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मध्यप्रदेश

श्री दादाजी धाम खंडवा में गुरु पूर्णिमा महोत्सव शुरू, डेढ़ लाख भक्तों की भीड़; स्पेशल मेमू ट्रेन और 500 भंडारों की व्यवस्था

 खंडवा
 क्या आपने कभी ऐसे शहर के बारे में सुना है, जहां लाखों मेहमान आएं और उन्हें अपनी जेब से एक रुपया भी खर्च न करना पड़े. जहां पूरा शहर मेजबान बन जाए, सड़कों पर भंडारे लग जाएं, चाय-नाश्ता, भोजन, 56 पकवान, दवा, ठहरने की व्यवस्था और सेवा के लिए हजारों हाथ अपने आप आगे बढ़ जाएं. यह कोई कल्पना नहीं बल्कि गुरु- शिष्य परंपरा के अनूठे धाम दादाजी धूनीवाले महाराज के दरबार और अद्भुत शहर खंडवा की पहचान है. दादाजी धूनीवाले दरबार में 27 से 29 जुलाई तक चल रहे तीन दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव में देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. गुरु पूर्णिमा पर आस्था के साथ-साथ सेवा का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जो शायद पूरे देश में अपनी तरह का अनोखा उदाहरण है। 

खंडवा में गुरु-शिष्य परंपरा का अद्भुत केंद्र है दादाजी धूनीवाले महाराज का दरबार. यहां अवधूत संत बड़े दादाजी केशवानंद महाराज और उनके शिष्य छोटे दादाजी हरिहरनाथ महाराज की समाधियां हैं. दादाजी धूनीवाले एक अवधूत संत थे, जिन्होंने 1930 में यहां समाधि ली थी. गुरु परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनके शिष्य छोटे दादाजी भी यहां 1942 में समाधि लीन हुए थे. दोनों ही संत मां नर्मदा के अनन्य भक्त थे और धूनी रमाये रहते थे. आज भी वही धूनी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. गुरु पूर्णिमा पर लाखों भक्त इसी धूनी की भभूत को प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर गुरु का आशीर्वाद लेते हैं। 

शहरभर में 500 से अधिक भंडारों में पूरी-सब्जी, खिचड़ी, मिठाई से लेकर आइसक्रीम तक का प्रसाद वितरित किया जा रहा है। सुरक्षा के लिए 2 हजार पुलिसकर्मी तैनात हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खंडवा-सनावद के बीच स्पेशल मेमू ट्रेन भी चलाई गई है।

उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में तड़के मंदिर के पट खुलते ही दर्शन शुरू हो गए। भगवान श्रीकृष्ण और सांदीपनि मुनि का शिप्रा, गंगा और गोमती के जल से अभिषेक कर पंचामृत पूजन किया गया। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यहां कार्यक्रम में शामिल होंगे और 1,250 सीट क्षमता वाले अत्याधुनिक गीता भवन का लोकार्पण करेंगे।

सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के सान्निध्य में हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु वंदन और विशेष पूजा-अर्चना की। पंडित मिश्रा ने गुरु पूर्णिमा के महत्व और गुरु-शिष्य परंपरा पर अपने विचार साझा किए।

उधर, हरदा के 125 साल पुराने पट्टाभिराम मंदिर में आठ दिवसीय गुरुपूर्णिमा महोत्सव के तहत ब्रह्म मुहूर्त में काकड़ा आरती हुई। रिमझिम बारिश के बीच निकली प्रभातफेरी में श्रद्धालुओं ने मार्ग में आने वाले मंदिरों में ध्वज पूजन कर भक्तिमय माहौल बनाया।

सुबह से शुरू हुआ दर्शन का सिलसिला
श्री दादाजी धाम में गुरु पूर्णिमा का मुख्य दिवस बुधवार को मनाया जाएगा। पर्व से एक सप्ताह पहले ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। सोमवार तक करीब डेढ़ श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। मंगलवार दिनभर निशान चढ़ाने का सिलसिला भी जारी रहा। पांढुर्ना, बैतूल, भैंसदेही, सहित खंडवा व आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु निशान चढ़ाने पहुंचे। दिनभर में 21 सौ से अधिक निशान श्री समाधि पर अर्पित किए गए। पांढुर्ना रथ यात्रा का निशान रात 10 बजे चढ़ाया गया। बुधवार को करीब 2 लाख भक्तों के आने की संभावना है। पर्व की मुख्य आरती रात 8.30 बजे 108 दीपों से की जाएगी।

3 बजे 6 नंबर गेट से आरंभ किए दर्शन
श्री दादाजी धाम में सुबह सामान्य भीड़ के चलते सीधे एक नंबर गेट से ही दर्शन कराए गए। दोपहर में भीड़ बढऩे पर 6 नंबर गेट से प्रवेश दिया गया, हालांकि बारादरी से सीधे मंदिर में भेजा गया, जिगजैग का उपयोग नहीं किया गया। नए मंदिर निर्माण के चलते यहां बनाए गए अस्थाई पुल से होते हुए सावधानीपूर्वक, सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को निकाला गया।

नीमगांव के भक्तों ने निकाला मशाल जुलूस
प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा पर नीमगांव के श्रद्धालुओं द्वारा मशाल जुलूस निकाला जाता है। इस बार गुरु पूर्णिमा मंगलवार रात से शुरू होकर बुधवार रात 8 बजे तक का ही होने के कारण नीम गांव के भक्तों ने एक दिन पहले मंगलवार को ही मशाल जुलूस निकाला। रात 11 बजे नीमगांव के भक्तों ने मशाल लेकर मंदिर की परिक्रमा की।

पुलिस ने संभाली व्यवस्था
पर्व को लेकर श्री दादाजी धाम सहित शहरभर में अधिकारियों, पुलिसकर्मियों सहित 863 का बल तैनात किया गया है। पुलिस के साथ स्काउट-गाइड भी पुलिस के मददगार बनकर मेला परिसर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यहां 1 नंबर गेट के सामने पुलिस कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है और अस्थाई अस्पताल में भी डॉक्टर और स्टाफ तैनात हो गया।

सैकड़ों किमी की पदयात्रा कर श्रद्धालु पहुंचते खंडवा
मंदिर ट्रस्ट के रोचक नागोरी ने कहा कि हाथों में निशान, होंठों पर भज लो दादाजी का नाम और मन में अटूट श्रद्धा, सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा कर श्रद्धालु खंडवा पहुंचते हैं. बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, युवा, हर उम्र का भक्त इस यात्रा में शामिल होता है. गुरु पूर्णिमा के दो दिन पहले से ही यहां दर्शनार्थियों का आना शुरू हो जाता है. कई भक्त तो हाथों में झंडा (निशान) लिए सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए यहां पहुंचते हैं. इस यात्रा में बच्चे, बूढ़े और महिलाऐं सभी होते हैं. सभी की जुबान पर बस एक ही बात होती है, ‘भज लो दादाजी का नाम.’ धाम पहुंचे दादाजी के भक्त योगेश सोनी, कल्याण शर्मा और अंकित चौहान ने कहा कि वे अपनी थकान और मुसीबतें अपने गुरु दादाजी पर छोड़ देते हैं. सैकड़ों किलोमीटर पैदल सफर करके आने वाले दादाजी के भक्तों का मानना है कि गुरु की भक्ति करने से उनका जीवन परिवर्तित हो गया। 

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