<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
उत्तर प्रदेश

मस्जिद से मदरसे तक प्रशासन की सख्ती, वाराणसी-गाजियाबाद-आगरा में क्या-क्या हुआ?

लखनऊ

यूपी में धार्मिक स्थलों से जुड़े कई मामले एक साथ चर्चा में हैं. कहीं मस्जिद को नोटिस मिला है, कहीं मदरसे पर बुलडोजर चला है, तो कहीं सड़क के बीच स्थित मजार को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया है. वहीं बहराइच में हाईवे किनारे स्थित एक मस्जिद को हटाने की प्रस्तावित कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है. चारों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं. वाराणसी में रेलवे स्टेशन के विस्तार का मामला है, गाजियाबाद में सरकारी भूमि पर कथित कब्जे का आरोप है, आगरा में सड़क सुरक्षा और यातायात का मुद्दा सामने आया, जबकि बहराइच में प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक कार्रवाई रोकने का फैसला लिया है। 

वाराणसी: काशी रेलवे स्टेशन के पास मस्जिद को मिला नोटिस
न्यूज एजेंसी के मुताबिक सबसे ज्यादा चर्चा वाराणसी की हो रही है. यहां काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद पर रेलवे प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया है. नोटिस में संबंधित पक्षों को 20 जून तक परिसर खाली करने के लिए कहा गया है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह कदम काशी मॉडल रेलवे स्टेशन परियोजना के तहत उठाया गया है. स्टेशन का विस्तार और आधुनिकीकरण किया जाना है, जिसके लिए रेलवे अपनी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है. स्टेशन अधीक्षक अर्पित गुप्ता के मुताबिक प्रस्तावित निर्माण कार्यों के लिए भूमि की आवश्यकता है और इसी प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किया गया है। 

कुछ दिन पहले भी हुई थी कार्रवाई
गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस दिए जाने का मामला ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर स्थित अजगैब शहीद मजार और एक मस्जिद को हटाया गया था. 3 जून को हुई इस कार्रवाई के पीछे भूमि स्वामित्व विवाद में न्यायालय के आदेश का हवाला दिया गया था. रेलवे अधिकारियों का कहना था कि पुनर्विकास परियोजना के लिए कराए गए सर्वे में संबंधित ढांचे रेलवे भूमि पर पाए गए थे. इसके बाद नोटिस जारी किए गए और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर कार्रवाई की गई। 

गाजियाबाद: 30 साल पुराने मदरसे पर चला बुलडोजर
उधर गाजियाबाद में प्रशासन ने कुशालिया गांव में स्थित एक मदरसे को ध्वस्त कर दिया. प्रशासन का दावा है कि यह मदरसा सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर बना हुआ था. कार्रवाई से पहले कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं. मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के तहत रैपिड रिस्पांस फोर्स (आरआरएफ) और चार थानों की पुलिस तैनात की गई थी. कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का विरोध या तनाव सामने नहीं आया. सदर एसडीएम अरुण दीक्षित के अनुसार यह मदरसा लगभग 30 वर्षों से संचालित हो रहा था. जिस भूमि पर यह बना था उसका क्षेत्रफल करीब 880 वर्ग मीटर था और उसकी बाजार कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. जांच में पाया गया कि भूमि राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक रास्ते और खाद निस्तारण स्थल के रूप में दर्ज थी. प्रशासन का कहना है कि अभिलेखों की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण का फैसला लिया गया। 

आगरा: बातचीत से निकला रास्ता, दूसरी जगह पहुंची मजार
आगरा का मामला बाकी दोनों मामलों से कुछ अलग रहा. यहां प्रशासन ने किसी प्रकार का ध्वस्तीकरण नहीं किया, बल्कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला. आगरा कॉलेज के निकट व्यस्त एमजी रोड पर स्थित एक मजार को उसकी प्रबंधन समिति की सहमति से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया. प्रशासन का कहना है कि मजार सड़क के बीच स्थित थी, जिससे यातायात प्रभावित होता था और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी पैदा हो रही थीं. अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हिमांशु गौरव के मुताबिक मजार प्रबंधन समिति के साथ कई दौर की बातचीत हुई. इसके बाद आपसी सहमति से मजार को वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया. पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई और कहीं किसी प्रकार का तनाव नहीं देखा गया. आगरा प्रशासन इस मॉडल को संवाद आधारित समाधान के तौर पर देख रहा है। 

बहराइच: फिलहाल रुकी कार्रवाई
वहीं बहराइच में स्थिति कुछ अलग है. यहां बहराइच-नेपाल राजमार्ग के किनारे स्थित एक मस्जिद को लेकर कार्रवाई की चर्चा जरूर हुई, लेकिन प्रशासन ने फिलहाल किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगा दी है. मामला तब चर्चा में आया जब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. पत्र में कथित अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था. पत्र वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. मामले को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाए कोई कार्रवाई नहीं होगी. उन्होंने कहा कि पहले संबंधित पक्षों को नोटिस दिया जाए, जमीन की पैमाइश कराई जाए और सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए. इसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा. प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button