<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
देश

जयपुर दीक्षांत समारोह में होम्योपैथी और भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर

जयपुर
 राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा है कि भारत आरम्भ से ही चिकित्सा से जुड़ी महान ज्ञान परंपरा से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां नैतिकता, ईमानदारी खून में रही है। उन्होंने होम्योपैथी को कारगर चिकित्सा पद्धति बताते हुए इसमें अनुसंधान के आदर्श अपनाते हुए आगे बढ़ने का आह्वान किया।

राज्यपाल बागडे गुरुवार को बिड़ला सभागार में "होम्योपैथी विश्वविद्यालय, जयपुर" के दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लार्ड मैकाले ने भारत की ज्ञान परंपरा से दूर करने के लिए अंग्रेजी शिक्षा पद्धति का देश में प्रसार करवाया।

राज्यपाल ने इस मौके पर पुणे के चिकित्सक डॉ. नामदोशी की चर्चा करते हुए कहा कि वह एलोपैथी के चिकित्सक थे परंतु एक बार बीमार पड़े तो होम्योपैथी का इलाज लिया और स्वस्थ हो गए। इसके बाद उन्होंने इस चिकित्सा पद्धति को अपना लिया। उन्होंने कहा कि रोग निदान में जो चिकित्सा कारगर रहे, उसे अपनाने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद पांच हजार सालों से भी पुराना है। विश्वभर में उसका आज प्रचार प्रसार है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी दवाएं भी आयुर्वेद के कच्चे माल के अंतर्गत वनस्पति, फुल, पत्तों, उनकी जड़ों, खनिज पदार्थों के रस, अर्क से और जहर से तैयार होती है। उन्होंने कहा कि इस पद्धति से जुड़े युवा चिकित्सक स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी में अपना योगदान दें। उन्होंने तुर्की शासक बख्तियार खिलजी द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को जलाने की चर्चा करते हुए कहा कि आयुर्वेद के महान ज्ञान की विरासत को नष्ट करने के लिए उसने पुस्तकालय को आग लगवा दी। जली पुस्तकों की आग तीन महीने तक सुलगती रही

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव ने कहा कि सभी चिकित्सा पद्धतियां मानव को रोगमुक्त ही नहीं करती बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का मार्ग बताती है। उन्होंने देश की आयुष पद्धतियां की चर्चा करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर आज भारत पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां में अग्रणी है। उन्होंने होम्योपैथी को विश्व की सर्वाधिक स्वीकार्य पद्धति बताते हुए कहा कि यह व्यक्ति की समग्र चिकित्सा आधारित है। उन्होंने युवा पीढ़ी को अनुसंधान को आदर्श मानते हुए विकसित भारत के मजबूत आधार स्वस्थ भारत के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

पूर्व सांसद और विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. मनोज राजोरिया एवं राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने डॉ. गिरेंद्रपाल को स्मरण करते हुए कहा कि होम्योपैथी का विश्व का पहला विश्वविद्यालय उनकी प्रेरणा से राजस्थान में स्थापित हुआ।

राज्यपाल और केंद्रीय आयुष मंत्री ने इस अवसर पर दीक्षांत उपाधियाँ प्रदान करने के साथ ही चिकित्सा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button