रेस-वे, ग्रीनफील्ड मार्ग, रिंग रोड, बायपास और हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल और उज्जैन–इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों के बीच आधुनिक एवं निर्बाध संपर्क स्थापित होने से प्रदेश में विकास का एक सशक्त त्रिकोण तैयार होगा। उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता, इंदौर की औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षमता तथा भोपाल की प्रशासनिक, शैक्षणिक और संस्थागत शक्ति परस्पर जुड़कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई प्रदान करेगी। यह मेट्रोपोलिटन क्षेत्र आने वाले समय में निवेश, उद्योग, व्यापार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के प्रमुख ग्रोथ इंजन बनेंगे।

भोपाल–विदिशा 4-लेन परियोजना मंत्रि-परिषद की स्वीकृति के लिए प्रस्तावित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल–विदिशा मार्ग को 4-लेन बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रस्ताव आज मंगलवार को आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर प्रस्तावित इस परियोजना की कुल लागत ₹1,757 करोड़ 55 लाख है। इसके अंतर्गत 44.83 किलोमीटर लंबे वर्तमान 2-लेन मार्ग को पेव्ड शोल्डर सहित 4-लेन में उन्नत किया जाएगा। मंत्रि-परिषद की स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

यह मार्ग भोपाल के अयोध्या बायपास स्थित भानपुर टी-जंक्शन से प्रारंभ होकर सूखी सेवनिया, दीवानगंज और सलामतपुर होते हुए एनएच-146 के सांची–सलामतपुर जंक्शन तक जाता है। यह भोपाल, रायसेन और विदिशा जिलों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मार्ग है।

मार्ग पर वर्तमान यातायात लगभग 10,975 पैसेंजर कार यूनिट है, जो 4-लेन मार्ग के लिए निर्धारित 10 हजार पैसेंजर कार यूनिट के मानक से अधिक है। महानगरीय क्षेत्र के विकास और भविष्य में यातायात वृद्धि को देखते हुए इसका 4-लेन उन्नयन आवश्यक है।

परियोजना में कुल 8.25 किलोमीटर लंबाई के तीन बायपास प्रस्तावित हैं—

             1.80 किलोमीटर लंबा सूखी सेवनिया बायपास

             1.35 किलोमीटर लंबा बेरखेड़ी बायपास

             5.10 किलोमीटर लंबा सलामतपुर बायपास

इन बायपास के निर्माण से आबादी वाले क्षेत्रों में वाहनों का दबाव कम होगा, सड़क दुर्घटनाओं की आशंका घटेगी और स्थानीय नागरिकों का आवागमन अधिक सुरक्षित होगा। यह मार्ग भोपाल–कानपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए महत्वपूर्ण फीडर कॉरिडोर के रूप में भी कार्य करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल–विदिशा मार्ग यातायात के साथ धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसके आसपास विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप, संग्रहालय, अशोक स्तंभ, उदयगिरि की गुफाएं और अनेक पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक स्थल मौजूद हैं। यह मार्ग लगभग 24.550 किलोमीटर पर कर्क रेखा से भी गुजरता है, जिससे इसका विशेष भौगोलिक महत्व है।

बेहतर सड़क संपर्क से भोपाल से विदिशा और सांची तक की यात्रा अधिक सुगम होगी तथा कम समय में पूरी की जा सकेगी। इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ होटल, परिवहन, गाइड सेवा, हस्तशिल्प और स्थानीय कारोबार को प्रोत्साहन मिलेगा।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा रायसेन, सांची और विदिशा को बायपास करते हुए बनाए जा रहे नवीन 4-लेन मार्ग से जुड़कर यह परियोजना भोपाल, सागर, दमोह, छतरपुर और पन्ना सहित उत्तर-पूर्वी मध्यप्रदेश की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी।

उज्जैन–इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में तैयार हो रहा आधुनिक सड़क नेटवर्क

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन–इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन के लिए अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से—

             इंदौर–उज्जैन 6-लेन मार्ग

             इंदौर–उज्जैन ग्रीनफील्ड 4-लेन मार्ग

             उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड 4-लेन मार्ग

             उज्जैन–मक्सी 4-लेन चौड़ीकरण

             उज्जैन सिंहस्थ बायपास

             हरिफाटक ब्रिज का चौड़ीकरण

इंदौर–उज्जैन 6-लेन परियोजना में लगभग 80 प्रतिशत भौतिक प्रगति हासिल की जा चुकी है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा इंदौर आउटर रिंग रोड विकसित किया जा रहा है। उज्जैन–नागदा 4-लेन मार्ग का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि उज्जैन–झालावाड़ 4-लेन मार्ग की स्वीकृति भारत सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। उज्जैन–जावरा मार्ग के माध्यम से उज्जैन को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इससे उज्जैन को देश के प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और आर्थिक कॉरिडोर से सीधा संपर्क मिलेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर की ईस्टर्न और वेस्टर्न रिंग रोड तथा उज्जैन क्षेत्र की बायपास परियोजनाएं महानगरीय क्षेत्र में वाहनों के दबाव को नियंत्रित करेंगी। भारी और लंबी दूरी के वाहन शहरी क्षेत्रों में प्रवेश किए बिना अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे यात्रा समय और ईंधन की बचत होगी, सड़क सुरक्षा बेहतर होगी तथा शहरी यातायात अधिक व्यवस्थित बनेगा।

भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के लिए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नेटवर्क

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्र को आधुनिक और सुनियोजित स्वरूप देने के लिए राजधानी तथा इसके आसपास के नगरों, औद्योगिक क्षेत्रों, शिक्षण संस्थानों और आर्थिक गतिविधियों के केंद्रों को क्षेत्रीय सड़क नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। इस कार्ययोजना की प्रमुख परियोजनाएं हैं—

             भोपाल वेस्टर्न बायपास

             भोपाल ईस्टर्न बायपास

             भोपाल–इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे

             भोपाल–विदिशा 4-लेन मार्ग

भोपाल वेस्टर्न बायपास को स्वीकृति मिल चुकी है और भोपाल ईस्टर्न बायपास की स्वीकृति की प्रक्रिया प्रचलन में है। दोनों परियोजनाओं के पूरा होने पर शहर में प्रवेश करने वाले और भोपाल से होकर गुजरने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होंगे। इससे शहरी यातायात का दबाव कम होगा और भोपाल के आगामी दशकों के सुव्यवस्थित विस्तार का मजबूत आधार तैयार होगा।

प्रस्तावित भोपाल–इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रदेश के दो प्रमुख मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों के बीच हाई-स्पीड और निर्बाध संपर्क स्थापित करेगा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन के बीच बेहतर कनेक्टिविटी से निवेशकों, उद्यमियों, विद्यार्थियों, पर्यटकों और आम नागरिकों को सुविधा मिलेगी। इससे नए औद्योगिक, व्यावसायिक और सेवा क्षेत्र क्लस्टर विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

विगत ढाई वर्षों में 29,693 किलोमीटर सड़कों का निर्माण एवं उन्नयन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों के साथ पूरे प्रदेश में सड़क अधोसंरचना के विस्तार और उन्नयन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने पिछले ढाई वर्षों में 29,693 किलोमीटर सड़कों का निर्माण एवं उन्नयन पूरा किया है। इससे दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर संपर्क स्थापित हुआ है तथा सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है।

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के अंतर्गत मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा ₹18,166 करोड़ लागत की 444 किलोमीटर लंबी सात प्रमुख परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से—

             इंदौर–उज्जैन 6-लेन मार्ग

             इंदौर–उज्जैन ग्रीनफील्ड 4-लेन मार्ग

             उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड 4-लेन मार्ग

             नर्मदापुरम–टिमरनी मार्ग

इसके अतिरिक्त ₹26,890 करोड़ लागत की 626 किलोमीटर लंबी नौ परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रक्रियाधीन हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

             भोपाल–विदिशा मार्ग

             कटनी–दमोह मार्ग

             पूर्वी भोपाल बायपास

             सिवनी–बालाघाट मार्ग

             देवास–चापड़ा मार्ग

             मेलघाट चौराहा–मालथौन मार्ग

             तिलवारी–हरदी–जनकपुर मार्ग

             मंदसौर–सीतामऊ मार्ग

भविष्य की परियोजनाओं के लिए 1,734 किलोमीटर लंबी 41 परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है।

 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे से घटेगी दूरी, बचेगा समय

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी में अग्रणी बनाने के लिए बीओटी मॉडल पर एकीकृत ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।

प्रथम चरण में कुल 794 किलोमीटर लंबे तीन एक्सप्रेस-वे की डीपीआर तैयार करने का कार्य प्रगतिरत है—

             सागर–सतना एक्सप्रेस-वे

             भोपाल–मंदसौर एक्सप्रेस-वे

             जबलपुर–आशापुर एक्सप्रेस-वे

इनकी अनुमानित लागत ₹38,456 करोड़ है। इन मार्गों के निर्माण से सागर–सतना की यात्रा अवधि 6 से 7 घंटे से घटकर लगभग 3 से साढ़े 3 घंटे रह जाएगी। भोपाल–मंदसौर और जबलपुर–आशापुर मार्ग पर वर्तमान 8 से 9 घंटे की यात्रा घटकर लगभग 5 से 6 घंटे में पूरी होने का अनुमान है।

दूसरे चरण में बीओटी मॉडल पर लगभग 926 किलोमीटर लंबे चार नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित हैं—

             सागर–जबलपुर एक्सप्रेस-वे — लगभग 135 किलोमीटर

             कटनी–सिंगरौली एक्सप्रेस-वे — लगभग 232 किलोमीटर

             भोपाल–जबलपुर एक्सप्रेस-वे — लगभग 239 किलोमीटर

             भोपाल–ग्वालियर एक्सप्रेस-वे — लगभग 320 किलोमीटर

इन परियोजनाओं से यात्रा समय में डेढ़ से लगभग पौने तीन घंटे तक की बचत होने का अनुमान है।

प्रदेश में इन सातों एक्सप्रेस-वे के विकसित होने से प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और आर्थिक केंद्रों के बीच तेज, सुरक्षित और निर्बाध संपर्क स्थापित होगा। यह नेटवर्क मध्यप्रदेश को “एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी स्टेट” के रूप में स्थापित करने की दिशा में मजबूत आधार बनेगा।

₹88,634 करोड़ का भविष्यदर्शी रोड नेटवर्क

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम गतिशक्ति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में सड़क नेटवर्क की दीर्घकालिक और डेटा-आधारित योजना को नई दिशा दी गई है। जीआईएस आधारित व्यवस्था से वर्तमान एवं प्रस्तावित सड़क अधोसंरचना, कनेक्टिविटी गैप और संभावित विकास क्षेत्रों का समेकित विश्लेषण कर आवश्यकता-आधारित प्राथमिकताएं निर्धारित की जा रही हैं।

वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक तैयार रोड नेटवर्क मास्टर प्लान में 1,226 मार्गों की 29,682 किलोमीटर लंबाई के विकास एवं उन्नयन का लक्ष्य रखा गया है। इन कार्यों की अनुमानित लागत ₹88,634 करोड़ है। “जहां आवश्यकता, वहीं प्राथमिकता” के सिद्धांत पर आधारित यह मास्टर प्लान नए मार्गों की आवश्यकता, मौजूदा सड़कों के उन्नयन, महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी गैप और आर्थिक-सामाजिक गतिविधियों से जुड़े मार्गों की पहचान वैज्ञानिक आधार पर करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प के अनुरूप मध्यप्रदेश में आधुनिक, सुरक्षित, नियोजित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुकूल अधोसंरचना तैयार की जा रही है। सड़क परियोजनाएं केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि निवेश, उद्योग, कृषि, पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की नई संभावनाओं का आधार हैं। उज्जैन–इंदौर और भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों के विकास के साथ पूरे प्रदेश में तैयार हो रहा आधुनिक सड़क और एक्सप्रेस-वे नेटवर्क मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख निवेश, पर्यटन, व्यापार और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

 

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