<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
देश

हाईकोर्ट में नीरजा मोदी स्कूल मामला, शिक्षकों की योग्यता पर उठे सवाल

जयपुर
राजस्थान की राजधानी जयपुर के सबसे महंगे और नामी स्कूलों में शुमार 'नीरजा मोदी स्कूल' की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. एक छात्रा (अमायरा) की संदिग्ध और दुखद मौत के बाद अब यह संस्थान एक और बड़े कानूनी और प्रशासनिक भंवर में फंस गया है. राजस्थान हाईकोर्ट में चल रहे इस मामले में जो नए और चौंकाने वाले दस्तावेज सामने आए हैं, उन्होंने स्कूल में बच्चों की पढ़ाई और उनकी सुरक्षा पर बहुत बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

CBSE की एक गोपनीय इंस्पेक्शन रिपोर्ट और कोर्ट के सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, स्कूल में पढ़ाने वाले 75% से 83% शिक्षक निर्धारित मानकों और योग्यताओं को पूरा ही नहीं करते हैं. इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सीबीएसई को कड़ी फटकार लगाते हुए स्कूल को कारण बताओ नोटिस और इंस्पेक्शन रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है, जिस पर अगली बड़ी सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होनी है.

प्राइमरी सेक्शन के सारे टीचर्स अयोग्य?
कोर्ट के सामने जो डेटा पेश किया गया है, वह किसी भी पैरेंट को डराने के लिए काफी है:
83% नए टीचर्स फेल: शैक्षणिक सत्र 2024 से 2026 के बीच स्कूल में नियुक्त किए गए 102 नए शिक्षकों में से केवल 17 शिक्षक ही नियमों के मुताबिक क्वालिफाइड पाए गए. बाकी के 85 शिक्षक (लगभग 83%) नियमों पर खरे नहीं उतरे.

प्राइमरी सेक्शन का बुरा हाल: सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात प्राइमरी स्कूल (PRT) को लेकर है. यहां तैनात सभी 52 के 52 टीचर्स अनक्वालिफाइड पाए गए हैं.

पुराने स्टाफ पर भी सवाल: स्कूल में पहले से पढ़ा रहे 151 शिक्षकों में से 115 (लगभग 76%) की डिग्री और योग्यताओं को लेकर गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं. जांच के दौरान स्कूल प्रशासन कई शिक्षकों के अपॉइंटमेंट लेटर और क्रेडेंशियल्स दिखाने में भी नाकाम रहा.

1200 बच्चों ने छोड़ा स्कूल!
संयुक्त अभिभावक संघ के राजस्थान प्रदेश प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी अभिषेक जैन बिट्टू ने इस मामले पर बेहद तीखा रुख अपनाया है. उन्होंने दावा किया कि अमायरा कांड के बाद स्कूल के कामकाज, बच्चों की सुरक्षा और इस नए टीचर-स्कैम ने पैरेंट्स के भरोसे को पूरी तरह तोड़ दिया है.

अभिषेक जैन के मुताबिक स्कूल मैनेजमेंट पहले अपने यहां 5,500 छात्रों के होने का दावा करता था, लेकिन इस विवाद के बाद अब स्कूल में सिर्फ 4,300 छात्र बचे हैं. यानी पिछले एक साल के भीतर 1,200 से ज्यादा बच्चों ने इस नामी स्कूल को छोड़ दिया है. उन्होंने कहा कि मोटी फीस वसूलने के बाद भी अगर स्कूल सुरक्षित माहौल और योग्य शिक्षक नहीं दे सकता, तो पैरेंट्स का वहां से बच्चों को निकालना स्वाभाविक है.

यह सिर्फ अमायरा की नहीं, हर बच्चे की लड़ाई है: पीड़ित पिता
दिवंगत छात्रा अमायरा के पिता विजय मीणा ने इस पूरे खुलासे पर बेहद भावुक और कड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अपनी बेटी को खोने के बाद इस तरह के सच का सामने आना बेहद दर्दनाक है. अगर स्कूल ने टीचरों की नियुक्ति, उनकी योग्यता और बच्चों की सुरक्षा के अनिवार्य नियमों का उल्लंघन किया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को जेल भेजा जाना चाहिए. उन्होंने साफ किया कि उनका परिवार अब सिर्फ अमायरा के लिए नहीं, बल्कि हर उस बच्चे के अधिकारों और सुरक्षा के लिए लड़ रहा है जो ऐसे स्कूलों में पढ़ने जाता है.

13 जुलाई को हाईकोर्ट में आर-पार की जंग!
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने 25 मई के आदेश में CBSE को निर्देशित किया था कि वह स्कूल को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपे और स्कूल को अपना पक्ष रखने के लिए 21 दिनों का समय दिया गया था. अब 13 जुलाई 2026 (सोमवार) को होने वाली सुनवाई पर पूरे राजस्थान की नजरें टिकी हैं, क्योंकि अगर स्कूल इन आरोपों का पुख्ता जवाब नहीं दे पाता है, तो सीबीएसई द्वारा स्कूल की मान्यता रद्द करने या भारी कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button