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मध्यप्रदेश

किशोर कुमार केवल गायक नहीं, सम्पूर्ण कला संस्थान थे’, राज्य मंत्री लोधी ने दी श्रद्धांजलि

किशोर कुमार केवल गायक नहीं, सम्पूर्ण कला संस्थान थे- राज्य मंत्री लोधी

सुविख्यात गायक अनु मलिक और अनिल श्रीवास्तव से सुरो से सजी संगीत संध्या
रवीन्द्र भवन में आयोजित संगीत संध्या ये शाम मस्तानी में गूंजे किशोर दा के सदाबहार नगमे

भोपाल

संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि किसी भी समाज की सांस्कृतिक चेतना तभी जीवंत रहती है, जब वह अपने महापुरुषों और महान कलाकारों के अतुलनीय योगदान को नई पीढ़ी तक निरंतर पहुँचाए। इसी विचार को आत्मसात करते हुए संस्कृति विभाग द्वारा भारतीय सिनेमा के शिखर पुरुष स्वर्गीय किशोर कुमार की जन्मस्मृति में लगातार दस वर्षों से संगीत संध्या का गरिमामय आयोजन किया जा रहा है। राज्य मंत्री लोधी रवीन्द्र भवन मे संगीत संध्या 'ये शाम मस्तानी' को संबोधित कर रहे थे। राज्य मंत्री लोधी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय फिल्म संगीत की उस अमूल्य विरासत को नमन है, जिसने दशकों से करोड़ों श्रोताओं को स्वर और संवेदना से बांधे रखा है।

राज्य मंत्री लोधी ने कहा कि मध्यप्रदेश की यह पुण्यधरा अनेक महान विभूतियों की जन्म एवं कर्मस्थली रही है। हमें गर्व है कि इसी माटी ने भारतीय सिनेमा को एक ऐसा अनुपम कलाकार दिया, जिसकी प्रतिभा का कोई एक परिचय पर्याप्त नहीं हो सकता। किशोर कुमार केवल एक पार्श्वगायक नहीं थे, वे अपने आप में एक संपूर्ण कला संस्थान थे। उनकी आवाज में भावों की ऐसी अद्भुत विविधता थी, जो प्रेम, विरह, हास्य, करुणा, उत्साह और जीवन-दर्शन को सहजता से अभिव्यक्त कर देती थी। राज्य मंत्री लोधी के साथ संचालक संस्कृति एन.पी. नामदेव और उप संचालक डॉ. पूजा शुक्ला ने दीप प्रज्ज्वलित कर संगीत संध्या का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री लोधी ने अंतर-महाविद्यालयीन संगीत प्रतियोगिता के विजेता एलएनसीटी ग्रुप के 'आगाज़ बैंड' और सेज यूनिवर्सिटी के बैंड के प्रतिभावान युवाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।

सुविख्यात संगीत निर्देशक व गायक अनु मलिक तथा 'के फॉर किशोर' के विजेता सुप्रसिद्ध गायक अनिल श्रीवास्तव का श्रोताओं ने आत्मीय स्वागत किया। गीत-संगीत की इस सुरमयी शाम की शुरुआत विख्यात संगीतकार अनु मलिक ने की। भोपाल को तहज़ीब का शहर बताते हुए उन्होंने संस्कृति विभाग का आभार जताया और किशोर दा को स्मरण करते हुए अपने लोकप्रिय गीत "ये काली-काली आँखें…" से गायन की शुरुआत की। उन्होंने "एक गरम चाय की प्याली हो", "जवानी फिर न आए" और "ऊंची है बिल्डिंग" जैसे उत्साही गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके पश्चात् गायक अनिल श्रीवास्तव ने मंच संभालते हुए कार्यक्रम के शीर्षक गीत "ये शाम मस्तानी…" से समां बांधा। उन्होंने "रिमझिम गिरे सावन", "एक अजनबी हसीना से", "मेरे सामने वाली खिड़की में", "ये जो मोहब्बत है" और "सलाम-ए-इश्क़" जैसे सदाबहार नगमे प्रस्तुत कर भोपाल के संगीत प्रेमियों को भावविभोर कर दिया।

इस संगीत संध्या की विशेष उपलब्धि युवा प्रतिभाओं की ऊर्जावान सहभागिता रही। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित अंतर-महाविद्यालयीन संगीत प्रतियोगिता के माध्यम से भोपाल की युवा प्रतिभाओं को यह प्रतिष्ठित मंच प्रदान किया गया। सेज यूनिवर्सिटी बैंड ने "हाल क्या है दिलों का", "हमें तुमसे प्यार कितना", "ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे" और "ओम शांति ओम" को नवीन अंदाज़ में पेश किया। वहीं एलएनसीटी के 'आगाज़ बैंड' ने "बचना ए हसीनों", "नीले-नीले अंबर पर", "मेरे सपनों की रानी" और "ओ मेरे दिल के चैन" जैसे कालजयी गीतों की धमाकेदार प्रस्तुतियां देकर खूब तालियां बटोरीं। देर रात तक चले इस सांस्कृतिक उत्सव में बड़ी संख्या में उपस्थित संगीत रसिकों ने किशोर दा के गीतों का भरपूर रसास्वादन किया।

 

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