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स्वस्थ-जगत

Gen Z पर सोशल मीडिया का गहरा असर, लाइक्स और कमेंट्स न मिलने से घटती है खुशी; रिसर्च में बड़ा दावा

नई दिल्ली
आज सोशल मीडिया सिर्फ फोटो और वीडियो शेयर करने का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है. खासकर Gen Z के लिए यह उनकी पहचान, कॉन्फिडेंस और खुशी से भी जुड़ता जा रहा है. एक नई स्टडी में सामने आया है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स, कमेंट्स और फॉलोअर्स का असर अब युवाओं की मेंटल हेल्थ पर भी पड़ रहा है। 

राजस्थान के कोटा स्थित गवर्नमेंट आर्ट्स गर्ल्स कॉलेज के समाजशास्त्र डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. ज्योति सिडाना की अगुवाई में यह स्टडी की गई. 25 दिनों तक चली इस स्टडी में अलग-अलग कॉलेजों की 141 छात्राओं से बात की गई. इसमें यह समझने की कोशिश की गई कि सोशल मीडिया का युवाओं की भावनाओं, रिश्तों और मेंटल हेल्थ पर कितना असर पड़ रहा है। 

लाइक्स और व्यूज से बदल जाता है मूड

स्टडी के मुताबिक 82.9 फीसदी छात्राओं ने कहा कि उनकी पोस्ट पर मिलने वाले लाइक्स, कमेंट्स और व्यूज सीधे उनके मूड को प्रभावित करते हैं. वहीं 9.8 फीसदी ने कहा कि इसका कुछ हद तक असर पड़ता है. सिर्फ 7.3 फीसदी छात्राओं ने माना कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले रिस्पॉन्स से उनके मूड पर कोई फर्क नहीं पड़ता। 

रिसर्च के मुताबिक अब लाइक्स और व्यूज सिर्फ नंबर नहीं रह गए हैं. कई युवाओं के लिए यह उनकी पहचान और लोगों के बीच ऐक्सेप्ट किए जाने का पैमाना बन चुके हैं. अगर किसी पोस्ट पर उम्मीद के मुताबिक रिस्पॉन्स नहीं मिलता, तो कई लोग खुद को कम महत्वपूर्ण महसूस करने लगते हैं। 

हजारों फॉलोअर्स, फिर भी अकेलापन
स्टडी का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह रहा कि 61 फीसदी छात्राओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर हजारों फॉलोअर्स होने के बावजूद वे असल जिंदगी में अकेलापन महसूस करती हैं. रिसर्च में शामिल छात्राओं का कहना था कि ऑनलाइन दोस्ती में वह अपनापन नहीं होता जो आमने-सामने मिलने वाले रिश्तों में होता है. मुश्किल समय में परिवार और करीबी दोस्तों का साथ ही सबसे ज्यादा काम आता है। 

फोन से दूर रहना आसान नहीं
स्टडी में पाया गया कि 48.2 फीसदी छात्राएं नोटिफिकेशन आते ही तुरंत फोन चेक करती हैं. वहीं 43.9 फीसदी ने माना कि उनके फोन इस्तेमाल करने का कोई तय समय नहीं है. यानी वे दिनभर कई बार बिना वजह भी फोन देखती रहती हैं. करीब 70 फीसदी छात्राओं ने कहा कि वे सोशल मीडिया से कुछ समय के लिए दूरी बनाना चाहती हैं, लेकिन ऐसा कर पाना उनके लिए आसान नहीं है। 

ट्रोलिंग भी बन रही तनाव की वजह
स्टडी में 61 फीसदी छात्राओं ने कहा कि ट्रोलिंग या नेगेटिव कमेंट्स की वजह से उन्हें तनाव या दुख महसूस होता है. इसके अलावा 43.9 फीसदी छात्राओं का मानना है कि सोशल मीडिया पर दिखावा बढ़ रहा है. 41.5 फीसदी ने कहा कि इसका असर उनकी असली पहचान पर पड़ता है. वहीं 14.6 फीसदी का मानना है कि सोशल मीडिया लोगों को जरूरत से ज्यादा खर्च करने के लिए भी प्रेरित करता है। 

क्या कहती है स्टडी?
रिसर्च के मुताबिक Gen Z पहली ऐसी पीढ़ी है जिसने बचपन से ही इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ जीवन बिताया है. इससे उन्हें कई नए मौके मिले हैं, लेकिन इसके साथ कंपैरिजन, अकेलापन, तनाव और सोशल मीडिया पर ज्यादा निर्भर होने जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं। 

क्या करना चाहिए?
रिसर्च में सलाह दी गई है कि समय-समय पर डिजिटल डिटॉक्स करना चाहिए. परिवार और दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताना चाहिए. अपनी खुशी और आत्मविश्वास को लाइक्स, कमेंट्स या फॉलोअर्स से नहीं जोड़ना चाहिए. असली रिश्ते और आमने-सामने की बातचीत आज भी मानसिक सेहत के लिए सबसे ज्यादा जरूरी मानी जाती है। 

 

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