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राजनीति

महिला आरक्षण पर SAD ने बदला रुख, BJP से फिर गठबंधन के कयास तेज

नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के ठीक अगले ही दिन शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने एक बड़ा सियासी दांव चला है. पार्टी ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन से जुड़े केंद्र सरकार के नए प्रस्ताव को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है. इस बड़े फैसले के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और दोनों पुराने सहयोगियों के दोबारा साथ आने के कयास लगाए जाने लगे हैं.

चंडीगढ़ में SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के आवास पर पार्टी के बड़े नेताओं का मंथन हुआ. काफी देर चली इस बैठक में आगे की रणनीति पर बात हुई. इसके बाद सुखबीर सिंह बादल ने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी संसद में महिला आरक्षण बिल का खुलकर साथ देगी.

परिसीमन को लेकर भी पार्टी ने अपनी पुरानी जिद्द छोड़ दी है. अकाली दल अब केंद्र के उस नए प्लान के साथ खड़ा हो गया है, जिसके तहत देश के हर राज्य में लोकसभा सीटें 50 प्रतिशत बढ़ाई जानी हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि पहले 2011 की जनगणना से परिसीमन जोड़ने का विरोध किया जा रहा था. अब जब सभी राज्यों में सीटें बराबर अनुपात में बढ़ाने की बात है, तो पार्टी को इस पर कोई आपत्ति नहीं है.

केजरीवाल के बयान पर पलटवार
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद जब अकाली दल के समर्थन की खबरें आईं, तो आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसा. उन्होंने लिखा, "ना-ना करते प्यार तुम ही से कर बैठे. तो क्या चंदा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है?"

केजरीवाल के इस बयान पर अकाली दल ने भी पलटवार करने में देरी नहीं की. पार्टी नेता दलजीत सिंह चीमा ने चुटकी लेते हुए कहा कि विरोधी नेताओं की ऐसी बातें सीधे तौर पर उनकी घबराहट और डर को जाहिर कर रही हैं. उन्हें समझ आ गया है कि पंजाब का सियासी माहौल बदलने वाला है.

पंजाब में फिर जम सकती है पुरानी जोड़ी
बता दें कि 7 अगस्त (शुक्रवार) को प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात के बाद अकाली दल के इस फैसले को दोनों दलों के बीच पिघलती बर्फ (यानी कम होती दूरियों) के रूप में देखा जा रहा है. जानकारों का मानना है कि यह कदम पंजाब की राजनीति में एक नए समीकरण की शुरुआत हो सकता है.

हालांकि, बीजेपी के साथ गठबंधन के सीधे सवाल पर दलजीत सिंह चीमा थोड़ा संभलकर बोले. उन्होंने कहा कि फिलहाल सिर्फ उन्हीं फैसलों को सामने रखा जा रहा है, जो आज की बैठक में तय किए गए हैं.

फिलहाल अकाली दल ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन के प्रस्ताव पर अपना रुख साफ कर दिया है. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि BJP और SAD के रिश्तों को लेकर आगे क्या फैसला होता है.

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