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लाचेन में आग से तबाह हुआ प्रसिद्ध बौद्ध मठ, पवित्र अवशेष और ग्रंथ नष्ट

 सिक्किम
सिक्किम के लाचेन में मौजूद ऐतिहासिक थंगू सेरतोक गुम्पा मठ में लगी भीषण आग से सब कुछ तबाह हो गया है। 5 जून की रात 11 बजे भड़की इस आग ने न सिर्फ इस दशकों पुराने मठ को, बल्कि पास के दो घरों को भी पल भर में राख कर दिया। इस हादसे से स्थानीय लोगों में भारी शोक की लहर है।

लाचेन के पीपोन चो बांदु लाचेनपा के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि मठ के भीतर रखे किसी भी पवित्र सामान को बचाने का मौका नहीं मिला। इस दर्दनाक हादसे में वर्षों पुराने पवित्र धार्मिक अवशेष, मूर्तियां, प्राचीन ग्रंथ, धर्मग्रंथ और अन्य मूल्यवान ऐतिहासिक सामग्रियां जलकर राख हो गईं।

शॉर्ट सर्किट की वजह से हादसा
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस भयावह आग का कारण इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। आधी रात के वक्त जब लोग सो रहे थे, तभी अचानक आग भड़क उठी और उसने पूरे मठ परिसर को अपनी चपेट में ले लिया।

गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ और न ही किसी के घायल होने की खबर है, लेकिन करोड़ों रुपये की अपूरणीय सांस्कृतिक क्षति हुई है।

क्या है थंगू सेरतोक गुम्पा का महत्व?
लगभग वर्ष 1965 में निर्मित, थंगू सेरतोक गुम्पा इस क्षेत्र के लोगों के लिए अगाध धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व रखता था। दशकों से यह मठ थंगू और आसपास के गांवों के निवासियों के लिए पूजा-अर्चना और सामुदायिक बैठकों का एक मुख्य केंद्र था।

स्थानीय समुदाय के लिए यह पवित्र स्थान उनकी समृद्ध विरासत का एक अहम हिस्सा था, जिसके नष्ट होने से लोग बेहद दुखी हैं।

क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति बेहद दुर्गम और इनएक्सेसिबल होने के कारण दमकल की गाड़ियां समय पर मौके पर नहीं पहुंच सकीं। इसके बावजूद, स्थानीय निवासियों ने भारी मुस्तैदी दिखाई और खुद ही मोर्चा संभालते हुए अथक प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि, तब तक यह पवित्र धरोहर मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी थी।

 

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