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छत्तीसगड़

बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के जैविक उत्पाद को जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का भरपूर समर्थन

रायपुर 

छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) का प्रयास लगातार सफल हो रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा जैविक पद्धति से उत्पादित और प्रसंस्कृत अरपा-बिहान विष्णुभोग चावल को अब जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। इसका ताजा उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले के पेंड्रा स्थित असेंबली हॉल में आयोजित स्थानीय जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान महज 30 मिनट में 45 हजार रुपये से अधिक मूल्य के विष्णुभोग चावल की बिक्री हुई।

यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, गुणवत्ता आधारित उत्पादन और राज्य सरकार की आजीविका उन्मुख योजनाओं पर बढ़ते जनविश्वास का प्रमाण है। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से सीधे चावल खरीदकर उनके आत्मविश्वास को नई ऊर्जा दी।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, मरवाही विधायक  प्रणव कुमार मरपची तथा कोटा विधायक  अटल वास्तव ने स्वयं विष्णुभोग चावल खरीदकर महिलाओं के प्रयासों की सराहना की और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश दिया। वहीं स्थानीय निवासी  पंकज तिवारी ने एक साथ 200 किलोग्राम विष्णुभोग चावल खरीदकर अब तक के सबसे बड़े खरीदार बनने का गौरव प्राप्त किया। उनके इस कदम ने अन्य नागरिकों को भी स्थानीय उत्पादों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत गठित महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) इस पहल की प्रमुख कड़ी बनकर उभरी है। महिलाओं द्वारा जैविक पद्धति से उत्पादित विष्णुभोग धान का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण, आकर्षक ब्रांडिंग, गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग और व्यवस्थित विपणन किया जा रहा है। इससे उत्पाद को बेहतर बाजार मिलने के साथ-साथ किसानों और महिला उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य भी प्राप्त हो रहा है।

जिले में इस पहल को आगे बढ़ाने में कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत  मुकेश रावटे की सक्रिय भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। उनके मार्गदर्शन में विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और सार्वजनिक मंचों पर लगातार विष्णुभोग चावल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। परिणामस्वरूप इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है और अधिक महिलाएं इस मॉडल से जुड़कर अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक  दुर्गाशंकर सोनी ने बताया कि जिले में मिशन के अंतर्गत 179 सीएमएसए (कम्युनिटी मैनेज्ड सस्टेनेबल एग्रीकल्चर) ग्रामों का चयन किया गया है। इस वर्ष 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विष्णुभोग धान के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, ताकि जैविक खेती को बढ़ावा मिले, किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो और स्व-सहायता समूहों की महिलाएं लखपति दीदी अभियान के तहत आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकें।

ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, जैविक खेती की गुणवत्ता, आधुनिक विपणन व्यवस्था और सामुदायिक भागीदारी के समन्वय से अरपा-बिहान विष्णुभोग अब केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की महिला शक्ति, स्थानीय उद्यमिता और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त प्रतीक बनकर उभर रहा है। जिस गति से इस उत्पाद को बाजार और उपभोक्ताओं का विश्वास मिल रहा है, उससे यह आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की विशिष्ट कृषि पहचान के रूप में स्थापित होने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

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