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उत्तर प्रदेश

हर ब्लॉक में पांच चयनित एआरपी एवं एक नामित डायट मेंटर मिलकर संभालेंगे शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार की जिम्मेदारी

बुनियादी शिक्षा को नई गति, योगी सरकार ने एआरपी व्यवस्था का किया पुनर्गठन

– हर ब्लॉक में पांच चयनित एआरपी एवं एक नामित डायट मेंटर मिलकर संभालेंगे शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार की जिम्मेदारी

– सेवानिवृत्ति में केवल पांच वर्ष शेष होने पर भी पात्र, किसी भी विषय के शिक्षक कर सकेंगे आवेदन

– माइक्रो टीचिंग प्रदर्शन हटाकर चयन प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाया गया

– पारदर्शी चयन, वार्षिक मूल्यांकन और क्षमता संवर्धन की नई व्यवस्था लागू

– निपुण भारत मिशन और सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने पर रहेगा विशेष फोकस

लखनऊ, 
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बुनियादी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार को नई गति देने के लिए अकादमिक नेतृत्व व्यवस्था को और मजबूत बना रही है। इसी क्रम में समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित ब्लॉक संसाधन केंद्रों (बीआरसी) की अकादमिक व्यवस्था को नई संरचना देते हुए अकादमिक रिसोर्स पर्सन्स (एआरपी) प्रणाली का व्यापक पुनर्गठन किया गया है। अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन पार्थ सारथी सेन शर्मा के हस्ताक्षर से जारी शासनादेश में एआरपी के चयन, कार्यदायित्व, प्रशिक्षण, मूल्यांकन और जवाबदेही संबंधी विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।

शासनादेश के अनुपालन में स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को जुलाई तक रिक्त एआरपी पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि नए शैक्षणिक सत्र में ब्लॉक स्तर का अकादमिक सहयोग तंत्र पूरी क्षमता के साथ कार्य कर सके।

विद्यालयों तक पहुंचेगा मजबूत अकादमिक सहयोग तंत्र
नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक में पांच चयनित एआरपी और एक नामित डायट मेंटर मिलकर शैक्षणिक सहायता टीम का गठन करेंगे। यह अकादमिक टीम विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने, शिक्षकों को सतत शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने, कक्षा-कक्ष की चुनौतियों के समाधान तथा विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सुधार की दिशा में कार्य करेगी।

पारदर्शी और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया
एआरपी का चयन पूरी तरह मेरिट आधारित होगा। नई व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक योग्य और अनुभवी शिक्षकों को इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक दायित्व से जोड़ा जा सके। अब सेवानिवृत्ति में केवल पांच वर्ष शेष रहने वाले शिक्षक भी एआरपी पद के लिए पात्र होंगे, जबकि पहले यह सीमा 10 वर्ष थी। अब किसी भी विषय के परिषदीय शिक्षक आवेदन कर सकेंगे, जबकि पहले केवल चयनित विषयों के शिक्षकों को ही पात्रता प्राप्त थी। चयन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए माइक्रो टीचिंग का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। अब चयन केवल लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होगा। जिला स्तर पर गठित चयन समिति पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगी।

निपुण भारत मिशन को मिलेगा जमीनी आधार
निपुण भारत मिशन को बालवाटिका से कक्षा 5 तक विस्तारित करने की दिशा में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगी। एआरपी विद्यालयों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), गतिविधि आधारित शिक्षण, टीएलएम के प्रभावी उपयोग, प्रिंट-रिच वातावरण तथा बेहतर कक्षा प्रबंधन को बढ़ावा देंगे। साथ ही वे शिक्षकों को नवीन शिक्षण पद्धतियों और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग में भी सहयोग करेंगे, जिससे ब्लॉक स्तर पर सतत शैक्षणिक सहयोग की मजबूत व्यवस्था विकसित होगी।

प्रदर्शन आधारित जवाबदेही से बढ़ेगी गुणवत्ता
नई व्यवस्था में एआरपी का कार्यकाल प्रदर्शन आधारित होगा। नियमित मूल्यांकन के आधार पर ही कार्यकाल का विस्तार किया जाएगा। इससे शैक्षणिक नेतृत्व में जवाबदेही, प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा। शासनादेश में एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स के लिए नियमित प्रशिक्षण तथा क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों का भी प्रावधान किया गया है।

शिक्षा सुधारों को मिलेगा नया बल
प्रदेश में निपुण भारत मिशन, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, बालवाटिका, विद्यालय कायाकल्प और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। नई एआरपी व्यवस्था इन सभी प्रयासों को विद्यालय स्तर तक सशक्त रूप से पहुंचाने का माध्यम बनेगी। ब्लॉक स्तर पर मजबूत अकादमिक सहयोग तंत्र विकसित होने से शिक्षकों को निरंतर मार्गदर्शन मिलेगा, अधिगम परिणामों में सुधार आएगा और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

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