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धर्म/ज्योतिष

फ्रेंडशिप डे पर जानें भीष्म की सीख, चार तरह के दोस्तों की पहचान

हर साल अगस्त महीने के पहले रविवार को मित्रता दिवस (friendship Day) मनाया जाता है। हर किसी के जीवन में उनका कोई न कोई दोस्त जरूर होता है। दोस्ती का बंधन सबसे पारदर्शिता और विश्वास पर आधारित होता है, जिसमें आप हर वो बातें अपने दोस्त से कर सकते हैं, जो शायद ही आप किसी और से करें।

प्राचीन सनातन शास्त्रों में भी मित्रता के बारे में काफी कुछ लिखा गया है। हिंदू धर्म के प्रमुख महाकाव्यों में शामिल महाभारत के शांति पर्व में भीष्म पितामह ने युद्धिष्ठिर को 4 तरह के दोस्त बताएं, जिनसे हमें दोस्ती करनी चाहिए।

भीष्म पितामह ने मित्र की पहचान करना बताई
जब भीष्म पितामह मृत्यु शैय्या पर लेटे रहते हैं, तब पांडव पुत्र युधिष्ठिर उनके चरणों के पास आकर सवाल करते हैं कि, सच्चा मित्र और सच्चा शत्रु कौन होता है? तब भीष्ण पितामह इस सवाल का जवाब देते हुए कहते हैं कि, 'समय' और परिस्थितियां ही लाइफ में अच्छे दोस्त या दुश्मन डिसाइड करते हैं। आज का हमारा सबसे अच्छा मित्र कल हमारा सबसे बड़ा कट्टर दुश्मन बन सकता है। परिस्थितियां इसके विपरीत भी देखने को मिल सकती है।

4 तरह के दोस्त कैसे पहचानें?
भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को चार तरह की दोस्ती के बारे में बताया।
    सहार्थ
    भजमान
    सहजन
    कृत्रिम

1. सहार्थ का मतलब, वे लोग जो हममें से दोस्ती करते हैं और इस दोस्ती से कुछ फायदे की उम्मीद रखते हैं। आसान भाषा में इसे समझे तो यह ऐसा है कि, तुम मुझे कुछ दो, मैं भी तुम्हें बदले में कुछ दूंगा। अगर दूसरे व्यक्ति को हममें कुछ सार्थक नहीं दिखाई देता, तो हो सकता है कि, वह हमारा दोस्त न बनें। इसे सहार्थ कहते हैं।

2. भजमन का मतलब है कि, पारिवारिक बंधन के कारण होनी वाली दोस्ती। उदाहरण के लिए हमारे सगे चचेरे भाई-बहन या अन्य रिश्तेदार इसी श्रेणी में आते हैं। सभी रिश्तेदारों को मिलाकर भजमान माना जाता है।

3. सहज का मतलब वो दोस्त होते हैं, जो सगे-संबंधियों के माध्यम से दोस्त बनते हैं। सहज में वो लोग भी शामिल होते हैं, जिन्हें हम खुद अपना दोस्त बनाते हैं। उदाहरण के लिए स्कूल या कॉलेज के दोस्त जिनकी साथ दोस्ती की पहल आपके माध्यम से होती है।

4. कृत्रिम दोस्ती का मतलब ऐसे दोस्त जो आपके साथ आवश्यकता, लाभ या व्यावहारिक उद्देश्य से होती है। इसे आसान भाषा में समझे कि, आप किसी से पैसा देकर दोस्ती करते हैं। ऐसा तब होता है, जब कोई शत्रु अचानक से हमला कर दें, तब आप उस स्थिति में थोड़ा पैसा देकर उससे दोस्ती करके अपनी जान बचा सकते हैं।

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