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एसआईआर प्रक्रिया में फर्जी प्रमाणपत्रों पर कार्रवाई के आदेश, मतदाता सूची सुधार पर जोर

 रांची
राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एसआइआर को लेकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश सभी जिलों के उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एसआइआर की प्रक्रिया में कई प्रकार के दस्तावेज की आवश्यकता मतदाताओं को हो सकती है।

पाकुड़ एवं गढ़वा जिले में ऐसे मामलों की सूचना विभिन्न माध्यमों से आई है। इसलिए ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरूद्ध कानून की संगत धाराओं के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह भी कहा है कि एसआइआर के दौरान जितने भी दस्तावेज जमा किए जाएंगे, उनका सत्यापन का दायित्व जिला निर्वाचन पदाधिकारी का है।

इसलिए एसआइआर के लिए कोई भी नागरिक फर्जी अनधिकृत दस्तावेज न बनवाए और न ही ऐसा प्रयास किसी के द्वारा किया जाए। उन्होंने इसका पूर्णरूप से प्रचार-प्रसार विभिन्न माध्यमों से करने को कहा है। साथ ही ऐसे मामलों में उपायुक्तों को पूर्ण सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने राजनीतिक दलों से की सहयोग की अपील
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने गुरुवार को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर उत्पन्न होनेवाली शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर राजनीतिक दलों द्वारा उठाई गई विभिन्न पृच्छाओं और शंकाओं का समाधान पीपीटी के माध्यम से किया।

उन्होंने कहा कि एसआइआर का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से न छूटे और किसी भी अयोग्य व्यक्ति का नाम इसमें शामिल न हो। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एसआइआर की चरणबद्ध विस्तृत कार्ययोजना और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश को साझा किया।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण एवं मुद्रण का कार्य 29 जून तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद 30 जून से 29 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर भ्रमण कर गणना प्रपत्र भरने का का कार्य किया जाएगा। मतदान केंद्रों का युक्तीकरण 29 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा।

इसके बाद पांच अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन होगा, जिस पर चार सितंबर तक दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। दावों और आपत्तियों के निष्पादन के बाद सात अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।

उनके अनुसार, 30 जून से शुरू होने वाले गणना चरण के दौरान बीएलओ अनिवार्य रूप से घर-घर जाकर नागरिकों को आंशिक रूप से पहले से भरा हुआ गणना प्रपत्र दो प्रतियों में वितरित करेंगे। यदि कोई घर बंद मिलता है, तो बीएलओ को प्रपत्र इकट्ठा करने के लिए कम से कम तीन बार जाना होगा।

इस चरण के शुरुआती दिनों में मतदान केंद्रों पर कोई कैंप नहीं लगेगा, बल्कि यह सेवा पूरी तरह घर-घर जाकर दी जाएगी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि मतदाताओं से दस्तावेजों की आवश्यकता को कम करने के लिए ''सेल्फ'' या ''पैरेंटल'' मैपिंग की जा रही है। यदि किसी मतदाता का नाम पिछले एसआइआर रोल में दर्ज है, तो उसे किसी अन्य दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी।

इसके अतिरिक्त, सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और सिविल व सैन्य क्षेत्र के सभी वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान पहले से कर प्राथमिकता के आधार पर उनकी गणना की जाएगी। मैपिंग के दौरान सामने आने वाली 15 प्रकार की विसंगतियों को दूर करने के लिए बीएलओ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

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