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विदेश

खामेनेई की मौत के बाद ईरान में बढ़ा अंदरूनी संकट, सरकार पर दबाव

नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका लगातार होर्मुज के आसपास के इलाकों पर हमले कर रहा है। वहीं ईरान भी पड़ोसी खाड़ी देशों में अमेरिकी बेसों को निशाना बना रहा है। ईरान के अंदर भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बाहरी चुनौती के बीच ईरान की इस्लामिक सरकार को कट्टरपंथियों की धमकी मिल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कट्टरपंथी ईरान में तख्तापलट करने की धमकी दे रहे हैं। मारे गए सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई की अंतिम विदाई में जो भीड़ दिखी थी, उसे देखकर डोनाल्ड ट्रंप भी हैरान रह गए थे। हालांकि सब लोग केवल मातम ही नहीं मना रहे थे बल्कि उस भीड़ में बड़ी संख्या में सत्ता विरोधी भी शामिल थे जो कि राष्ट्रपति और विदेश मंत्री के खिलाफ नारे लगा रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्री अराघची जब खामेनेई के ताबूत के पास खड़े थे तभी उनपर पत्थर चले और उन्हें वहां से जाना पड़ा।

अमेरिका के सामने घुटने टेकने का आरोप
अब देश के कट्टरपंथियों ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के खिलाफ विरोध तेज कर दिया है। कट्टरपंथियों का कहना है कि सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरान को समझौते का रास्ता नहीं बल्कि खून के बदले खून का रास्ता चुनना चाहिए थे। उनका आरोप है कि इस्लामिक सरकार ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए।

खामेनेई के जनाजे में विरोध प्रदर्शन
खामेनेई के जनाजे के दौरान जब राष्ट्र्पति मसूद पेजेश्कियन ताबूत के पास चल रहे थे, तब भी लोगों ने उनपर अपना गुस्सा निकाला और समझौतावादी होने के नारे लगाए। विदेश मंत्री अब्बास अराघची को बिकाई और गद्दार कहा गया। साथ ही जब लोग पत्थरबाजी करने लगे तो उन्हें वहां से जाना पड़ा। कट्टरपंथी गुट का मानना है कि ईरान का नेतृत्व खामनेई की मौत का बदला नहीं लेना चाहता बल्कि समझौते के जरिए सरेंडर कर रहा है

सुप्रीम लीडर का 'गायब' होना, असंतोष की वजह
अमेरिका से तनाव और देश के अंदर चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच भी नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई सामने नहीं आ रहे हैं। उनकी जनता की नजरों से दूरी भी असंतोष की बड़ी वजह है। लोगों का कहना है कि क्या मोजतबा शासन नहीं कर सकते या फिर उनके आसपास के लोगों ने सत्ता का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है।

तख्तापलट की साजिश
अमेरिका के एक जानका ने कहा कि मोजतबा की गैरमौजूदगी में कई नेताओं का कद बढ़ गया है। कट्टरपंथियों का कहना है कि अब गलिबाफ और उनके सहयोगियों के हाथ मेंही ईरान की बागडोर आ गई है। ऐसे में कट्टरपंथियों का कहना है कि गालिबफ और पेजेश्कियन ने मुजतबा के खिलाफ तख्तापलट की साजिश रची है। ईरान के कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन ने भी सोशल मीडिया पर तख्ता पलट को लेकर आशंका जताई थी। कट्टरपंथियों का कहना है कि संसद को नजरअंदाज करके गलिबाफ और उनके साथी क्रांतिकारी संस्थानों को भी कमजोर कर रहे हैं। ईरान के सुरक्षा तंत्र से जुड़े अली बख्शी ने पेजेश्कियन को धमकी देते हुए यहां तक कहा था कि अगर अमेरिका से बदला नहीं लिया जाता है तो उनकी तलवार होगी और राष्ट्रपति का गला।

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