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देश

‘रॉकेट वुमन’ नंदिनी की मंगलयान वाली साड़ी अब वाशिंगटन म्यूजियम की शान बनी

 नई दिल्ली
भारत की 'रॉकेट वुमन' नंदिनी हरिनाथ की मंगलयान मिशन वाली साड़ी अमेरिकी म्यूजियम की शोभा बढ़ा रही है। वाशिंगटन डीसी. स्थित स्मिथसोनियन नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम में इस साड़ी को प्रदर्शित किया गया है।

भारत के पहले मंगल मिशन मार्स आर्बिटर मिशन (मंगलयान) की उप संचालन निदेशक रहीं नंदिनी एक दिसंबर 2013 को चमकीले लाल और नीले रंग की इस रेशमी साड़ी पहनकर कार्यालय पहुंची थीं।

एक दिसंबर 2013 को मंगलयान ने पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी
उस दिन नंदिनी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अन्य विज्ञानी अंतरिक्षयान को मंगल ग्रह की कक्षा की यात्रा पर भेजने के लिए नियंत्रण कक्ष में मौजूद थे।

एक दिसंबर 2013 को मंगलयान ने पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी और मंगल की तरफ बढ़ चला था। यह दिन नंदिनी और अन्य विज्ञानियों ने लिए बेहद खास था। नंदिनी ने बीबीसी को इंटरव्यू में बताया था, यह करो या मरो का क्षण था।

मिशन की सफलता उस दिन की सफलता पर निर्भर थी। नंदिनी और अन्य महिला अंतरिक्ष विज्ञानी उस दिन पूरी दुनिया में सुर्खियों में आ गईं, जब इसरो में साड़ी पहने विज्ञानियों के जश्न मनाते हुए एक तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ था।

स्मिथसोनियन संग्रहालय में क्यूरेटर मैट शिंडेल ने बीबीसी को बताया कि उन्हें यह तस्वीर "बेहद आकर्षक" लगी। उन्होंने कहा, मुझे लगा कि यह शानदार कहानी होगी।

'रॉकेट वुमन' की कहानी जिनकी इस मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिंडेल ने 2020 में ईमेल के माध्यम से नंदिनी से संपर्क किया और इस बात पर चर्चा की कि कौन सी वस्तु भारत के मंगल मिशन और उसमें उनकी भूमिका का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व कर सकती है

शिंडेल ने कहा, मैंने उनसे पूछा कि वह कौन सी वस्तु देने को तैयार होंगी। वह साड़ी देने पर सहमत हुईं, जो उन्होंने मंगलयान के पृथ्वी की कक्षा छोड़ने के दिन पहनी थी। इसके बाद साड़ी और उससे मेल खाती नीली ब्लाउज संग्रहालय पहुंची।

मंगलयान को 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुंचा था
गौरतलब है कि मंगलयान को 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुंचा था। भारत पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने वाला दुनिया का पहला और इकलौता देश बना था। नंदिनी की साड़ी दो बातों को दर्शाती है।

पहला, यह भारत के पहले मंगल मिशन और देश के सफल अंतरिक्ष कार्यक्रम में राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। दूसरा, उनकी कहानी प्रेरणादायक है क्योंकि उनकी सफलता महिलाओं को विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। साड़ी का चयन इसलिए भी किया गया क्योंकि इसका सांस्कृतिक महत्व है।

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