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देश

PM उदय योजना को नहीं मिल रहा रिस्पॉन्स, प्रॉपर्टी नियमितीकरण शुल्क कम करने की तैयारी

नई दिल्ली
 1511 अनाधिकृत कॉलोनियों में जैसा है वैसे ही के आधार पर लोगों को उनकी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक देने के लिए नए सिरे से पीएम उदय योजना की शुरुआत की गई थी। नियमों को आसान बनाते हुए यह प्रक्रिया DDA की बजाय MCD को दी गई थी। इसके बावजूद इसे रिस्पांस नहीं मिल रहा है। अब MCD की मांग पर DDA इस योजना के तहत रेगुलराइजेशन शुल्क कम करने पर विचार कर रही है। अधिकारी के अनुसार MCD की तरफ से यह मांग मिली है जिस पर अधिकारी विचार कर रहे हैं।

अभी तक पीएम उदय योजना को कोई खास रिस्पांस नहीं मिला है। पोर्टल पर दी जा रही जानकारी के अनुसार अभी तक 50 से भी कम आवेदन मिले हैं। हालांकि प्रक्रिया को सरल करने के बाद इसमें बड़ी संख्या में आवेदन आने की उम्मीद थी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि इसके नियमतीकरण का शुल्क अधिक है। आवेदन न मिलने और इस शुल्क में कमी के लिए अप्रैल में MCD ने DDA को पत्र लिखकर यह मांग की थी कि इस शुल्क को कम किया जाए। MCD को उम्मीद है कि DDA इस शुल्क को कम करे तो बड़ी संख्या में लोग अप्लाई कर सकते हैं।

2019 में शुरु हुई पीएम उदय योजना
दिल्ली में पीएम उदय योजना 2019 में लाई गई थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य 1731 कॉलोनियों में रहने वाले करीब 45 लाख प्रॉपर्टी मालिकों को उनके घर का स्वामित्व का अधिकार देना था। हालांकि तय मानकों से अतिरिक्त निर्माण करने के व दूसरी प्रक्रियाएं जटिल होने की वजह से छह साल में मात्र 40 हजार लोग ही इसका लाभ ले सके थे। DDA से मिले कम रिस्पांस के बाद केंद्र सरकार ने नए बदलावों व आसान प्रक्रिया के साथ अप्रैल 2026 में इन कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा कर मालिकाना हक देने की बात कही थी। इस बार प्रक्रिया को आसान किया गया और MCD को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि कोर्ट में चल रहे मामलों की वजह से करीब 200 कॉलोनियों को इसमें से हटा लिया गया।

फिलहाल 350 AFR की ही अनुमति
फिलहाल यहां पर संपत्तियों की खरीद फरोख्त जनरल पावर अटॉर्नी के आधार पर होती है। इसलिए MCD ने DDA से अपील की है कि इसके रेगुलराइजेशन का शुल्क एक तिहाई कम करे। अभी तक 350 फ्लोर एरिया रेशियो (AFR) की ही अनुमति है। अभी तक रेगुलराइजेशन के लिए यदि किसी 100 गज की जमीन पर बनी चार मंजिला इमारत के ऊपर किसी ने दो मंजिल और बना रखी है तो उसे करीब सात से 10 लाख रुपये अतिरिक्त देने होंगे। बाकी खर्चे अलग हैं। ऐसे में निगम ने मांग की है कि इस शुल्क को भी घटाया जाए। क्योंकि अतिरिक्त FAR लेने पर 11 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर का शुल्क है, वह तीन गुणा अधिक देना पड़ता है। यही वजह है कि लोग अप्लाई नहीं कर रहे हैं। अनधिकृत कॉलोनियों में अधिकांश निर्माण नियमों के तहत नहीं है। इसलिए तीन गुणा अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है।

 

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