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देश

रेखा सरकार का बड़ा फैसला, तय समय में सरकारी सेवाएं नहीं तो कार्रवाई

नई दिल्ली
 दिल्ली सरकार ने सरकारी सेवाओं की तय समय में डिलिवरी सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली राइट टु सर्विस विधेयक को मंजूरी दी गई है। विधेयक लागू होने के बाद लोगों को तय समय-सीमा में सरकारी सेवाएं प्राप्त करने का कानूनी अधिकार मिलेगा। बिना उचित कारण देरी करने वाले संबंधित अधिकारी पर अधिकतम 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

रेखा गुप्ता ने कहा कि यह कानून प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने और लोगों को पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित सेवाएं समय पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाया गया है। नया कानून साल 2011 के मौजूदा अधिनियम की जगह लेगा और पूरी सर्विस डिलिवरी प्रणाली को अधिक डिजिटल एवं प्रभावी बनाएगा। इसके क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र आयोग का भी गठन किया जाएगा।

दिल्ली की कैबिनेट ने 'दिल्ली राइट टु सर्विस विधेयक' को दी मंजूरी

  • दिल्ली में अलग-अलग विभागों (डीडीए, रेवेन्यू, एमसीडी आदि) की करीब 500 ऐसी सेवाएं हैं, जिनके लिए आवेदन के बाद काम पूरा की समय सीमा तय है।
  • मगर अभी तक अगर किसी आवेदन का निपटारा तय समय में पूरा नहीं होता था तो उसमें अधिकारी की कोई जवाबदेही नहीं थी।
  • आवेदक के पास सिर्फ अपील करने का अधिकार मिला था।
  • अब नए राइट टु टाइम बाउंड सर्विस विधेयक में तय समय पर सेवा नहीं मिलने के बाद यह मामला ऑटोमैटिक विभाग में गठित होने वाले नागरिक शिकायत निवारण प्राधिकारी के पास चला जाएगा।
  • सरकार ने कहा कि मान लो किसी सरकारी सेवा के आवेदन के बाद उसकी डिलिवरी करने का समय 21 है। वह तब तक पूरा नहीं होता है तो 22वें दिन से जिम्मेदार अधिकारी के ऊपर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम 5 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा।

30 दिनों में करना होगा शिकायतों का निपटारा
विधेयक में शिकायतों के त्वरित निपटारे का भी प्रावधान है। नागरिक शिकायत निवारण प्राधिकारी के स्तर पर समय पर फैसला नहीं होने पर मामला स्वतः प्रस्तावित दिल्ली राइट टु सर्विस आयोग के पास पहुंचेगा। सभी अपीलों का निपटारा 30 दिनों में करना होगा।

जल्द सर्विस आयोग का भी होगा गठन
विधेयक के तहत एक स्वतंत्र दिल्ली राइट टु सर्विस आयोग का भी गठन किया जाएगा। आयोग जो दूसरी अपील की सुनवाई करेगा, क्रियान्वयन की निगरानी करेगा, ऑफिसों का निरीक्षण कर सकेगा और लापरवाही बरतने वालों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करेगा।

आप पर असर

  • सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन करने के बाद अब उसकी सेवा पाने के लिए बार-बार आप को ऑफिसों के चक्कर नहीं लगाने होंगे।
  • बिना किसी वजह के आवेदनों को लंबित भी नहीं रखा जा सकेगा। जल्दी काम कराने के लिए सिफारिशें भी नहीं लगानी होगी।
  • दिल्ली सरकार द्वारा राइट टु टाइम बाउंड सर्विसेज विधेयक की मंजूरी के बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वह उस सेवा के आवेदन का तय समय के अंदर निपटारा करें।
  • आवेदक को ऊपर शिकायत करने के लिए खुद नहीं जाना पड़ेगा। पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र आयोग का गठन भी किया जाएगा।

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