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मध्यप्रदेश

कहा मदद करने वाली सरकार है मोहन सरकार

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों आज आलीराजपुर के भाभरा में बलराम कृषि महोत्सव के अंतर्गत सम्मानित होने पर किसानों की खुशी का खुशियों का ठिकाना नहीं रहा।

विदेश मे आम बेचने की है इच्छा

कांदा के यशपाल सिंह ने बताया कि हम आम की प्राकृतिक खेती करते हैं। करीब 18 एकड़ इलाके में 1000 से ज्यादा केसर आम के पेड़ हैं। इनमें जो भी फसल होती है, वो सब दूसरे राज्यों में बेचते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के हाथों सम्मानित होकर बहुत खुशी हो रही है। खासकर इसलिए कि हमने इस काम की शुरुआत सरकार की मदद से ही की थी। शुरुआत में विभाग की ओर से ही हमें 400 पौधे दिए गए थे। आर्थिक सहायता भी मिली थी। यही बढ़कर आज हमारे खेतों में 1000 से ज्यादा पेड़ हैं। सरकार की नीतियां इतनी अच्छी हैं कि मुझे आम बेचने के लिए बाजार में नहीं जाना पड़ता। मैं जंगल में रहता हूं, लेकिन ग्राहक सीधे वहीं पहुंच जाते हैं। इतना ही नहीं, सरकार की सोलर पंप लगाने की योजना से भी हमें काफी मदद मिलती है। मैं मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करता हूं। हम चाहते हैं कि हमें प्राकृतिक खेती का प्रमाणपत्र मिल जाए। इससे हम विदेशों में भी आम बेच पाएंगे।

सरकार बहुत कुछ कर रही हमारे लिए

जोबट के कांदा ग्राम के विजय सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होकर वे बहुत खुश हैं। वे करीब 9 एकड़ में केसर आम की खेती करते हैं। उनके 1000 से ज्यादा पेड़ हैं। इसके लिए सरकार से उन्हें मदद मिली थी। विभाग की ओर से आम के पेड़ और आर्थिक सहायता मिली थी। इस साल उन्होंने करीब 8 लाख के आम बेचे। उनके सारे आम स्थानीय बाजार में ही बिक जाते हैं, कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती। विजय सिंह का कहना है कि सरकार उनके लिए बहुत कुछ कर रही है। यदि आम के बागानों की तार फेंसिंग का कोई इंतजाम हो जाए तो फसल ज्यादा सुरक्षित रहेगी।

फसल बीमा की राहत है बड़ा सहारा

जानिया – केल्दी की माल कहते हैँ उन्हें मुख्यमंत्री जी के हाथों सम्मानित होकर बहुत अच्छा लग रहा है। हम खेतों में मेहनत करते हैं। जब उसको सम्मान मिलता है तो खुशी मिलती है। मेरी 2-3 हेक्टेयर खेती है। हम उसमें मोटा अनाज जैसे ज्वार, बाजड़ा, मक्का आदि उपजाते हैं। इसके अलावा तूअर और उड़द की भी खेती होती है। इस बार बारिश कम हो रही है, लेकिन मोटा अनाज कम पानी में भी पक जाता है। इसलिए ज्यादा दिक्कत नहीं होती। वैसे भी, यदि खेती में कोई परेशानी होती है तो सरकार की ओर से मदद मिल जाती है। फसल खराब होने पर बीमा का पैसा मिल जाता है जिससे काफी राहत होती है। शासन हमारी हरसंभव मदद करता है, अधिकारी भी हमें सलाह देते रहते हैं। सरकार की कई योजनाएं हैं। जागरूक किसानों को पर्याप्त मदद मिल जाती है। हम सरकार से संतुष्ट हैं।

औजड़ की पूनम सिंह कहती हैं आज मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होने का मौका मिल रहा है, इसकी बहुत ज्यादा खुशी है। हमारे पास 1.30 एकड़ खेत हैं। इसमें कपास, ज्वार, बाजरा, मूंगफली और सोयाबीन उगाते हैं। इस बार भी कपास और बाजरे की बोवनी की है। इस साल बारिश कम हो रही है। इससे फसल पर असर पड़ने की आशंका है, लेकिन हमें सरकारी मदद मिल जाती है। फसल खराब होती है तो शासन की ओर से अनुदान मिल जाता है। फसल बेचने के लिए भी ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। मंडी में फसल बिक जाती है। फसल की कीमत कम मिले तो भावांतर योजना का फायदा भी मिलता है। विभाग के अधिकारी भी हमसे नियमित संपर्क में रहते हैं। हमें ऑर्गेनिक खाद और खेती के बेहतर तरीकों के बारे में जानकारी देते रहते हैं। हम सरकार के काम से बहुत संतुष्ट हैं और चाहते हैं कि भविष्य में भी शासन हमारे लिए और भी अच्छी योजनाएं शुरू करे।

सोरवा के मुकेश कहते हैँ आज मुझे मुख्यमंत्री जी के हाथों सम्मानित होने का मौका मिल रहा है। इसकी बेहद खुशी है। मैं करीब 9 एकड़ खेत में सोयाबीन, उड़द, मूंगफली और कपास जैसी फसलों की खेती करता हूं। प्राकृतिक खेती के लिए शासन की ओर से हरसंभव मदद मिलती है। हमें विभाग की ओर से खाद और बीज दिए जाते हैं। समय-समय पर खेती के बेहतर तरीकों के बारे में भी जानकारी दी जाती है। इस बार बारिश कम हुई है। सूखा पड़ने के आसार लग रहे हैं। हम चाहते हैं कि शासन की ओर से इस साल ज्यादा मुआवजा मिले।

आमखूंट के नौरतन को जब अधिकारियों ने फोन पर बताया कि मुख्यमंत्री जी के हाथों सम्मान मिलेगा। इसकी मुझे प्रसन्नता है। मेरे पास ढाई-तीन एकड़ खेत है। इसमें धान, ज्वार, बाजरा, उड़द, तूअर जैसी फसलें प्राकृतिक तरीके से उपजाते हैं। इस बार बारिश कम हुई है। इसलिए हमने उड़द की फसल लगाई है क्योंकि वह कम पानी में भी पक जाता है। कम बारिश की चिंता है। शासन की योजनाओं का लाभ हमें मिलता है। हमें फसल की अच्छी कीमत मिलना चाहिए।

नानपुर की गनबाई ने बताया कि मुझे मुख्यमंत्री जी के हाथों सम्मान मिलने के बारे में जानकारी मिली। मैंने इसकी सारी तैयारी भी कर ली थी, लेकिन परिवार में गमी हो गई। फिर भी ये जानकर अच्छा लगता है सरकार हम जैसे किसानों के बारे में भी सोचती है। मेरे पास करीब दो एकड़ खेत है। इसमें मक्का, ज्वार, बाजरा, मूंगफली, उड़द आदि की प्राकृतिक खेती करती हूं। इसके लिए खाद और बीज अधिकारी उपलब्ध कराते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र में समय-समय पर खेती के बेहतर तरीकों के बारे में हमें प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इस साल बारिश कम हो रही है। सरकार से कोई शिकायत नहीं है। बस ये इच्छा है कि किसानों की बेहतरी के लिए शासन की ओर से और भी योजनाएं शुरू की जाएं। 

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