<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
बिज़नेस

भारत ने बढ़ाया तेल भंडार, रूस बना सबसे बड़ा सप्लायर

नई दिल्‍ली
 यूक्रेन संघर्ष के बाद बहुत कुछ बदला है। सबसे बड़ा बदलाव तेल सप्‍लाई को लेकर हुआ है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों ने ग्लोबल ऑयल ट्रेड को बदल डाला है। इसके बाद रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बन गया है। सस्ते रूसी कच्चे तेल की वजह से भारतीय रिफाइनर रिफाइंड प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट करते हुए भी अपनी ऑपरेशनल क्षमता को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने में कामयाब रहे हैं।

भारत ने चुपचाप कर लिया बड़ा काम
भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में भारत ने चुपचाप अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत किया है। उसने रिकॉर्ड मात्रा में रूसी तेल का आयात करके कच्चे तेल का स्टॉक फिर से जमा किया है।

एनर्जी इकोनॉमिस्ट और NGP एनर्जी कैपिटल मैनेजमेंट के पूर्व चीफ इकोनॉमिस्ट अनस अलहाजी ने इस ट्रेंड पर रोशनी डाली है। यह ट्रेंड दिखाता है कि कैसे नई दिल्ली ने ईंधन की बढ़ती मांग, मजबूत एक्सपोर्ट और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों के बीच बैलेंस बनाया है।

बनी हुई है रूस से सप्‍लाई
अनस अलहाजी के मुताबिक, जून में रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इससे देश को पहले हुई कमी के बाद अपना तेल स्टॉक फिर से भरने में मदद मिली। उन्होंने बताया कि स्टॉक लेवल में हालिया गिरावट की मुख्य वजह सप्लाई में रुकावट नहीं, बल्कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में भारी बढ़ोतरी थी।

स्टॉक डेटा यह भी दिखाता है कि साल के बीच में आई गिरावट के बाद 2026 में इसमें जोरदार रिकवरी हुई। साप्ताहिक कच्चे तेल का स्टॉक 15वें हफ्ते के आसपास घटकर लगभग 8.5 करोड़ बैरल हो गया था। लेकिन, फिर इसमें लगातार सुधार हुआ। 25वें हफ्ते तक यह 10.7 करोड़ बैरल को पार कर गया। यह इस साल का सबसे ऊंचा स्तर था। वैसे तो तब से स्टॉक में कुछ कमी आई है। लेकिन, यह मोटे तौर पर ऐतिहासिक औसत के अनुरूप बना हुआ है।

रूसी तेल दे रहा भारत को मजबूती
यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों ने ग्लोबल ऑयल ट्रेड को बदल दिया है। इसके बाद रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बन गया है। सस्ते रूसी कच्चे तेल की वजह से भारतीय रिफाइनर रिफाइंड प्रोडक्ट्स (जैसे डीजल, गैसोलीन और जेट फ्यूल) का इंटरनेशनल मार्केट में एक्सपोर्ट करते हुए भी अपनी ऑपरेशनल क्षमता को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने में कामयाब रहे हैं।

अलहाजी ने बताया कि भारत का ज्यादातर रूसी कच्चा तेल आयात बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से होकर आता है। यह स्‍ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला दुनिया का अहम समुद्री रास्‍ता है।

बना हुआ है रिस्‍क
स्टॉक में हालिया सुधार के बावजूद अलहाजी ने चेतावनी दी है कि इस शिपिंग रूट पर भारत की निर्भरता बड़ा रणनीतिक जोखिम पैदा करती है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर लिखा, 'भारत का ज्‍यादातर आयात बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के जरिए रूस से होता है। इस पर मौजूदा संकट का कोई असर नहीं पड़ा है। हालांकि, किसी वजह से बाब-अल-मंदेब बंद हो जाता है तो भारत को भारी नुकसान होगा

एक्‍सपर्ट ने यह बात ऐसे समय में कही है जब हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण यह अति-संवेदनशील और जोखिम वाला क्षेत्र बन गया है।

इस स्‍ट्रेट में लंबे समय तक रुकावट आने पर जहाजों को 'केप ऑफ गुड होप' से होकर बहुत लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे माल ढुलाई का खर्च, यात्रा का समय और बीमा प्रीमियम बढ़ जाएंगे।

ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की सप्लाई कम हो सकती है। रिफाइनरी मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ने के आसार हैं।

चूंकि ग्लोबल शिपिंग रूट पर जियोपॉलिटिकल टेंशन का असर बढ़ता जा रहा है। लिहाजा, सप्लाई के अलग-अलग रास्ते अपनाते हुए कच्चे तेल का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने की भारत की क्षमता उसकी एनर्जी सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी के लिए अहम बनी रहेगी।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button