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खेल-जगत

MS Dhoni की राह पर कप्तान श्रेयस अय्यर, जिम्बाब्वे सीरीज जीतते ही ट्रॉफी देकर जीता दिल

हरारे

भारतीय टीम ने जिम्बाब्वे को टी20 सीरीज के आखिरी मुकाबले में जिम्बाब्वे को 35 रनों से हराया. इस जीत के साथ ही भारत ने जिम्बाब्वे का तीन मैचों की टी20 सीरीज में 3-0 से सूपड़ा साफ कर दिया. 26 जुलाई (रविवार) को हरारे के हरारे स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित इस मुकाबले में भारतीय टीम ने जिम्बाब्वे के सामने 193 रनों का टारगेट सेट किया था. लेकिन मेजबान टीम सात विकेट पर 157 रन ही बना सकी। 

जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज जीतने के बाद भारतीय टीम ने मैदान पर जीत का जश्न मनाया, लेकिन इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा कप्तान श्रेयस अय्यर के एक खास कदम की हुई. श्रेयस अय्यर ने युवा खिलाड़ियों अशोक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी को थमा दिया. दोनों युवा खिलाड़ियों ने ट्रॉफी हाथ में लेकर पूरी टीम के साथ जीत का जश्न मनाया. इस दौरान साथी खिलाड़ियों ने उनका उत्साह बढ़ाया और यादगार तस्वीरें भी खिंचवाईं। 

कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा- मेरे खिलाड़ी बहुत निडर हैं

भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज 3-0 से जीत ली है। बतौर भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर की यह पहली सीरीज जीत है। अय्यर ने इस जीत को खास बताया है। साथ ही उन्होंने सीरीज में युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तारीफ की है।
श्रेयस अय्यर ने जीत के बाद क्या कहा?

सीरीज जीत के बाद श्रेयस अय्यर ने कहा, 'हमने देखा कि खिलाड़ी कितने निडर हैं, ये युवा खिलाड़ियों का एक ग्रुप हैं जो मैदान पर जबरदस्त ऊर्जा और इरादा दिखा रहे हैं, खासकर जब आप लगातार दो गेम खेलते हैं। एक कप्तान और एक टीम के तौर पर मुझे ऐसी ऊर्जा की जरूरत होती है। वे आज भी लगातार दो गेम में ऐसा ही कर सकते हैं। हां, जिम्बाब्वे में सीरीज जीतना मेरे लिए एक खास एहसास है। यह एक खास पल होने वाला है।'

आईपीएल का मिला फायदा
श्रेयस अय्यर ने आईपीएल जैसे टूर्नामेंट के जरिए खिलाड़ियों को मिलने वाले बड़े हाई-लेवल एक्सपोजर की ओर इशारा करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि अनुभव के आधार पर मैंने उन सबके बराबर ही मैच खेले हैं। कई खिलाड़ी हैं जिनके पास जबरदस्त अनुभव है क्योंकि आजकल वे आईपीएल में भी खेलते हैं।

उन्होंने कहा, 'खिलाड़ियों में खास टैलेंट हैं और आप उनसे जितना अच्छा निकलवा सकते हैं, वह टीम के लिए भी फायदेमंद है। हर बार जब मैं मैदान पर कदम रखता हूं तो यह पक्का करता हूं कि वे सहज कैसे हों? क्योंकि तभी आप उनसे उनका बेस्ट निकलवा सकते हैं।'

सामने अभी कई और चुनौतियां
अय्यर ने टीम के भविष्य की चुनौतियों के लिए निरंतरता और हिम्मत बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। भारतीय कप्तान ने कहा कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारत व्हाइट-बॉल सीरीज के लिए बांग्लादेश का दौरा भी कर सकता है और सितंबर में तीन टी20 अफगानिस्तान के खिलाफ भी हो सकते हैं। भारत का अगला व्हाइट-बॉल असाइनमेंट तीन वनडे और पांच टी20 का वेस्टइंडीज के खिलाफ है। इसके बाद जापान के ऐची-नागोया में एशियन गेम्स होंगे। अय्यर ने आखिर में टीम के प्रदर्शन में लगातार सुधार करते हुए पूर्व से टी20 में तय स्तर के मुताबिक खेलने की प्रतिबद्धता दोहराई।

 

तेज गेंदबाज अशोक शर्मा के लिए यह सीरीज बेहद खास रही क्योंकि उन्होंने इसी दौरे पर भारत के लिए अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया. वहीं 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने कुछ दिन पहले इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया के लिए अपने इंटरनेशनल करियर की शुरुआत की थी. ऐसे में दोनों युवा खिलाड़ियों को ट्रॉफी सौंपना उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। 

दरअसल, भारतीय क्रिकेट में यह एक खूबसूरत परंपरा बन चुकी है. इसकी शुरुआत पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने की थी. धोनी अक्सर कोई बड़ी सीरीज या टूर्नामेंट जीतने के बाद ट्रॉफी टीम के युवा खिलाड़ियों को सौंप देते थे, ताकि वे उस पल को जी सकें और टीम के साथ अपनी अहम भूमिका महसूस करें। 

एमएस धोनी के बाद विराट कोहली, रोहित शर्मा, हार्दिक पंड्या, केएल राहुल, सूर्यकुमार यादव और श्रेयस अय्यर ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया. यही वजह है कि भारतीय क्रिकेट में ट्रॉफी सिर्फ कप्तान की नहीं, बल्कि पूरी टीम की उपलब्धि मानी जाती है. युवा खिलाड़ियों को इस तरह सम्मान देना टीम इंडिया की मजबूत संस्कृति और ड्रेसिंग रूम के माहौल को भी दर्शाता है। 

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