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फ़िल्म जगत

‘जूही मुई’ रिव्यू: अलग कहानी लेकिन ऑटिज्म की प्रस्तुति पर उठे सवाल

टेलीविजन पर नए सदस्य का आगमान हो चुका है. सदस्य का नाम जूही है, जो ऑटिस्टिक की बीमारी से जूझ रही है. कलर्स टेलीविजन पर शुरू हुए शो 'जूही मुई' की कहानी, जूही सूरी के इर्द-गिर्द घूमती है. जूही का रोल टेलीविजन की पॉपुलर एक्ट्रेस ईशा सिंह निभा रही हैं. जानते हैं कि कलर्स का नया शो बाकी शोज से कितना अलग है और क्या ये पब्लिक का दिल जीत पाया है.

क्या है 'जूही मुई' की कहानी?
'जूही मुई' की जूही एक प्रतिभाशाली लड़की है, जिसकी असाधारण याददाश्त, तेज समझ और डिसिप्लिन दूसरों से अलग बनाता है. पिता के निधन के बाद जूही परिवार की संपत्ति की रक्षा के लिए खुद वकील बनकर अपना केस लड़ती है. परिवार में मौजूद कुछ स्वार्थी लोग जूही के पिता के आखिरी निशानी को हड़पने की साजिश रच रहे हैं.

जूही अपनी तेज और पारखी नजरों से चालाक लोगों की बुद्धि को भांप लेती है. वो बिना डरे पिता की आखिरी निशानी को बचाने की कोशिश में जुट जाती है. मुश्किल घड़ी में पुलिस अधिकारी संयम सिंह (विजयेंद्र कुमेरिया) जूही का सपोर्ट बनकर उसके खड़े होते हैं. संयम, जूही के टैलेंट की कद्र करता है और उसे नॉर्मल लोगों की तरह ट्रीट करता है.

कैसा रहा शो?
'जूही मुई' एक अच्छी स्टोरी लाइन वाला शो है, जिसमें कुछ अच्छइयां और कमिया हैं. ऑटिस्टिक पेशेंट के रोल में ईशा अपने किरदार पर खरी नहीं उतरती हैं. इसमें कोई दोराय नहीं है कि ईशा बेहतरीन एक्ट्रेस हैं, लेकिन शुरुआत के एपिसोड में वो ऑटिज्म को बेहतरीन ढंग से पर्दे पर नहीं दिखा पाईं. ऑटिज्म जैसे गंभीर बीमारी को पर्दे पर दिखाने के लिए उन्हें थोड़ी और मेहनत करनी होगी. शो में कई जगहों पर ओवर एक्टिंग करती दिखीं.

शो की कहानी अलग है, लेकिन इसमें पारिवारिक मुद्दों का घुसना अखरता है. कम से कम शुरुआत दिनों में ऑटिज्म पेशेंट के स्ट्रगल को दर्शाना चाहिए. ना कि उन्हें बहादुर दिखाकर उनके संघर्षों और पीड़ा को छिपाना चाहिए. ये एक संवेदनशीला मुद्दा है, जिसे मेकर्स हड़बड़ी में बनाते नजर आए. क्योंकि जो लोग ऑटिज्म से जूझ रहे हैं, उनके दर्द को समझना बेहद मुश्किल है. बाकी टीवी शो में ऑटिज्म जैसे मुद्दे को दिखाया जा रहा है, उसके लिए शो की तारीफ बनती है.

शुरू हुई कंट्रोवर्सी
लोगों ने टीवी पर कुछ अलग देखना शुरू ही किया था कि इसे लेकर कंट्रोवर्सी शुरू हो गई है. कहा जा रहा है कि ईशा का शो कोरियाई ड्रामा 'एक्स्ट्राऑर्डिनरी अटॉर्नी वू' की 'कॉपी' है. इस विवाद में कितनी सच्चाई है. इस पर अब तक मेकर्स का जवाब नहीं आया है. आज के दौर में ये शो कितना लंबा चलेगा. ये आने वाले समय में पता चलेगा.

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