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मानसून बना किसानों का सहारा, झारखंड के खेतों में लौटी हरियाली और उम्मीद

 रांची
मानसून की सक्रियता और लगातार हो रही बारिश ने पंच परगना क्षेत्र (सिल्ली, बुण्डू, बरेंदा, राहे और तमाड़) के किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है. पिछले दो दिनों से हुई अच्छी बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त पानी जमा होने लगा है. इसके साथ ही धान की रोपाई का कार्य भी रफ्तार पकड़ चुका है. ग्रामीण इलाकों में खेतों की रौनक लौट आई है और किसान पूरे उत्साह के साथ खेती-किसानी में जुट गए हैं.

सुबह से शाम तक खेतों में जुटे किसान
इन दिनों सुबह से लेकर शाम तक किसान परिवार के सदस्य और खेतिहर मजदूर धान रोपाई में लगे हुए हैं. खेतों में महिलाएं धान की पौध रोप रही हैं, जबकि पुरुष जुताई, पाटा चलाने और अन्य कृषि कार्यों में व्यस्त हैं. गांवों का माहौल पूरी तरह खेती-किसानी के रंग में रंग गया है.

नर्सरी से निकाली जा रही धान की पौध
पंच परगना क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों और गांवों में किसानों ने पहले से तैयार नर्सरी से धान की पौध निकालकर रोपाई शुरू कर दी है. वहीं, कुछ स्थानों पर अभी खेतों की अंतिम तैयारी की जा रही है, ताकि अगले कुछ दिनों में रोपाई पूरी की जा सके.

अच्छी बारिश से बेहतर उत्पादन की उम्मीद
किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में नियमित रूप से बारिश होती रही तो इस वर्ष धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है. उनका मानना है कि समय पर बारिश होने से खेती की लागत भी कम होगी और सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा.

कृषि विशेषज्ञों ने बताया मौसम अनुकूल
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की रोपाई के लिए खेतों में पर्याप्त नमी और पानी का होना जरूरी है. वर्तमान मौसम धान की खेती के लिए अनुकूल है. समय पर रोपाई पूरी होने से फसल की वृद्धि बेहतर होगी और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ेगा. हालांकि किसानों का कहना है कि खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है. यदि बीच सीजन में लंबे समय तक बारिश नहीं हुई तो फसल प्रभावित हो सकती है.

गांवों की आर्थिक गतिविधियों को भी मिली रफ्तार
खेती शुरू होने के साथ ही कृषि कार्यों से जुड़े मजदूरों को भी रोजगार मिलने लगा है. गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. कृषि उपकरण, खाद और बीज की दुकानों पर किसानों की भीड़ बढ़ने लगी है. किसान धान की खेती के लिए आवश्यक उर्वरक, बीज और अन्य कृषि सामग्री की खरीदारी में जुटे हैं.

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