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मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश के 33 जिलों में बारिश की कमी, खेती पर मंडराया संकट; मौसम विभाग ने दिया नया अपडेट

भोपाल

 मध्यप्रदेश में मानसून की लंबी खामोशी ने चिंता बढ़ा दी है। इस समय मानसून की बेरुखी से कई जिलों में सूखे जैसे हालात निर्मित होने लगे हैं। पिछले एक सप्ताह से भी अधिक समय से बारिश का दौर पूरी तरह थमा हुआ है, जिससे अब फसलों पर भी संकट मंडराने लगा है। इसका कारण यह है कि मानसून ट्रफ अभी ऊपरी हिस्से में है, इसके कारण नमी नहीं है। अभी बंगाल की खाड़ी एक लो प्रेशर एरिया बना हुआ है, लेकिन मानसून ट्रफ ऊपर होने के कारण यह भी बहुत ज्यादा प्रभावी नही दिखाई दे रहा है।

तेज बारिश की उम्मीद कम
बारिश का दौर थमने के बाद प्रदेश में कई स्थानों पर सूखे की तरह हालात बनने लगे हैं। अलीराजपुर में इस सीजन में मात्र 59.4 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य बारिश से 76 प्रतिशत कम है। प्रदेश के 33 जिलों में बारिश सामान्य से कम है। बारिश का दौर थमने के बाद प्रदेश में भी बारिश की स्थिति सामान्य से कम हो गई है। अगले तीन चार दिन बहुत ज्यादा तेज बारिश की उम्मीद भी कम है। दूसरी ओर बारिश का दौर थमने के बाद किसान भी चिंतित हैं और फसलों के सूखने का खतरा मंडराने लगा है।

लो प्रेशर एरिया से थोड़ी उम्मीद
मौसम वैज्ञानिक एचएस पांडे ने बताया कि इस समय मानसून ट्रफ ऊपरी हिस्से में है, इसलिए बारिश का दौर थम गया, नमी भी नहीं है। अभी एक लो प्रेशर एरिया बंगाल की खाड़ी में एक्टिव हो रहा है, इसके कारण गुरुवार से प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश के दौर की संभावना है। अगले तीन चार दिन पूर्वी हिस्से में थोड़ी बारिश दिखाई दे सकती है, जबकि पश्चिमी हिस्से में अभी भी इंतजार करना पड़ सकता है।

नमी कम होने से रुक सकता है फसलों का विकास

कृषि विशेषज्ञ एचडी वर्मा का कहना है कि प्रदेश में अधिकांश स्थानों पर बुआई हो चुकी है और फसल भी उग आई हैं। मानसून ब्रेक के कारण खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है, जो फसलों के शुरुआती विकास के लिए चिंताजनक है। अगर अगले कुछ दिनों तक बारिश नहीं होती है, तो सोयाबीन, धान और मक्के जैसी फसलों की वृद्धि रुक सकती है। अभी कुछ दिन तो ठीक है, लेकिन आगे भी एक सप्ताह तक इस तरह की स्थिति रहती है, तो जहां तक संभव हो फव्वारा पद्धति या ट्यूबवेल से हल्की सिंचाई अवश्यक करें।

इस समय खेतों में भारी कीटनाशक या खाद का छिड़काव नहीं करें, पर्याप्त नमी के अभाव में यह फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। नमी बनाए रखने के लिए हल्की निराई-गुड़ाई करें। कीटों पर भी नजर रखे।

इन जिलों में हुई सबसे कम बारिश

अलीराजपुर- 59.4 %
रीवा- 111.7 %
मैहर- 118 %
नरसिंहपुर- 178 %
सीधी- 186.8 %

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