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देश

भारत-पाक सीमा पर सख्ती तेज, दीपावली से पहले अवैध ढांचे गिराने की तैयारी

जैसलमेर

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अभेद्य और चाक-चौबंद करने के लिए बीएसएफ और आईबी एक्शन मोड में हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कड़े निर्देशों के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने एक संयुक्त रणनीति के तहत भारत-पाक बॉर्डर के 15 किलोमीटर के दायरे में एक विशेष सर्वे अभियान छेड़ दिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन क्लीन’ नाम दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक हुए सभी प्रकार के अवैध निर्माणों की पहचान करना, उन्हें पूरी तरह ध्वस्त करना और इन निर्माणों में इस्तेमाल की गई संदिग्ध फंडिंग का पर्दाफाश करना है।

अमित शाह की हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद एक्शन शुरू
जैसलमेर की जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बीकानेर दौरे के दौरान एक हाई-प्रोफाइल सुरक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सीमावर्ती इलाकों में हो रही संदिग्ध गतिविधियों और अवैध निर्माणों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी, जिसके तुरंत बाद इस बड़े ऑपरेशन को जमीन पर उतारा गया। सीमा क्षेत्र में किसी भी तरह के अवैध कब्जे या निर्माण को पूरी तरह रोकने के लिए राजस्व विभाग की विशेष टीमों का गठन कर उन्हें फील्ड में तैनात किया गया है। ये टीमें मौके पर जाकर जमीनों और इमारतों का भौतिक सत्यापन कर रही हैं। इस अत्यंत गोपनीय और संयुक्त विशेष सर्वे को शुरू हुए करीब एक सप्ताह का समय बीत चुका है।

दीपावली से पहले अवैध निर्माणों होंगे ध्वस्त!
अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार सुरक्षा मामलों से जुड़े उच्चाधिकारियों द्वारा इस विशेष सर्वे को अक्टूबर महीने तक हर हाल में पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त योजना है कि सर्वे और जांच की फाइनल रिपोर्ट तैयार होते ही, आगामी दीपावली त्योहार से पहले-पहले सभी चिन्हित अवैध अतिक्रमणों और अवैध ढांचों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कार्रवाई को तेजी से अंजाम देने के लिए पुलिस, राजस्व और स्थानीय प्रशासन सहित सभी संबंधित महकमों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर
इस पूरे अभियान का सबसे संवेदनशील और अहम हिस्सा सुरक्षा जांच तथा वित्तीय फंडिंग की स्क्रूटनी होगी। सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान विशेष रूप से उन बड़े और भारी निवेश वाले व्यावसायिक या निजी निर्माणों पर केंद्रित है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल नजदीक खड़े किए गए हैं।

आलीशान निर्माणों की होगी अलग से जांच
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यदि सीमावर्ती क्षेत्र के भीतर कोई भी ऐसा निर्माण पाया जाता है जिसमें मोटी रकम खर्च की गई है, तो उसकी वित्तीय जांच अलग से की जाएगी। इस काम में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), सीमा सुरक्षा बल (BSF) और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) जैसी देश की सर्वोच्च सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। ये एजेंसियां गहराई से यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन आलीशान या बड़े निर्माणों के पीछे वास्तविक चेहरे कौन से हैं और इस पैसे का असली स्रोत क्या है।
सीमा के इतने नजदीक इस प्रकार की संदिग्ध गतिविधियां और भारी निवेश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं, इसलिए एजेंसियां किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।

 

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