<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
देश

भारत के लिए राहत की खबर! होर्मुज तनाव के बीच ओमान ने संभाली कमान, तेल-LPG सप्लाई होगी सुचारु

नई दिल्ली

 ईरान-अमेरिका युद्ध का सबसे अहम मुद्दा बना रहा – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज. ये वो रास्ता है, जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल-गैस की ट्रेडिंग होती है. इस मामले को लेकर कई बार बैठकों में बातचीत की गई, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकल सका. अमेरिका इसे मुफ्त पैसेज का रास्ता मानता है और ईरान इस पर अपना कब्जा चाहता है, ऐसे में किसी एक जगह पर बात बन नहीं पा रही थी. अब ओमान इस परिस्थिति में संकटमोचक बनकर उभरा है. उसके दिए हुए प्रस्ताव पर ईरान सकारात्मक रुख दिखा रहा है और अगर वो मान गया तो एक बड़ा टंटा खत्म हो जाएगा। 

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत अपने अंतिम चरण में है. सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए की रिपोर्ट की मानें तो अरागची ने रविवार को कैबिनेट की बैठक में कहा कि बातचीत आगे बढ़ी है और अब यह अंतिम रूप लेने की ओर है. ये सिर्फ खाड़ी देशों नहीं बल्कि एशिया के सभी देशों के लिए उम्मीद की तरह है, जो अपने जोखिम पर यहां से तेल और गैस के टैंकर मंगा रहे थे. डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले टालने के बाद ये इस युद्ध की सबसे बड़ी पॉजिटिव अपडेट है। 

ईरान-ओमान के बीच होर्मुज को लेकर बनी बात?
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट की मानें तो सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में ईरान-ओमान बातचीत के बारे में विस्तार से बताते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने कहा कि दोनों देशों के बीच किसी समझौते पर पहुंचना जलमार्ग के फिर से खुलने या बंद रहने से संबंधित नहीं है. बघाई ने कहा कि ईरान और ओमान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ‘ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम’ के तहत एक नया रास्ता तय करने पर काम कर रहे हैं, जो दोनों पक्षों के संप्रभु अधिकारों के साथ-साथ ईरान के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर सके। 

अमेरिका को लेकर सख्त हैं तेहरान के तेवर 
ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद एब्न अल-रेजा ने रविवार को कहा कि ईरान अमेरिका की की हर धमकी को असली मानता है और उसका जवाब देने के लिए तैयार है. वो इसे सिर्फ मनोवैज्ञानिक युद्ध मानने से इनकार करता है. अल-रेजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा-

    ‘हम न तो हैरान होंगे और न ही चुपचाप बैठे रहेंगे. हम धमकियों का इस्तेमाल अपनी तैयारी बढ़ाने, अपनी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और अपनी ताकत बढ़ाने के आधार के तौर पर करते हैं। 

यह बात उन्होंने तब कही जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे ईरान पर नए हमले न करने पर सहमत हो गए हैं. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ संयुक्त हमले किए जाने के बाद तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ऐसा घेरा है कि उसे छुड़ाने में अमेरिका भी परेशान है। 

ओमान का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर क्या है प्लान?

    ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पहले यह सुझाव दिया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रबंधन ओमान के साथ मिलकर किया जाए और वहां से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क लिया जाए। 

    उस वक्त ओमान ऐसे किसी टैक्स के बिल्कुल खिलाफ था और इसे अंतरराष्ट्रीय जल मानकर फ्री पैसेज की बात कह रहा था. इस बार ओमान के नए प्रस्ताव में भी इसी तरह की व्यवस्था का जिक्र है, हालांकि इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि शुल्क देना पूरी तरह स्वैच्छिक होगा। 

भारत को कैसे होगा फायदा?
ओमान ने इस समुद्री मार्ग को लेकर जो प्रस्ताव रखा है, उसके मुताबिक इस पर केवल ईरान का नियंत्रण नहीं रहेगा. अगर कोई व्यवस्था होती है तो दोनों देश मिलकर इस व्यवस्था को देखेंगे. ईरान ने पहले भी ये बात कही है कि वो ऐसी किसी भी व्यवस्था में अपने दोस्तों को प्राथमिकता देगा. ईरान के साथ भारत के रिश्ते बुरे नहीं हैं लेकिन ओमान के साथ भारत के रिश्ते ऐतिहासिक और घनिष्ठ रहे हैं. ऐसे में स्वाभाविक है कि भारत होर्मुज में अगर ओमान की सहमति के कोई भी सिस्टम लागू होता है, उसका फायदा जरूर मिलेगा. पिछले दिनों जब होर्मुज में हुए जहाजों पर हमले में भारतीय नाविक फंसे थे, तो ओमान की सेना ने उन्हें निकालने में मदद की थी. ऐसे में इस संबंध की घनिष्ठता समझी जा सकती है। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button