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मध्यप्रदेश

GST विभाग की बड़ी कार्रवाई, दबंग दुनिया पब्लिकेशन पर ₹48 करोड़ की रिकवरी; हाईकोर्ट में राहत नहीं

इंदौर
दबंग दुनिया पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड (डीडीपीपीएल) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सेंट्रल जीएसटी के जॉइंट कमिश्नर ने कंपनी के खिलाफ करीब 48 करोड़ रुपए की डिमांड का आदेश पारित किया है। इसके अलावा 75 हजार रुपए की पेनल्टी लगाए जाने की बात भी सामने आई है। विभागीय आदेश में दबंग दुनिया और ऐलोरा टोबेको कंपनी लिमिटेड (ईटीसीएल) के संचालन के बीच संबंध होने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

आदेश में दावा किया गया है कि अखबार के रिपोर्टर-कर्मचारियों, वाहनों और प्रेस कार्ड तक का इस्तेमाल कथित तौर पर ऐलोरा टोबेको से जुड़े कामों में किया गया। वहीं, दबंग दुनिया की ओर से कर्मचारियों के व्यक्तिगत कामों के लिए संस्थान को जिम्मेदार नहीं ठहराने की दलील दी गई थी, जिसे आदेश में स्वीकार नहीं किया गया।

168 पेज के आदेश में 48 करोड़ की डिमांड
सेंट्रल जीएसटी के जॉइंट कमिश्नर योगेश पांडुरंग की ओर से जारी 168 पेज के आदेश के मुताबिक, दबंग दुनिया पब्लिकेशन पर फर्जी सर्कुलेशन और विज्ञापन के जरिए 11.66 करोड़ रुपए की आय दिखाने का आरोप है।

रिपोर्ट के अनुसार इसके आधार पर करीब 48 करोड़ रुपए की देनदारी निकाली गई है, जिसमें 3.68 करोड़ रुपए जीएसटी, करीब 65 लाख रुपए सेस और 44.50 करोड़ रुपए अन्य सेस बताए गए हैं। कार्रवाई संबंधित जीएसटी और कंपनसेशन कानून के प्रावधानों के तहत की गई है।

फर्जी सर्कुलेशन और विज्ञापनों का आरोप
जीएसटी विभाग के आदेश के अनुसार DDPL ने वास्तविक संख्या से पांच से आठ गुना अधिक अखबार का सर्कुलेशन दर्शाते हुए 5.73 करोड़ रुपये की आय दिखाई। इसके अलावा कथित फर्जी विज्ञापनों के जरिए 5.93 करोड़ रुपये की आय बताई हई। इस तरह दोनों मदों में कुल 11.66 करोड़ रुपए की आय दिखाने का उल्लेख आदेश में किया गया है।

इसी आधार पर विभाग ने 3.68 करोड़ रुपये जीएसटी, 65 लाख रुपये सेस और 44.50 करोड़ रुपये सेस-2 सहित कुल लगभग 48 करोड़ रुपये की देनदारी निर्धारित की है। यह कार्रवाई केंद्रीय एवं राज्य जीएसटी अधिनियम की धारा 122(2)(बी) तथा राज्यों को क्षतिपूर्ति अधिनियम-2017 की धारा 11 के तहत की गई है।

ऐलोरा टोबेको से संबंध होने का दावा
आदेश में यह भी दावा किया गया है कि DDPL और ईटीसीएल (ऐलोरा टोबेको) के बीच कारोबारी संबंध थे। विभाग के अनुसार दोनों संस्थाएं कथित रूप से एक ही नियंत्रण में संचालित हो रही थीं और डीडीपीएल का उपयोग ऐलोरा टोबेको की गतिविधियों के एक हिस्से को व्यवस्थित करने तथा आय को छिपाने के लिए किया गया।

आदेश में यह भी कहा गया है कि अखबार के कुछ कर्मचारियों और रिपोर्टरों के नाम पर कथित फर्जी कंपनियां संचालित की गईं। साथ ही अखबार के वाहनों और प्रेस कार्ड का इस्तेमाल भी कथित रूप से अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में किए जाने का उल्लेख किया गया है।

कर्मचारियों की भूमिका का भी जिक्र
आदेश में दबंग दुनिया के एक क्राइम रिपोर्टर के नाम पर कथित फर्जी फर्म संचालित होने, एक कर्मचारी को दूसरी कंपनी में डायरेक्टर बनाए जाने तथा एक अन्य कर्मचारी के जरिए कथित फर्जी पते पर कंपनी पंजीकृत कराने का उल्लेख किया गया है। विभाग ने कर सलाहकार के रूप में कार्य करने वाले एक व्यक्ति को भी संस्थान का वेतनभोगी कर्मचारी बताया है।

संस्थान की दलील खारिज
DDPL की ओर से विभाग के समक्ष यह दलील दी गई थी कि यदि किसी कर्मचारी या रिपोर्टर ने व्यक्तिगत स्तर पर कोई कार्य किया है तो उसके लिए संस्थान जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, जीएसटी विभाग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों, कर्मचारियों की भूमिका और संबंधित कंपनियों के बीच कथित संबंधों को देखते हुए संस्थान अपनी जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकता।

पहले भी हजारों करोड़ की डिमांड
सेंट्रल जीएसटी विभाग के अनुसार, किशोर वाधवानी तथा उनसे जुड़ी विभिन्न कंपनियों और अन्य पक्षकारों पर पहले से करीब 1,946 करोड़ रुपये की कर मांग लंबित है। इसमें 151.54 करोड़ रुपये जीएसटी और 1,794.54 करोड़ रुपये सेस शामिल है। DDPL के खिलाफ जारी यह आदेश उसी कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है।

पांच से आठ गुना ज्यादा सर्कुलेशन दिखाने का आरोप
आदेश में दावा किया गया है कि अखबार ने वास्तविकता से कथित तौर पर पांच से आठ गुना अधिक सर्कुलेशन दिखाकर 5.73 करोड़ रुपए की आय दर्शाई। इसके अलावा कथित फर्जी विज्ञापनों से 5.93 करोड़ रुपए की आय दिखाने की बात कही गई है।

इस तरह विभाग ने कुल 11.66 करोड़ रुपए की आय को लेकर सवाल उठाए हैं।
सीजीएसटी का दावा- दबंग दुनिया और ऐलोरा टोबेको के संचालन में संबंध

आदेश में आरोप लगाया गया है कि डीडीपीपीएल और ऐलोरा टोबेको कंपनी लिमिटेड दोनों पर किशोर वाधवानी का नियंत्रण था। विभाग के मुताबिक डीडीपीपीएल के संसाधनों और उससे जुड़े लोगों का इस्तेमाल कथित तौर पर ऐलोरा टोबेको के संचालन के कुछ हिस्सों को व्यवस्थित करने और आय छिपाने में किया गया।

आदेश में अखबार के वाहनों और प्रेस कार्ड के कथित इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्टर-कर्मचारियों की भूमिका का भी जिक्र
विभागीय आदेश में दबंग दुनिया से जुड़े कई कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी दावे किए गए हैं। इसमें क्राइम रिपोर्टर विनय भाटी के नाम से तान इंटरप्राइज नामक कथित फर्म संचालित होने, कर्मचारी देवेंद्र द्विवेदी को एक कंपनी में डायरेक्टर बनाए जाने और वैभव शर्मा के माध्यम से बालाजी ट्रेडिंग नामक फर्म को कथित फर्जी पते पर पंजीकृत कराने का उल्लेख है।

इसके अलावा कर सलाहकार के रूप में काम करने वाले के.एन. शाबू को डीडीपीपीएल का वेतनभोगी कर्मचारी बताया गया है। ये सभी बातें विभागीय आदेश में किए गए दावे और आरोप हैं।

संस्थान की दलील खारिज
मामले में अखबार प्रबंधन ने कथित तौर पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कर्मचारियों या रिपोर्टरों द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर किए गए कार्यों के लिए संस्थान को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, विभाग ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

हाईकोर्ट पहुंचा था संस्थान, वापस ली याचिका
डिमांड के खिलाफ संस्थान ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ का रुख भी किया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बाद में याचिका वापस ले ली गई, जिसके चलते हाईकोर्ट ने उसे खारिज कर दिया।

वहीं, किशोर वाधवानी से जुड़ी विभिन्न कंपनियों और अन्य पक्षकारों के खिलाफ सेंट्रल जीएसटी विभाग की ओर से पहले ही करीब 1946 करोड़ रुपए की अलग डिमांड निकाले जाने की बात कही गई है। इसमें 151.54 करोड़ रुपए जीएसटी और 1794.54 करोड़ रुपए सेस बताए गए हैं।

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