<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
उत्तर प्रदेश

MP, यूपी और राजस्थान को बड़ी सौगात, चंबल एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा

भिंड/मुरैना 

चंबल एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बीच की कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा. जिसे 'अटल प्रोग्रेस-वे' नाम दिया गया है. यह इंडिया के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है. इस प्रोजेक्ट की लागत 15,000 से 20,000 करोड़ के बीच रखी गई है. इसका निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की तरफ से किया जा रहा है. जिस पर वाहनों की अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है. चंबल एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 409 किलोमीटर है, जो पूरी तरह से चंबल नदी के किनारे से गुजरेगा. फिलहाल यह 4 लेन एक्सप्रेस होगा, लेकिन भविष्य में इसके विस्तार की योजना 6-लेन तक की होगी। 

एमपी और केंद्र सरकार बना रही
चंबल एक्सप्रेसवे का काम तेजी से चल रहा है. इसे'अटल प्रगति पथ' नाम दिया गया है. यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तस्वीर बदलने वाला है. मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अब इस प्रोजेक्ट को फेज-वाइज निर्माण कार्यों और पैकेजों के जरिए अंतिम रूप दिया जा रहा है. यह एक्सप्रेसवे न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश के विकास को भी एक नई रफ्तार देने वाला होगा. जो दिल्ली-मुंबई और आगरा-लखनऊ रूट से सीधा जुड़ेगा. ऐसे में ग्वालियर से आगरा की दूरी और भी नजदीक हो जाएगी। 

मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश और राजस्थान को जोड़ेगा
यह एक्सप्रेसवे तीन राज्यों को आपस में जोड़ेगा. यह उत्तर प्रदेश के इटावा से शुरू होगा, जहां इसे सीधे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से लिंक किया जाएगा. इसी तरह मध्य प्रदेश तीन प्रमुख सीमांत जिलों भिंड, मुरैना और श्योपुर से होकर गुजरेगा. जबकि राजस्थान में यह मध्य प्रदेश की सीमा को पार कर राजस्थान के कोटा तक जाएगा, जहां इसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा. ऐसे में तीन राज्यों को यह सीधा कनेक्ट करेगा। 

दिल्ली-मुंबई और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होगा

    चंबल एक्सप्रेसवे कोटा के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिससे कनेक्टिविटी मजबूत होगी। 
    उत्तर प्रदेश के इटावा छोर पर यह बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होगा। 
    नॉर्थ-साउथ और ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर,  यह इन दोनों महत्वपूर्ण राष्ट्रीय गलियारों को भी आपस में क्रॉस करेगा। 

'अटल प्रगति पथ' और इसका रूट?
अटल प्रगति पथ एक प्रस्तावित 4-लेन है, लेकिन इसका भविष्य में 6-लेन तक विस्तार होगा. यह एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे है, जो मुख्य रूप से चम्बल नदी के समानांतर गुजरेगा. विभिन्न चरणों के तहत इसकी लंबाई लगभग 410 किलोमीटर के बीच प्रस्तावित है, जिसमें मध्य प्रदेश में करीब 300 से ज्यादा किलोमीटर रहेगा. राजस्थान में इसका सफर लगभग 72 किलोमीटर का होगा और उत्तर प्रदेश में लगभग 23 से 28 किलोमीटर का सफर तय करेग। 

चंबल एक्सप्रेस की खास बातें 

    यह देश का ऐसा अनूठा एक्सप्रेसवे होगा जो पूर्व में 'आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे' और पश्चिम में 'दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे' को आपस में कनेक्ट करेगा. इससे दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और कोलकाता के बीच कनेक्टिविटी बेहद आसान हो जाएगी। 

    एक्सप्रेसवे का एक बड़ा हिस्सा चम्बल के बीहड़ों और अनुपजाऊ भूमि से होकर गुजरेगा, जिससे इस बंजर जमीन का व्यावसायिक उपयोग हो सकेगा। 

    सड़क के दोनों तरफ विशेष आर्थिक क्षेत्र, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करने की योजना है।

    इको-फ्रेंडली कॉरिडोर रहेगा. एक्सप्रेसवे के किनारे बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा.
    इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद कोटा से इटावा के बीच की दूरी का सफर महज कुछ घंटों में पूरा किया जा सकेगा. 

मध्य प्रदेश को फायदा 
भिंड, मुरैना और श्योपुर जैसे जिलों को इस एक्सप्रेसवे का सीधा फायदा होगा. यहां नए उद्योग स्थापित होने की संभावना बढ़ेगी. जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे और पलायन रुकेगा. चंबल और हाड़ौती क्षेत्र के किसानों की फसलें, फल और सब्जियां बेहद कम समय में दिल्ली, मुंबई और लखनऊ जैसी बड़ी मंडियों तक पहुंच सकेंगी. यह रूट राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य, गढ़ पैलेस और ग्वालियर-चम्बल संभाग के ऐतिहासिक किलों और पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच को आसान बनाएगा. ऐसे में यह एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के लिए अहम साबित होगा। 

कब तक होगा निर्माण ?
इस एक्सप्रेसवे का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है. अधिकारियों और सरकार के लक्ष्यों के मुताबिक, अगले 3 से 4 सालों के भीतर यानि संभावित तौर पर 2029 से 2030 तक इस एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से बनाकर तैयार किया जा सकता है. 'अटल प्रगति पथ' केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह मध्य भारत के आर्थिक भूगोल को बदलने वाला 'इकोनॉमिक कॉरिडोर' है. इसके पूरा होते ही चंबल क्षेत्र की छवि पूरी तरह से बदल जाएगी। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button