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छत्तीसगड़

82 ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, स्वच्छता कर्मियों एवं हितधारकों को दिया गया व्यवहारिक प्रशिक्षण

रायपुर

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रायगढ़ में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायगढ़ के सहयोग से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत नगर निगम ऑडिटोरियम, रायगढ़ में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।  

पंचायत प्रतिनिधि एवं अन्य हितधारकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान राज्य सलाहकार मती मोनिका सिंह एवं  पुरुषोत्तम पंडा ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रतिभागियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं सतत ग्रामों के निर्माण में वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका है तथा सभी ग्राम पंचायतों को नियमों के अनुरूप कार्य करना आवश्यक होगा।

कचरा पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष जोर

प्रशिक्षण सत्र में घरेलू एवं सामुदायिक स्तर पर उत्पन्न होने वाले विभिन्न प्रकार के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को 4-वे कचरा पृथक्करण प्रणाली की जानकारी दी गई, जिसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी अपशिष्ट तथा घरेलू खतरनाक अपशिष्ट को अलग-अलग संग्रहित करने एवं उनके सुरक्षित निस्तारण की प्रक्रिया समझाई गई।

विशेषज्ञों ने बताया कि स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण करने से अपशिष्ट प्रबंधन अधिक प्रभावी एवं पर्यावरण अनुकूल बनता है। ग्राम पंचायतों में कचरा संग्रहण, परिवहन एवं अंतिम निस्तारण की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करने पर भी बल दिया गया। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि ग्राम पंचायत क्षेत्रों में कचरे को खुले में फेंकना, जलाना अथवा भूमि में दबाना नियमों के विरुद्ध है तथा ऐसे मामलों में जुर्माना सहित वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

बल्क वेस्ट जेनरेटरों के पंजीयन और जनजागरूकता पर चर्चा

 कार्यशाला में बल्क वेस्ट जेनरेटरों की पहचान एवं उनके पंजीयन की प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पोर्टल पर बल्क वेस्ट जेनरेटरों के पंजीयन की प्रक्रिया समझाई गई तथा बताया गया कि बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के अपशिष्ट प्रबंधन की नियमित निगरानी की जाएगी। 

प्रशिक्षण के दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता अभियान संचालित करने, प्रत्येक परिवार को कचरा पृथक्करण के लिए प्रेरित करने तथा स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देने संबंधी दिशा-निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि सामुदायिक सहभागिता और जनजागरूकता के माध्यम से ही स्वच्छ, स्वस्थ एवं पर्यावरण अनुकूल ग्रामों का निर्माण संभव है।

 कार्यक्रम में मुख्य रसायनज्ञ  नवीन चंद्र मालवीय, वैज्ञानिक सु श्वेता खाखा, वैज्ञानिक  सतीश पटेल, पर्यावरण विभाग के अधिकारीगण, जिला पंचायत से एपीओ  वीरेंद्र सिंह राय, जिला सलाहकार (एसबीएम-जी)  अर्जुन मेहेर, विभिन्न जनपद पंचायतों की एसबीएम-जी टीम, सरपंच, सचिव एवं स्वच्छाग्रही बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने ग्राम पंचायत क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।

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