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Asaram Rape Case: सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से किया इनकार, नहीं मिली राहत

जोधपुर 
जोधपुर में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट राहत नहीं म‍िली है. खराब सेहत के आधार पर अंतरिम जमानत का आदेश देने से सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इनकार कर द‍िया है. सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की याचिका को पेंडिंग रखते हुए कहा कि हालत खराब होने पर दोबारा अंतरिम जमानत की मांग कर सकते है। 

राजस्थान सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि आसाराम ने हाईकोर्ट से 20 दिनों की परोल की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की बात छुपाई थी. फिलहाल हाईकोर्ट से आसाराम को 20 दिनों की परोल मिली हुई है. अंतरिम जमानत की मांग पर पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम बापू की जमानत याचिका पर फ़ैसला करने के लिए AIIMS से विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट मांगी थी। 
 
एम्‍स ने कहा-  हॉस्पिटल में एडमिट करने की जरूरत नहीं

अदालत यह जानना चाहती थी कि आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति वास्तव में कितनी गंभीर है और क्या उन्हें चिकित्सा आधार पर अंतरिम राहत दी जानी चाहिए. एम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आसाराम को हॉस्पिटल में एडमिट करने की जरूरत नहीं है, लेकिन उनके स्वास्थ्य की 24 घंटे निगरानी रखी जानी चाहिए। 

प्रीम कोर्ट ने आसाराम को चौबीसों घंटे मदद के लिए अपनी पसंद का एक ट्रेंड केयरगिवर रखने की इजाजत दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें यह छूट भी दी है कि अगर उनकी हालत बिगड़ती है, तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि आसाराम ने हाई कोर्ट से मौजूदा केस की जानकारी छिपाई थी और पैरोल हासिल की थी, तो बेंच ने इस हरकत की निंदा की. राजस्थान हाई कोर्ट ने कल आसाराम को उनकी लंबी जेल की सजा और अंतरिम जमानत के दौरान उनके व्यवहार को देखते हुए 20 दिन की पैरोल दी थी। 

आसाराम को क्‍यों मिली पैरोल
हाईकोर्ट ने सोमवार (3 अगस्त) को कहा कि राज्य सरकार आसाराम की पैरोल अर्जी खारिज करने के अपने फैसले को उचित ठहराने में विफल रही है. अदालत ने यह भी कहा कि पहले मिली अंतरिम रिहाई के दौरान आसाराम का आचरण संतोषजनक रहा था और वे 13 वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केवल सामान्य या अस्पष्ट आपत्तियां पैरोल से इनकार करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. यदि किसी दोषी की पैरोल याचिका खारिज की जाती है, तो उसके लिए स्पष्ट और ठोस कारण होना आवश्यक है। 

रिहा करने का आदेश
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश दिया. अदालत ने आसाराम को उनकी नियमित पैरोल देते हुए 50,000 रुपये के निजी मुचलके और 25,000-25,000 रुपये की दो जमानतें जमा करने के बाद 20 दिनों के लिए रिहा करने का निर्देश दिया है। 

आसाराम को कौन सी बीमारियां?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई एम्स की रिपोर्ट में आसाराम की बीमारियों का भी जिक्र किया गया है। एम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वयंभू संत आसाराम कई बीमारियों से पीड़ित है। इनमें दिल की बीमारी (कोरोनरी आर्टरी डिजीज), ऑस्टियोपोरोसिस, लंबे समय से सोडियम की कमी (क्रॉनिक हाइपोनेट्रेमिया), थैलेसीमिया और बार-बार पेट से जुड़ी समस्याएं तथा खून की कमी शामिल हैं।

आसाराम  ने की सजा पर रोक लगाने की मांग
मामले की सुनवाई जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने की। आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उसकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई थी। साथ ही उसने इस सजा पर रोक लगाने की भी मांग की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को AIIMS की रिपोर्ट के बारे में बताया गया। लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की अनुपलब्धता के कारण मामले की अगली सुनवाई गुरुवार के लिए टाल दी गई थी ।

हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
आपको बता दें कि बीते मई महीने में राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को बड़ा झटका दिया था। आसाराम को मिली सजा में गैंगरेप के चार्ज हटा दिए गए लेकिन उसकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा गया है। इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा है कि आसाराम फौरन सरेंडर करे। बता दें कि ये मामला साल 2013 का है, जब उत्तर प्रदेश की एक नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया था कि जोधपुर स्थित आश्रम में उसके साथ यौन शोषण किया गया। इसके बाद देशभर में मामला सुर्खियों में आ गया था। जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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