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मध्यप्रदेश

महाकाल मंदिर में दान प्रक्रिया हुई पारदर्शी, कैरेट मीटर से मौके पर जांचा जाएगा सोना-चांदी

 उज्जैन
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में दान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब मंदिर में दान स्वरूप प्राप्त होने वाले सोने और चांदी के आभूषणों की शुद्धता कैरेटमीटर मशीन से जांची जाएगी। खास बात यह है कि दानदाता की मौजूदगी में ही धातु की शुद्धता की जांच होगी, जिससे दान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी।

मंदिर समिति के अनुसार कैरेटमीटर मशीन एक-दो दिन में मंदिर में स्थापित कर दी जाएगी। इसके बाद दान काउंटर पर प्राप्त होने वाले सोने-चांदी के आभूषणों की तत्काल जांच कर उनकी शुद्धता का निर्धारण किया जाएगा। अभी तक मंदिर में दान के रूप में प्राप्त आभूषणों के बारे में प्रथम दृष्टया "सोने जैसा" या "चांदी जैसा" लिखकर दर्ज किया जाता था।

शुद्धता की तत्काल वैज्ञानिक जांच की व्यवस्था नहीं होने से वास्तविक गुणवत्ता का पता बाद में चलता था। नई मशीन लगने के बाद यह प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रमाणिक हो जाएगी। मंदिर समिति ने यह निर्णय देश के कई प्रमुख मंदिरों में दान के नाम पर नकली या कम शुद्धता वाले सोने-चांदी के आभूषण मिलने के मामलों को देखते हुए लिया है। समिति का मानना है कि कैरेटमीटर मशीन से जांच होने पर दानदाता का विश्वास और मजबूत होगा तथा मंदिर में दान प्राप्ति की प्रक्रिया भी पारदर्शी तथा प्रामाणिक बनी रहेगी।

वर्तमान में यह व्यवस्था
महाकाल मंदिर में वर्तमान में दान में प्राप्त सोने-चांदी की वस्तुओं को सोने जैसी, चांदी जैसी लिखकर कोठार में जमा कर लिया जाता है। बाद में स्वर्णकार से इसका परीक्षण कराया जाता है। कई बार कीमती धातु खोटी तथा कम शुद्धता की निकल जाती है। काफी दिन बीत जाने से समिति दानदाता को इससे अवगत भी नहीं करा पाती है। प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होने के कारण अविश्वास भी पनपता है।

वातानुकूलित कक्ष में होगा स्थापना
कंपनी ने कैरेटमीटर मशीन मंदिर कार्यालय के सुपुर्द कर दी है। एक दो दिन में कोठार शाखा में इसका स्थापन कराया जाएगा। इस मशीन को चौबीस घंटे वतानुकूलित कक्ष में रखना अनिवार्य है, इसलिए कोठार में छोटा कमरा तैयार कराया जा रहा है।

एक्स-रे की तरह काम करती है मशीन
कैरेटमीटर मशीन एक्स-रे बीम का उपयोग करती है। यह बीम जब धातु पर पड़ते हैं, तो धातु के परमाणु उत्तेजित हो जाते हैं और ऊर्जा छोड़ते हैं। जिससे मशीन कुछ ही सेकंड में सोने, चांदी की वास्तविक शुद्धता बता देते हैं। धातु परीक्षण अधिकतम तीस सेकंड में हो जाता है। टेस्टिंग के दौरान आभूषण को किसी प्रकार का कोई नुकसान भी नहीं होता है।

पारदर्शिता के लिए उठाया कदम
    महाकाल मंदिर में दान में प्राप्त सोने-चांदी की वस्तुओं की शुद्धता जांच के साथ दान की प्रक्रिया को पारदर्शी तथा विश्वसनीय बनाए रखने के लिए कैरेटमीटर मशीन के उपयोग का निर्णय लिया गया है। कंपनी से मशीन मंदिर को प्राप्त हो चुकी है। एक दो दिन में इसे स्थापित कर दिया जाएगा। -सिम्मी यादव, डिप्टी कलेक्टर व उप प्रशासक महाकाल मंदिर समिति, उज्जैन

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