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पुरानी मतदाता सूची से मैपिंग न होने से मतदाताओं की बढ़ी परेशानी

नई दिल्ली
 स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया जारी है। घर-घर पहुंच रहे बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को अब नई समस्या का सामना करना पड़ रहा है। लोग 2002 की मतदाता सूची से अपना मिलान नहीं कर पा रहे हैं। कई लोग ऐसे हैं जो 2002 में ही मतदाता बनने के लिए एजिलिबल हो गए थे, लेकिन उन्होंने अपने वोटर कार्ड नहीं बनवाए। ऐसे लोगों के नाम नहीं मिल रहे हैं। तकनीकी दिक्कतों से माता-पिता से नाम की मैपिंग नहीं करा पा रहे हैं।

सूची से मैपिंग कराने में करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना
पुरानी मतदाता सूची से मैपिंग कराने में लोगों को सर्वाधिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग ऐसे हैं जो 2002 में 18 वर्ष के हो गए थे। लेकिन उन्होंने अपना मतदाता पहचान पत्र 2005 या उसके बाद बनवाया। इससे उनका नाम सूची में नहीं मिल रहा है। चुनाव आयोग ने व्यवस्था की है कि जो 2002 की सूची में नहीं है वह अपने माता-पिता या दादा-दादी के नाम के साथ मैपिंग कर सकते हैं।

अब समस्या आ रही है कि उनकी मैपिंग माता-पिता के नाम के साथ नहीं हो पा रही है। कुछ ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जिनमें माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है। दादा-दादी के बारे में भी जानकारी नहीं है। 2002 में वे मतदाता नहीं थे और अब मैपिंग में अपना नाम नहीं दिखा पा रहे हैं।

कई मामलो में माता-पिता की मौत हो चुकी
पटपड़गंज इलाके में एन्युमरेशन फॉर्म भरवा रहे BLO अरुण कुमार ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आ रहे है, जिनमें 2002 में एलिजिबल होकर भी मतदाता पहचान पत्र नहीं बनवाया, अब उनके नाम नहीं मिल रहे हैं। कई मामलो में माता-पिता की मौत हो चुकी है। उनके नाम की मैपिंग करना चुनौतीभरा साबित हो रहा है।

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हम उनको समझा रहे हैं कि अगर आपका नाम 5 अगस्त को प्रकाशित होने वाले ड्राफ्ट रोल में नहीं आता है, तो उनके पास दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका है। इसके बाद जरूरी 12 दस्तावेज में से कोई भी एक पेश करके वह अपना नाम जुड़वा सकते हैं। लेकिन, लोगों में डर का माहौल है कि उनका नाम कट जाएगा तो वापस नहीं जुड़ेगा। ऐसे में लोगों को समझाने में काफी मुश्किल हो रही है। चुनाव आयोग के मुताबिक 2002 में एलिजिबल होकर भी मतदाता पहचान पत्र नहीं बनवा सके तो माता-पिता से अपनी मैपिंग करा सकते हैं। इसमें कोई दिक्कत नहीं है।

3 दिनों में बांटे 21 लाख से ज्यादा फॉर्म
SIR के तीसरे दिन बीएलओ ने घर-घर जाकर एन्युमरेशन फॉर्म बांटे। गुरुवार की रात 8 बजे तक दिल्ली में कुल 21 लाख 2 हजार 79 चुनावी फॉर्म वांटे जा चुके है, जो कि कुल मतदाताओं का 14.49 प्रतिशत है। हालांकि, बांटे गए फॉर्मों को डिजिटल प्लैटफॉर्म पर दर्ज करने यानी डिजिटाइजेशन की रफ्तार अभी काफी धीमी है। अब तक केवल 63 हजार 620 फॉर्मों का ही डिजिटाइजेशन हो पाया है।

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