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उत्तर प्रदेश

कानपुर में ईंधन को लेकर चिंता, ई-20 पेट्रोल से इंजन और टैंक डैमेज के दावे

कानपुर
  ई-20 पेट्रोल सिर्फ वाहनों के माइलेज में गिरावट तक सीमित नहीं है। बीते कई दिनों से इथेनोल से फ्यूल टैंक में जंग लगने और रबर के पार्टस भी खराब होने के दावे लोगों की ओर से किए जा रहे हैं। ऐसे में लोगों को अपने वाहन के खराब होने और मरम्मत का खर्च बढ़ने की चिंता भी सता रही है।

बीते वर्ष चार सितंबर को दैनिक जागरण ने ‘ई-20 पेट्रोल से माइलेज में आ रही गिरावट’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के पूर्व डायरेक्टर प्रो. नरेंद्र मोहन अग्रवाल के मुताबिक, पेट्रोल और इथेनोल घनत्व का अंतर और इथेनोल का हाइग्रोस्कोपिक यानी आर्द्रताग्राही गुण इसका सबसे बड़ा कारण है। अधिक घनत्व के कारण यह फ्यूल टैंक की सतह पर बैठ जाता है और नमी को खींचता रहता है। इसकी वजह से ईंधन जलने के पहले वाहन के जिस-जिस भाग (फ्यूल टैंक, पिस्टन आदि) से गुजरता है

उन्होंने बताया कि वहां जंग लगने का खतरा बना रहता है। इस वजह से वाहन परफार्मेंस पर भी असर पड़ रहा है। इतना ही नहीं इथेनोल रबर और प्लास्टिक के पार्ट्स को भी नुकसान पहुंचा रहा है। प्रो. नरेंद्र मोहन के मुताबिक वाहनों की इथेनोल पर संचालित होने की क्षमता और पेट्रोल में इथेनोल का मिश्रण भी परेशानी का कारण बन रहा है।

मसलन, अगर वाहन के इंजन पांच प्रतिशत इथेनोल मिश्रित पेट्रोल के लिए तैयार किया गया है और अब उसमें 20 प्रतिशत इथेनोल मिश्रित पेट्रोल डाला जाएगा तो कोरोजिन जैसी दिक्कतें पैदा होंगी। उन्होंने ब्राजील का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया वहां के पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को प्रतिशत के हिसाब के इथेनोल मिश्रित पेट्रोल चुनने का विकल्प मिलता है। ऐसा अपने देश में भी ऐसा होना चाहिए। बर्रा विश्व बैंक निवासी नितिन मिश्रा ने बताया कि 10 दिन पहले स्कूटी का सर्विस कराई थी।

इंजन आयल से लेकर फिल्टर तक सभी जरूरी चीजों बदलवाईं थी। लेकिन बीते गुरुवार को अचानक स्कूटी बंद हो गई। मकैनिक को दिखाया तो उसने पहले फ्यूल टैंक में पानी जाने की बात कही। इसके बाद जब सफाई के लिए टैंक खुलवाया तो उसमें जंग लगी थी और कचरा जमा था। ऐसे में जब फ्यूल टैंक में पेट्रोल के अलावा और कुछ नहीं भरा जा रहा है तो इसकी वजह भी यही है।

वहीं, साकेत नगर निवासी अनमोल भट्ट ने बताया कि बीते साल एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटीलिटी व्हीकल) खरीदा था। बीते कई दिनों से कार का माइलेज कम था। चेकअप कराने पर इंजन से लेकर कई पुर्जों में लगी जंग इसकी प्रमुख वजह बनकर सामने आई। प्रो. नरेंद्र मोहन बताते हैं कि पेट्रोल और इथेनोल दोनों का घनत्व अलग-अलग होता है। ऐसे में यह फ्यूल टैंक की तली में नीचे बैठ जाता है। जो धीरे-धीरे रस्ट यानी जंग और काई का रूप ले लेता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक इथेनोल पिस्टन ब्लाक और रिंग के बीच में पहुंचकर आयल कोटिंग को नुकसान पहुंचा रहा है। इसकी वजह से आयल कोटिंग में रस्टिंग हो रही है। यह रस्टिंग पांच से 10 मिलीमीटर की है, लेकिन इससे इंजन के परफार्मेंस में प्रभाव पड़ रहा है। इनलेट व एक्जाइट वाल्व को भी इथेनोल मिश्रित पेट्रोल नुकसान पहुंचा रहा है और कोरोजिन पैदा कर रहा है।

वाहन स्वामियों को इंश्योरेंस मिल रहा न वारंटी
वाहन बीमा जानकार निर्मल त्रिपाठी के मुताबिक इस तरह की समस्याएं को वास्तव में मैकेनिकल फेल्योर माना जाता है। ऐसे में इंश्योरेंस कंपनियां इसे प्रमीमियम में कवर नहीं कर रही हैं, जबकि आटोमोबाइल कंपनियां इसे नमी की दिक्कत बताकर वारंटी देने से बच रही हैं। तेल कंपनियों ने भी पल्ला झाड़ लिया है। ऐसे में वाहन चालकों के सामने सिर्फ भ्रम की स्थिति है।

गाड़ियों को मानक के मुताबिक मिले ईंधन
आटोमोबाइल विशेषज्ञ अमित द्विवेदी के मुताबिक, पेट्रोल में इथेनोल मिलाने की नीति लंबे समय से चली आ रही है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। लेकिन समस्या है कि बीएस-4 मानक से नीचे के वाहन ई-20 पेट्रोल के लिए तैयार नहीं है।

यह ई-5 या ई-10 यानी पांच से दस प्रतिशत इथेनोल मिश्रित पेट्रोल के लिए तैयार किए गए थे। ऐसे में सरकार को चाहिए की अगर किसी वाहन का रजिस्ट्रेशन 15 साल का है तो उसे तय मानक के अनरूप पेट्रोल मिले। पेट्रोल पंपों पर ई-5 से ई-20 पेट्रोल तक का विकल्प होना चाहिए।

इन सुधारों की जरूरत
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के मुताबिक इथेनोल में हाइग्रोस्कोपिक यानी आर्द्रताग्राही गुण होते हैं। इस वजह से फ्यूल टैंक और पाइपलाइन में जंग लगने का खतरा रहता है। प्लास्टिक और रबर के पार्ट्स भी जल्दी खराब हो सकते हैं, जिससे फ्यूल लीक, गंदे इंजेक्टर और गैसकेट डैमेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

एक्सपर्ट के मुताबिक, ई-20 फ्यूल सिस्टम में एंटी-करोसिव कोटिंग, गैसकेट्स व सील्स की गुणवत्ता में सुधार और इंजन रीमैपिंग जैसी तकनीकी अपग्रेड की जरूरत होती है।

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