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मध्यप्रदेश

सुभाषनगर-एम्स रूट पर 2 दिन नहीं चलेगी भोपाल मेट्रो, CMRS करेगी निरीक्षण

भोपाल

राजधानी भोपाल के सुभाषनगर से एम्स के बीच दौड़ रही मेट्रो अगले 2 दिन यानी, बुधवार और गुरुवार को बंद रहेगी। यह आम लोगों के लिए नहीं दौड़ेगी। दो दिन तक कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) सिग्नलिंग सिस्टम की जांच करेगी। यह टीम भोपाल पहुंच गई है।

निरीक्षण के बाद टीम 'ओके' रिपोर्ट देगी। इसके बाद सिग्नलिंग सिस्टम चालू हो जाएंगे। जिससे मेट्रो का नया शेड्यूल और टाइमिंग तय होगी। जुलाई में सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया शेड्यूल जारी होगा।

मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, निरीक्षण एवं परीक्षण पूरा होने के बाद 26 जून से मेट्रो फिर से अपने निर्धारित समय पर दौड़ने लगेगी।

सुभाष नगर से एम्स के बीच करीब 7 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो गया है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑरेंज-येलो लाइन के 2 रूट 30 किलोमीटर लंबे हैं। फिलहाल 12 किमी में ही मेट्रो दौड़ रही है, लेकिन इसकी रफ्तार काफी धीमी है। इस वजह से सवाल उठने लगे हैं।

800 करोड़ रुपए में नया सिस्टम
भोपाल में मेट्रो संचालन की सुस्त रफ्तार को तेज करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो गया। करीब 30 किमी के लिए हुए करीब 800 करोड़ रुपए के टेंडर का यह पहला चरण है।

अभी एक ही ट्रैक पर दौड़ रही मेट्रो
जानकारी के अनुसार, भोपाल और इंदौर में अभी सिग्नलिंग सिस्टम नहीं है। इस वजह से मेट्रो प्रबंधन को केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) पर ट्रेन चलानी पड़ रही हैं। यही वजह है कि भोपाल में ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी 75 मिनट रखी गई है, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। यहां दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बाद ही मेट्रो दौड़ रही है।

जिस ट्रैक पर दौड़ती, उसी पर वापसी
सुभाष नगर से एम्स के बीच डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में चलाई जा रही हैं। यानी जो जा रही है, वह उसी ट्रैक पर लौट रही है। जबकि अप ट्रैक (एम्स से सुभाष नगर) पर ट्रेन नहीं दौड़ती। नए सिस्टम के बाद दोनों तरफ से ट्रेन चलेगी।

मेट्रो की रीढ़ होता है सिग्नलिंग सिस्टम
जानकारों के मुताबिक सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा होता है। यही तय करता है कि ट्रेन कितनी दूरी पर चलेगी। ट्रेन की अधिकतम और न्यूनतम गति नियंत्रित करता है। ट्रेनों के बीच सुरक्षित गैप बनाए रखता है।

ऑटोमेटेड ऑपरेशन और इमरजेंसी कंट्रोल संभालता है। सिस्टम के बिना मल्टी-ट्रैक ऑपरेशन संभव नहीं होता, जिससे पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता।

दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक
भोपाल मेट्रो में वही आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो दिल्ली मेट्रो में इस्तेमाल होती है। इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रेन दोनों ट्रैक पर चल सकेंगी। ट्रेनों के बीच का अंतर (हेडवे) कम होगा और फ्रिक्वेंसी तेजी से बढ़ाई जा सकेगी।

नए सिस्टम से यह फायदा
नए सिस्टम के शुरू होने के बाद मेट्रो दोनों ओर से चलेगी। इससे 75 मिनट की टाइमिंग कम होगी। इससे लोगों को आसानी से मेट्रो मिल सकेगी। फेरे भी बढ़ जाएंगे। ऐसे में सुबह और शाम को ऑफिस टाइमिंग पर भी मेट्रो मिल सकेगी।

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