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मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा के विस्तार और तकनीकी चुनौतियों के समाधान पर भोपाल में राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

भोपाल 

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव  मनु वास्तव ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां ऊर्जा सुरक्षा के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का माध्यम बनेंगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार, नीति समर्थन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से राज्य में हरित ऊर्जा के विस्तार को नई गति मिलेगी। मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक  अमनबीर सिंह बैंस ने कहा कि आधुनिक तकनीकों और प्रभावी ग्रिड प्रबंधन के माध्यम से विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकता है तथा इससे राज्य की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस अवसर पर अतिथियों ने पुस्तक विमोचन भी किया।

“मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा परिनियोजन को आगे बढ़ाना” विषय पर भोपाल में आयोजित कार्यशाला में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, परियोजना विकासकर्ताओं, शोधकर्ताओं, डिस्कॉम प्रतिनिधियों तथा सरकारी एवं निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जर्मनी की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (आईकेआई), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश शासन तथा मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार एवं तकनीकी सहयोग को सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया गया।

कार्यशाला में मध्यप्रदेश में एग्रीफोटोवोल्टिक्स पर व्यापक कानूनी एवं व्यवहार्यता मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन किया गया। इसके साथ ही सौर ऊर्जा संयंत्रों के प्रदर्शन विश्लेषण, रिएक्टिव पावर मापन, रिले एवं ट्रांसफार्मर समन्वय, 11 केवी ग्रिड इंजेक्शन से जुड़ी चुनौतियों तथा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के प्रभावी क्रियान्वयन सहित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।कार्यशाला में जर्मनी के संघीय आर्थिक सहयोग एवं विकास मंत्रालय, जर्मन दूतावास, जीआईजेड इंडिया तथा केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने मध्यप्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी नवाचार और संस्थागत समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया।

 

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