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राजनीति

BJP में टिकट बदलने की परंपरा नहीं, दतिया विवाद पर कैलाश विजयवर्गीय ने दिया साफ संदेश

इंदौर 

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा द्वारा आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद सामने आई नाराजगी पर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा में लोकतांत्रिक व्यवस्था है और कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने विश्वास जताया कि संगठन कार्यकर्ताओं से चर्चा कर सभी मतभेद दूर करेगा और आशुतोष तिवारी भारी मतों से चुनाव जीतेंगे।

विजयवर्गीय ने कहा कि पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराजगी भाजपा के लिए कोई असामान्य स्थिति नहीं है। पार्टी सभी कार्यकर्ताओं से संवाद करेगी और संगठन के निर्णय का सम्मान कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा हर फैसला पूरी प्रक्रिया और विचार-विमर्श के बाद लेती है तथा पार्टी का निर्णय सभी के लिए सर्वोपरि होता है।

'नरोत्तम मिश्रा पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता'
कैलाश विजयवर्गीय ने नरोत्तम मिश्रा की सराहना करते हुए कहा कि वे भाजपा के वरिष्ठ और समर्पित नेता हैं तथा पार्टी के निर्णय का सम्मान करेंगे। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं भी नरोत्तम मिश्रा से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर हजारों कार्यकर्ता चुनाव लड़ने की तैयारी करते हैं, लेकिन उम्मीदवार का चयन संगठन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है। टिकट घोषित होने के बाद उसे बदलने की परंपरा भाजपा में नहीं रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें नहीं लगता कि दतिया का टिकट बदला जाएगा। उनके अनुसार आशुतोष तिवारी पूर्व संगठन मंत्री रह चुके हैं और पार्टी के मजबूत कार्यकर्ता हैं।

कौन हैं नरोत्तम मिश्रा जिनके लिए हुआ बवाल
डबरा क्षेत्र से दतिया तक 33 साल का सियासी सफर रहा है नरोत्तम मिश्रा का। क्षेत्र में उन्हें दादा कहकर संबोधित किया जाता है। 15 अप्रैल 1960 में ग्वालियर में जन्मे नरोत्तम मिश्र के राजनीतिक करियर की शुरुआत भाजपा युवा मोर्चा से हुई थी। 1998 में नरोत्तम मिश्रा जीवाजी यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर ग्वालियर स्टूडेंट यूनियन के सेक्रेटरी बन गए थे। डबरा से पहला चुनाव लड़ा और 1990 में पहली बार विधायक बने। वहीं 1998 और 2003 में इसी सीट से जीत दर्ज की। परिसीमन के बाद डबरा सुरक्षित सीट घोषित हो गई थी। इसलिए नरोत्तम ने दतिया का रुख किया। नरोत्तम 2008 में दतिया से चुने गए और यह सिलसिला 2018 तक जारी रहा। इसके बाद बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री रहे।

2023 में हार गए थे चुनाव
2023 में नरोत्तम मिश्रा कांग्रेस के राजेंद्र भारती से महज 7 हजार वोटों के अंतर से हार गए थे। राजेंद्र भारती और नरोत्तम मिश्रा की पुरानी प्रतिद्वंदिता के चलते यह सीट प्रतिष्ठा की सीट बन गई थी। हाल ही में कांग्रेस विधायक रहते हुए राजेंद्र भारती को बैंक के एक मामले में सजा हो गई। इसके बाद उनकी विधायकी खत्म हो गई थी। उसी के कारण दतिया में उपचुनाव हो रहे हैं। नरोत्तम मिश्रा ने कुछ दिन पहले ही नामांकन फार्म खरीद लिया था और नरोत्तम के साथ ही सभी यह मानकर चल रहे थे कि वे ही यहां से उम्मीदवार बनाए जा रहे हैं, लेकिन पार्टी का फैसला कुछ अलग ही रहा। वहां से पूर्व हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। जिसके बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने शुक्रवार शाम से ही हंगामा शुरू कर दिया था।

जीतू पटवारी के भाई के ड्रग्स मामले पर कांग्रेस पर निशाना
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई द्वारा पूर्व में ड्रग्स लेने की बात स्वीकार किए जाने के मुद्दे पर भी कैलाश विजयवर्गीय ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष जैसे पद पर बैठे व्यक्ति को दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले अपने घर की स्थिति भी देखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी के भाई ने स्वयं स्वीकार किया है कि वह पहले ड्रग्स का सेवन करते थे और अब शराब भी नहीं पीते। विजयवर्गीय ने कहा कि यह उनका निजी मामला है, लेकिन जब स्वयं स्वीकारोक्ति हो चुकी है तो इस पर अधिक कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है।

साइकिल यात्रा पर भी साधा निशाना
जीतू पटवारी की प्रस्तावित साइकिल यात्रा पर टिप्पणी करते हुए विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि इससे पहले राहुल गांधी ने भी लंबी यात्राएं निकाली थीं, लेकिन उससे देश की राजनीति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस के शीर्ष नेता की यात्रा से कोई विशेष बदलाव नहीं आया, तो जीतू पटवारी की साइकिल यात्रा से भी कोई खास फर्क पड़ने वाला नहीं है।

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