<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
देश

एकल बीएड कॉलेजों पर बड़ा फैसला, मर्ज होकर चलेंगे नए पाठ्यक्रम

पटना
 राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के आदेश के एक साल बाद राज्य में एकल बीएड (बैचलर ऑफ एजुकेशन) कॉलेजों को बहुविषयक संस्थानों में बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह बीएड पाठ्यक्रम के संचालन में महत्वपूर्ण बदलाव की वजह से हुआ है। अब बीएड पाठ्यक्रम का शिक्षण-प्रशिक्षण केवल बहुविषयक कॉलेजों द्वारा ही प्रदान किया जाएगा।

इस संबंध में एनसीटीई ने अप्रैल 2025 में ही राज्यों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किया था जिस पर उच्च शिक्षा विभाग अमल करने की तैयारी में है। इसके तहत बीएड की पढ़ाई अब केवल मल्टी डिसिप्लिनरी (बहुविषयक) कॉलेजों में होगी। इसके दायरे में सरकारी व निजी 352 बीएड कॉलेज आएंगे।

उच्च शिक्षा विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के दिशा-निर्देश के के आलोक में तीन किलोमीटर के दायरे वाले सभी एकल बीएड कॉलेज अब डिग्री कॉलेजों में मर्ज हो जाएंगे।

वहीं, 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले एकल बीएड कॉलेजों को अन्य डिग्री कॉलेज के साथ मिलकर बीएड की पढ़ाई करवानी होगी। प्रति कोर्स में 50 छात्रों को दाखिला मिलेगा। एनसीटीई ने देश के सभी 15 हजार से अधिक बीएड कॉलेजों को मल्टीडिसिप्लिनरी में तब्दील करने के लिए वर्ष 2030 तक का समय दिया है।

दरअसल, उच्च शिक्षा को विस्तार देने की मुहिम में एकल बीएड कॉलेजों को जल्द ही बहुविषयक संस्थानों में तब्दील करने का फैसला लिया गया है। इसके तहत इन संस्थानों में अब बीएड के साथ ही बीए, बीएससी और बीकाम जैसे कोर्स भी अब संचालित होंगे।

एनसीटीई के दिशा-निर्देश के आलोक में उच्च शिक्षा विभाग की इस पहल से यह माना जा रहा है कि जल्द ही राज्य के इन सभी संस्थानों के संसाधनों व क्षमता आदि का अध्ययन कराके इन्हें उस दिशा में आगे बढ़ने में मदद दी जाएगी।

बंद होने के कगार पर खड़े बीएड कॉलेजों को बड़ी राहत
एनसीटीई के दिशा-निर्देश पर अमल होने से उन बीएड कॉलेजों को बड़ी राहत मिलेगी जो छात्रों और आर्थिक संसाधनों की कमी की वजह से बंद होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। एनसीटीई ने वर्ष 2030 तक सिंगल डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करवाने वाले बीएड कॉलेजों को मर्ज कर पढ़ाई करवाने का विकल्प दिया है।

ऐसे बीएड कॉलेज अब अपने शहर या नजदीक के दूसरे डिग्री कॉलेजों के साथ मिलकर पढ़ाई करवा सकेंगे। इसके लिए दोनों कॉलेजों को एक समझौता करना होगा। इसमें वे एक-दूसरे के शिक्षक, भवन समेत बुनियादी ढांचे का उपयोग कर सकेंगे।

एनसीटीई ने क्यों की ये पहल?
पटना विश्वविद्यालय एवं नालंदा खुला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रासबिहारी सिंह के मुताबिक एनसीटीई ने यह पहल इसलिए की है क्योंकि नए इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स के तहत संस्थानों को बीए, बीएससी व बीकाम जैसे कोर्स चलाना अनिवार्य है।

पांच साल के इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स में अब बीए-बीएड, बीएससी-बीएड व बीकॉम-बीएड जैसे कोर्स संचालित किए जा रहे है। हालांकि अभी इस इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स को चलाने की अनुमति कुछ चुनिंदा उच्च शिक्षण संस्थानों को ही दी गई है। इनमें कई आईआईटी और एनआईटी भी शामिल हैं।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत देश के उच्च शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके जरिए जरूरी है कि देश में उच्च शिक्षण संस्थानों के दायरे को विस्तार दिया जाए। मौजूदा समय में देश में उच्च शिक्षा का जीईआर करीब 30 प्रतिशत है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button