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मध्यप्रदेश

दतिया उपचुनाव: बेहद दिलचस्प रहा है चुनावी इतिहास, कई बार 5 हजार से कम वोटों ने बदल दिया नतीजा

दतिया

 मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने तीन बार के विधायक घनश्याम सिंह को भाजपा के आशुतोष तिवारी के सामने मैदान में उतार दिया है। दोनों दलों के लिए हमेशा से यह कड़े संघर्ष की सीट रही है। बसपा और समाजवादी पार्टी ने भी यहां से जीत हासिल की है। इस बार उपचुनाव में यह सीट प्रदेश के पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को भाजपा से टिकट न मिलने के कारण उनके समर्थकों द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शन से चर्चा में है। हालांकि नरोत्तम मिश्रा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समझाने पर शांत हो गए हैं।

चार बार भिड़ चुके हैं नरोत्तम-राजेंद्र भारती
वर्ष 2008 में भाजपा के नरोत्तम मिश्रा इस सीट से बसपा प्रत्याशी राजेंद्र भारती से 11 हजार 233 मतों से जीते। 2013 के विधानसभा चुनाव में मिश्रा ने बसपा से कांग्रेस में आए राजेंद्र भारती को 12,081 मतों से पराजित किया। 2018 के चुनाव में नरोत्तम मिश्रा फिर कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती से जीते, पर जीत का अंतर 2656 मतों पर सिमट गया। 2023 के चुनाव में लगातार चौथी बार भी नरोत्तम मिश्रा का मुकाबला राजेंद्र भारती से हुआ, पर इस बार भारती भारी पड़े। उन्होंने मिश्रा को 7,742 वोटों से हरा दिया।

आपराधिक प्रकरण में भारती को सजा होने के बाद दतिया सीट रिक्त होने पर अब उपचुनाव कराया जा रहा है। पांचवीं बार भी कांग्रेस ने भारती की पत्नी शोभा को मैदान में उतारने पर विचार किया था, पर अंतत: प्रदेश से लेकर केंद्रीय नेतृत्व ने घनश्याम सिंह के नाम पर सहमति दी।

हर चुनाव में बदले समीकरण, कभी नहीं रहा एकतरफा मुकाबला
इसके पहले के चुनाव परिणाम भी देखें तो मुकाबला कभी एकतरफा नहीं रहा। 1993 में कांग्रेस के घनश्याम सिंह (इस उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी) भाजपा के शंभू तिवारी से 10 हजार 866 मतों से जीते तो 1998 में सपा से मैदान में उतरे राजेंद्र भारती बसपा के स्वामी शरण दांगी से 6,736 मतों से जीते थे। भाजपा तीसरे और कांग्रेस चौथे स्थान पर रही। 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के घनश्याम सिंह, भाजपा के अवधेश नायक से 2904 मतों से ही जीत पाए थे।

 

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