<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
बिज़नेस

डॉलर निर्भरता घटाने की दिशा में भारत का रुपया व्यापार मजबूत

नई दिल्ली
वैश्विक उथल-पुथल और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के बावजूद भारत ने विदेश से व्यापार में भारतीय रुपये का इस्तेमाल काफी बढ़ा दिया है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने इस साल मार्च से मई के बीच करीब 15 अरब डॉलर (करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये) के आयात का भुगतान भारतीय रुपये में किया। रुपये में भुगतान में आई इस रिकॉर्ड तेजी की सबसे बड़ी वजह रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदना है।

रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से मई के बीच भारत ने अपने कुल आयात का 7.1% हिस्सा रुपये में चुकाया। इससे पहले (दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक) केवल 2.4% आयात का भुगतान ही रुपये में होता था। इन 3 महीनों में 1.44 लाख करोड़ रुपये का कारोबार हुआ जो पिछले पूरे वित्त वर्ष (2023-24 में 99,680 करोड़ रुपये) से भी कहीं ज्यादा है।

रूस बना सबसे बड़ा कारण
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रुपये में बढ़े इस लेन-देन की असली वजह रूसी तेल की भारी खरीदारी है। भारत ने मार्च से मई के बीच रूस से 17.13 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा, जो पिछले साल से 30% ज्यादा है। अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर कुछ समय के लिए छूट दी थी, जिसका भारत ने फायदा उठाया और खरीदारी बढ़ा दी।

कैसे काम करता है रुपया व्यापार?
सामान्य तौर पर भारत को विदेश से सामान खरीदने के लिए अमेरिकी डॉलर देना पड़ता है। लेकिन रुपया व्यापार में भारतीय कंपनियां भारत के ही बैंकों में बने विदेशी बैंकों के वोस्ट्रो अकाउंट (Vostro Account) में रुपये जमा कर देती हैं।
    इससे भारत को अपने डॉलर खर्च नहीं करने पड़ते और विदेशी मुद्रा भंडार बचा रहता है।
    रूस को तेल के बदले जो रुपये मिलते हैं, वह उनसे भारत से ही दूसरा सामान (जैसे दवाएं, अनाज, मशीनें) खरीद सकता है।

निर्यात में रुपये का रोल अभी भी कम
भले ही भारत ने सामान खरीदने में रुपये का इस्तेमाल खूब बढ़ाया हो, लेकिन दुनिया को सामान बेचने के मामले में अभी भी रुपये में पेमेंट कम ही मिलती है। भारत विदेशों में जितना सामान बेचता है, उसका केवल 1.8% से 3.5% हिस्सा ही रुपये में वापस मिलता है। बाकी का भुगतान अभी भी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं में ही होता है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button