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उत्तर प्रदेश

स्मार्ट बिजली मीटरों के खिलाफ बढ़ा विरोध, योजना रोकने की उठी मांग

लखनऊ
स्मार्ट बिजली मीटरों के खिलाफ एक बार फिर मोचा खुलने की संभावना बढ़ गई है। स्मार्ट बिजली मीटरों से ज्यादा बिल आने की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। इसके बाद भी स्मार्ट मीटरों से ही नए कनेक्शन जारी किए जा रहे हैं। पहले इन्हीं का इस्तेमाल पुराने मीटरों को बदलने के लिए भी हो रहा था। हालांकि, गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुराने मीटरों से बदलने पर रोक लगा दी थी। इसकी गुणवत्ता पर तस्वीर अब भी साफ नहीं है, फिर भी नए कनेक्शन में इनका इस्तेमाल हो रहा है। स्मार्ट मीटरों से बिल ज्यादा आने की शिकायतें लगातार आ रही हैं। उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर योजना को पूरी तरह बंद करने की मांग भी की है

गुणवत्ता रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं
केंद्र सरकार की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदला जा रहा था। बाद में उन्हें प्रीपेड मोड में भी बदला जाने लगा था। स्मार्ट मीटरों के तेज चलने समेत तमाम तकनीकी खामियों के बाद मुख्यमंत्री ने इसकी गुणवत्ता की जांच के आदेश दे दिए थे। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने प्रीपेड व्यवस्था भी समाप्त कर दी थी। इनकी गुणवत्ता की रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं है। बावजूद इसके नए कनेक्शनों में इनका इस्तेमाल जारी है। सूत्रों के मुताबिक रोक के बाद से अब तक सवा लाख से ज्यादा नए कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं।

बीते साल से दिए जा रहे नए कनेक्शन
बीते साल 10 सितंबर के बाद से यूपी में नए कनेक्शन स्मार्ट मीटरों से ही दिए जा रहे हैं। अब तक नए कनेक्शन में इस्तेमाल इन मीटरों की संख्या 10 लाख होने का अनुमान है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि स्मार्ट मीटर प्रणाली पारदर्शी होनी चाहिए। जिनकी गुणवत्ता प्रमाणित नहीं है, उनका इस्तेमाल होना उचित नहीं है। इस मामले में नियामक आयोग से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।

नवंबर में खरीद के हुए निर्देश
बीते साल नवंबर में नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को स्पष्ट किया था कि आरडीएसएस के मीटरों का इस्तेमाल केवल पुराने मीटरों को बदलने के लिए होना है। नए कनेक्शन में न किया जाए। पावर कॉरपोरेशन अगर स्मार्ट मीटर के साथ कनेक्शन देना चाहता है तो नए खरीदे। आयोग के आदेश के बाद भी नए मीटर खरीदने के बजाय पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने वाली योजना के मीटरों से नया कनेक्शन देना जारी रखे है।

स्मार्ट मीटर से ज्यादा आ रहा बिल, उपभोक्ता परेशान
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर योजना बंद करने की मांग की है। परिषद के मुताबिक यह योजना उपभोक्ता हित में नहीं है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल बढ़कर आ रहे हैं और इससे उपभोक्ता परेशान हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बीते दिनों समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बढ़कर बिल आने और स्मार्ट मीटर की कमियों पर नाराजगी जता चुके हैं।

सीएम योगी से स्मार्ट मीटर योजना पर रोक की मांग
इसके अलावा परफॉर्मेंस बैंक गारंटी को भी कार्यदायी संस्थाओं की मांग पर 10% से घटाकर 3% कर दिया गया। बावजूद इसके प्रदेश में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत ही बने रहे। उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री से स्मार्ट मीटर परियोजना की उच्च स्तरीय समीक्षा करवाने और योजना पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उपभोक्ताओं से ओवर बिलिंग के मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए और कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित न रहकर धरातल पर दिखाई दे।

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