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उत्तर प्रदेश

कम वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती प्रभावित न हो, रियल टाइम निगरानी और सिंचाई संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री

बाढ़ हो या सूखा, हर नागरिक की सुरक्षा-सुविधा सुनिश्चित हो: मुख्यमंत्री

अनियमित वर्षा की दोहरी चुनौती, सूखा और बाढ़ दोनों से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने दिए व्यापक निर्देश

कम वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती प्रभावित न हो, रियल टाइम निगरानी और सिंचाई संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री

तीन दिन में सभी राहत शिविर तैयार हों, बच्चों को डेयरी से दूध और ताजा, पौष्टिक भोजन मिले: मुख्यमंत्री

जहां आवश्यकता हो वहां बड़ी नौकाओं की व्यवस्था करें, आपदा मित्रों की सेवाएं लें, जिलाधिकारी स्वयं करें राहत कार्यों की मॉनीटरिंग: मुख्यमंत्री

तटबंधों की चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग हो, अराजक तत्वों से भी सतर्क रहें, राहत आयुक्त कार्यालय का कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रहे: मुख्यमंत्री

हर घंटे मुख्यमंत्री कार्यालय, डीजीपी कार्यालय और राहत एजेंसियों को मिले अपडेट, राज्य स्तरीय डैशबोर्ड पर प्रत्येक जिले की स्थिति हो अद्यतन: मुख्यमंत्री

बाढ़ प्रभावित 44 जनपदों में व्यापक तैयारियां पूरी, राहत शरणालय, मेडिकल टीमें, पशु शरणालय और बचाव बल पूरी तरह सक्रिय

लखनऊ, 
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बाढ़ हो या सूखा, प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, किसानों की फसल और आमजन की आजीविका की रक्षा करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समयबद्ध सहायता पहुंचाई जाए।

मुख्यमंत्री सोमवार को प्रदेश में अनियमित वर्षा से उत्पन्न दोहरी चुनौती, एक ओर कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सूखे की आशंका और दूसरी ओर अतिवृष्टि वाले क्षेत्रों में संभावित बाढ़, के दृष्टिगत आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रत्येक जनपद की स्थिति अलग है, इसलिए राहत एवं बचाव की रणनीति भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार की जाए। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जनपदों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, वहां कृषि गतिविधियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए। नहरों, जलाशयों, राजकीय नलकूपों तथा अन्य उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बोआई एवं सिंचाई के रियल टाइम आंकड़ों की नियमित समीक्षा कर किसानों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जाए। जहां वर्षा की कमी के कारण बोआई प्रभावित होने की आशंका है, वहां कृषि एवं सिंचाई विभाग संयुक्त कार्ययोजना बनाकर तत्काल राहत उपलब्ध कराएं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही अधिक वर्षा वाले जिलों में बाढ़ राहत एवं बचाव की तैयारियां पूरी सतर्कता के साथ संचालित की जाएं। राहत आयुक्त कार्यालय का कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय रहे तथा प्रत्येक घंटे की अद्यतन जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय, पुलिस महानिदेशक कार्यालय और संबंधित राहत एजेंसियों को उपलब्ध कराई जाए। राज्य स्तरीय डैशबोर्ड पर प्रत्येक जनपद की स्थिति नियमित रूप से अद्यतन की जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील जनपदों में अगले तीन दिनों के भीतर सभी राहत शिविर पूरी तरह तैयार कर लिए जाएं। राहत शिविरों में ताजा एवं पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। बच्चों के लिए डेयरी के माध्यम से दूध उपलब्ध कराया जाए। महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों, दिव्यांगजनों तथा गर्भवती महिलाओं की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। राहत सामग्री किट गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक हो। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां आवश्यकता हो वहां सामान्य नावों के साथ बड़ी नौकाओं की भी व्यवस्था की जाए। प्रशिक्षित 'आपदा मित्रों' की सेवाएं व्यापक रूप से ली जाएं तथा प्रत्येक जिलाधिकारी स्वयं राहत एवं बचाव कार्यों की नियमित मॉनीटरिंग करें। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी, पुलिस, राजस्व, सिंचाई, स्वास्थ्य, पशुपालन एवं स्थानीय प्रशासन पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें। आकाशीय बिजली, अतिवृष्टि, जनहानि आदि के संबंध में मौसम विभाग, केंद्रीय जल आयोग तथा नेपाल से प्राप्त जलस्तर संबंधी सूचनाओं का सतत विश्लेषण करते हुए समय रहते आवश्यक निर्णय लिए जाएं तथा संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित आबादी को पूर्व सूचना देकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।

मुख्यमंत्री ने तटबंधों की सुरक्षा पर विशेष बल देते हुए निर्देश दिए कि उनकी चौबीसों घंटे निगरानी एवं नियमित पेट्रोलिंग कराई जाए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कारणों के साथ अराजक तत्वों द्वारा भी तटबंधों को नुकसान पहुंचाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए संवेदनशील स्थलों पर विशेष सतर्कता बरती जाए। जहां कटान अथवा रिसाव की आशंका हो, वहां तत्काल सुरक्षात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। राहत सामग्री, नाव, मोटरबोट तथा अन्य आवश्यक संसाधनों से संबंधित सभी टेंडर एवं प्रशासनिक औपचारिकताएं तत्काल पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत कार्य प्रभावित न हों।

मुख्यमंत्री ने पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि पशुओं को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए तथा उन्हें जलभराव वाले क्षेत्रों में न रहने दिया जाए। मौसम के अनुरूप संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए पशुओं का समयबद्ध टीकाकरण भी सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश के चार जनपदों की चार तहसीलों के 42 गांव प्रभावित हैं, जहां 332 लोग प्रभावित हुए हैं। वर्तमान में बलिया, गौतमबुद्ध नगर, लखीमपुर खीरी तथा मुजफ्फरनगर प्रभावित जनपद हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 1,412 बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं। 549 मेडिकल टीमों का गठन किया गया है, 55 नाव एवं मोटरबोट राहत कार्यों में लगाई गई हैं तथा 1,096 बाढ़ शरणालय संचालित हैं। प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

बैठक में यह भी बताया गया कि बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील 44 जनपदों में व्यापक पूर्व तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 1,694 राहत शरणालय चिन्हित किए गए हैं, जिनमें लगभग 5.14 लाख लोगों को आश्रय देने की क्षमता है। सभी जनपदों में कंट्रोल रूम सक्रिय हैं तथा एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्व से तैनात कर दी गई हैं। पशुधन की सुरक्षा के लिए 910 पशु शरणालय स्थापित किए गए हैं तथा आवश्यक टीमें भी तैनात हैं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बाढ़ प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए नदियों का चैनेलाइजेशन कार्य निरंतर जारी रखा जाए, जिससे जल प्रवाह सुचारु रहे और कटान व जलभराव की स्थिति न्यूनतम हो। उन्होंने यह भी कहा कि अग्नि दुर्घटना में यदि किसी गरीब परिवार का आवास नष्ट होता है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत तत्काल आवास उपलब्ध कराया जाए। नगर क्षेत्रों में खुले मैनहोल को तत्काल ढकने तथा जनसुरक्षा से जुड़े सभी एहतियाती उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

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