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मध्यप्रदेश

Heat Action Plan: भोपाल में बढ़ती गर्मी से राहत के लिए 5 करोड़ की योजना, हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर फोकस

भोपाल.

तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण और शहरीकरण के कारण भोपाल के कई हिस्से 'अर्बन हीट आइलैंड' में बदल चुके हैं। इन इलाकों का तापमान आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है।

बढ़ती गर्मी से शहर को राहत दिलाने के लिए भोपाल नगर निगम ने एक महत्वाकांक्षी 'हीट एक्शन प्लान' तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा है। केंद्र से अंतिम मंजूरी मिलते ही इस परियोजना के लिए 5 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान जारी किया जाएगा। इसके बाद अगले 15 महीनों में योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

'हीट रेजिलिएंट सिटीज' पहल का हिस्सा
यह परियोजना केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की 'हीट रेजिलिएंट सिटीज' पहल का हिस्सा है। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए देश के 12 शहरों का चयन किया गया है। इनमें भोपाल, गुरुग्राम, देहरादून, नाशिक, दिल्ली, लुधियाना, पुणे, हैदराबाद, अहमदाबाद, लखनऊ, पटना और जयपुर शामिल हैं। इस योजना का उद्देश्य शहरों में बढ़ते तापमान के प्रभाव को कम करना, हरित क्षेत्र बढ़ाना, गर्मी से बचाव के उपायों को मजबूत करना और नागरिकों के लिए अधिक अनुकूल शहरी वातावरण विकसित करना है।

सैटेलाइट से होगी मैपिंग
इस कार्ययोजना के अंतर्गत सबसे आधुनिक तकनीक और सैटेलाइट डेटा का उपयोग करके भोपाल के सबसे गर्म हिस्सों (हॉट-स्पॉट्स) की पहचान की जाएगी। इसके तहत शहर के प्रमुख व्यावसायिक और घने कंक्रीट वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।

मुख्य रूप से शामिल हैं:
जवाहर चौक, कोलार, एमपी नगर, न्यू मार्केट, हमीदिया रोड, करोंद, बैरागढ़ और अयोध्या बायपास।

इन 4 मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित होगा काम
शहर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए मुख्यतः चार मोर्चों पर काम किया जाएगा:
कूल रूफ तकनीक: इमारतों की छतों पर सूर्य की तपिश और तापमान को कम करने वाली विशेष 'कूल रूफ' तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा।
सैटेलाइट आधारित हीट मैप: इसके जरिए शहर के विभिन्न वार्डों और क्षेत्रों के तापमान के मिजाज की सटीक व रीयल-टाइम निगरानी की जाएगी।
ग्रीन कवर बढ़ाना: कंक्रीट के जंगलों के बीच सार्वजनिक स्थानों पर सघन और छायादार हरित क्षेत्र (ग्रीन जोन) विकसित किए जाएंगे।
जल स्रोतों का पुनर्जीवन: स्थानीय तालाबों, बावड़ियों और कुओं का संरक्षण व जीर्णोद्धार कर शहर की प्राकृतिक ठंडक को वापस लौटाया जाएगा।

बढ़ते तापमान से जुलाई की बारिश घटी, बदला वेदर ट्रेंड
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु और मौसम में आ रहे बदलावों के कारण पिछले 10 वर्षों में भोपाल में जुलाई की सामान्य बारिश 400.1 मिमी से घटकर अब 363.8 मिमी रह गई है। हालांकि, कुल कोटे का पानी कम नहीं हुआ है, बल्कि बारिश का ट्रेंड बदल गया है। अब कुछ ही घंटों में बेहद तेज बारिश हो जाती है और फिर लंबे समय तक सूखा रहता है, जिससे मिट्टी जल्दी सूख जाती है। वहीं, शहर का न्यूनतम तापमान भी औसतन 1°C तक बढ़ गया है। वहीं, मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस 'हीट एक्शन प्लान' की सफलता के साथ-साथ शहर के अनियंत्रित विस्तार पर नियंत्रण लगाना, बड़े और प्राचीन वृक्षों का संरक्षण करना तथा डेंस ग्रीन जोन (सघन वन क्षेत्रों) के निर्माण पर समानांतर रूप से काम करना बेहद जरूरी है।

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