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देश

राजस्थान बनेगा प्राकृतिक खेती का केंद्र, एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ेगा जैविक कृषि का दायरा

जयपुर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। राज्य सरकार ढाई लाख किसानों को जोड़कर एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दिया जा सके।
 
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत राज्य में अब तक 2 हजार 380 क्लस्टर गठित किए जा चुके हैं, जो आंध्र प्रदेश के बाद देशभर में सर्वाधिक है। इन क्लस्टरों से प्रदेश के 2 लाख 12 हजार 346 किसान जुड़े हैं, यह संख्या आंध्र प्रदेश व उत्तर प्रदेश के बाद देश में सबसे अधिक है। साथ ही, अब तक राज्य के लगभग 91 हजार 166 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाई जा चुकी है, जो राज्य को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करती है। मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 तक लगभग 49 करोड़ 97 लाख रुपये का व्यय किया गया है।

प्राकृतिक कृषि को नई दिशा दे रही डबल इंजन सरकार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को नई दिशा देने के लिए मिशन मोड पर कार्य कर रही है। प्रदेश में 50 हजार किसानों को गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना के माध्यम से जैविक खाद उत्पादन के लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। जोधपुर, कोटा और उदयपुर में ऑर्गेनिक फूड मार्केट स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को जैविक उत्पादों का बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा। 
राज्य सरकार पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बैलों से खेती करने वाले किसानों को 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दे रही है। गौ संरक्षण एवं संवर्धन के लिए 2 हजार 856 करोड़ रुपये का अनुदान राज्य की गोशालाओं को दिया गया है। बजट 2025-26 में कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर नैचुरल फार्मिंग की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जो अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनेगा।

समृद्ध किसान, स्वस्थ समाज, सुरक्षित पर्यावरण का आधार प्राकृतिक कृषि
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन 25 नवंबर 2024 को प्रारम्भ किया गया, जिसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना तथा किसानों की आय बढ़ाना है। यह मिशन केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रमाणन और विपणन की समग्र सुविधा भी उपलब्ध कराता है। इसके तहत देशभर में 527 कृषि विज्ञान केंद्र, 76 कृषि विश्वविद्यालय, 194 स्थानीय प्राकृतिक खेती संस्थान तथा 18 उत्कृष्टता केंद्र मिशन अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। 

प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किसानों को प्रति एकड़ प्रति वर्ष 4 हजार रुपये की प्रोत्साहन सहायता राशि दो वर्षों तक उपलब्ध करवाई जा रही है। नीति आयोग की मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक खेती अपनाने वाले लगभग 91 प्रतिशत किसानों के उत्पादन में वृद्धि हुई तथा लगभग 90 प्रतिशत किसानों की उत्पादन लागत में कमी आई है। साथ ही, मिट्टी के स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है।
प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय में वृद्धि और भावी पीढ़ियों के लिए स्वस्थ कृषि व्यवस्था का आधार बन रही है। यह समृद्ध किसान, स्वस्थ समाज और सुरक्षित पर्यावरण की आधारशिला है। जब किसान प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर खेती करेगा, तभी विकसित भारत और विकसित राजस्थान के संकल्प को नई गति मिलेगी।

क्या होती है प्राकृतिक कृषि
प्राकृतिक कृषि ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें प्रकृति के अनुरूप खेती की जाती है तथा मिट्टी, जल, जैव विविधता और सूक्ष्मजीवों के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने पर विशेष बल दिया जाता है। इसमें स्थानीय संसाधनों, विशेषकर देशी गाय आधारित जैविक घोल, फसल अवशेष, मल्चिंग तथा मिश्रित खेती का उपयोग किया जाता है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से किसानों की उत्पादन लागत में कमी आती है और उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध होते हैं।

 

 

 

 

 

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