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छत्तीसगड़

नवा रायपुर में 20 हजार से अधिक पीपल के पेड़ लगाने का लक्ष्य, बनेगी ‘पीपल सिटी’

रायपुर

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा राजधानी रायपुर में आयोजित संगोष्ठी एवं पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी शामिल हुए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव मती आर. संगीता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा विकसित सीजी निगरानी पोर्टल, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन विषयक फिल्म, मंडल की 25 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म, मंडल की नवीन वेबसाइट तथा ईको क्लब गतिविधियों पर आधारित स्मारिका का लोकार्पण किया गया।

भारतीय संस्कृति प्रकृति के संरक्षण और सह-अस्तित्व पर आधारित
          
 मंत्री  ओपी चौधरी ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का मूल कारण प्रकृति के साथ असंतुलित विकास मॉडल है। भारतीय संस्कृति सदैव प्रकृति के संरक्षण और उसके साथ सह-अस्तित्व की भावना पर आधारित रही है। यहां नदियों, पर्वतों, वृक्षों और जीव-जंतुओं तक को पूजनीय माना गया है। हमारी परंपरा प्रकृति के उपयोग की बात करती है, शोषण की नहीं।
        
मंत्री  चौधरी ने कहा कि भारत हजारों वर्षों तक विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था रहा, लेकिन उस दौर में पर्यावरण संकट, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों पर चर्चा की आवश्यकता नहीं पड़ी, क्योंकि विकास का आधार प्रकृति के साथ संतुलन था। औद्योगिक क्रांति के बाद दुनिया ने जिस विकास मॉडल को अपनाया, वह प्रकृति के अत्यधिक दोहन पर आधारित रहा और आज उसके दुष्परिणाम पूरी मानवता भुगत रही है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, वर्तमान की चुनौती बन चुका है। असामान्य वर्षा, बढ़ती गर्मी, सूखा और बाढ़ जैसी घटनाएं इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। प्रकृति के साथ अन्याय का परिणाम अंततः मानव समाज को ही भुगतना पड़ता है।

पर्यावरण संरक्षण में तकनीक का उपयोग बढ़ाया
        
 मंत्री  चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने पर्यावरणीय निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन की ऑनलाइन निगरानी के लिए आधुनिक प्रणाली विकसित की गई है, जिससे प्रदूषण स्तर बढ़ते ही विभाग को तत्काल जानकारी मिलती है और त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है। उन्होंने बताया कि फ्लाई ऐश के सुरक्षित परिवहन और निपटान के लिए जीपीएस आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की गई है। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि अन्य राज्यों का फ्लाई ऐश छत्तीसगढ़ में डंप न किया जाए। खतरनाक अपशिष्टों के प्रबंधन को लेकर भी राज्य सरकार ने सख्त और नैतिक निर्णय लिए हैं, ताकि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

नवा रायपुर बनेगा ‘पीपल सिटी
        
 चौधरी ने वृक्षारोपण की वर्तमान पद्धतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिकता के लिए पौधे लगाने के बजाय स्थानीय और पर्यावरण की दृष्टि से उपयोगी वृक्षों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पीपल, नीम, आम और अन्य देशी वृक्ष पर्यावरण संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि रायपुर कलेक्टर रहते हुए उन्होंने “पीपल फॉर पीपल” अभियान प्रारंभ किया था। अब नवा रायपुर में 20 हजार से अधिक पीपल के वृक्ष लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में नवा रायपुर को ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां किसी भी दिशा में देखने पर पीपल का वृक्ष दिखाई देगा।

बच्चों में विकसित करनी होगी पर्यावरणीय संवेदनशीलता      

आवास एवं पर्यावरण मंत्री  चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी आदतों से

         
आवास एवं पर्यावरण मंत्री  चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी आदतों से शुरू होता है। अनावश्यक बिजली की बचत, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, पौधों की सही देखभाल और स्थानीय प्रजातियों के पौधों का वृक्षारोपण जैसी आदतें समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। उन्होंने शिक्षकों और ईको क्लब समन्वयकों से आग्रह किया कि वे बच्चों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करें। आने वाली पीढ़ी की सोच बदलकर ही पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है।

सस्टेनेबिलिटी में युवाओं के लिए अपार संभावनाएं
         
मंत्री  चौधरी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी, अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक रिसाइक्लिंग, हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास आधारित स्टार्टअप भविष्य के सबसे बड़े अवसरों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि रोजगार, नवाचार और उद्यमिता का भी बड़ा क्षेत्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने करियर और उद्यमों को सस्टेनेबिलिटी के सिद्धांतों से जोड़ें और पर्यावरणीय चुनौतियों को अवसर में बदलने का प्रयास करें।

विविध कार्यक्रमों का हुआ आयोजन
           
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण विषयक प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा तुलसी पौधे को जल अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मिशन लाइफ की शपथ दिलाई गई तथा विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक “किस्सा लकड़ी का” ने पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में ईको क्लब समन्वयकों एवं मास्टर ट्रेनर्स को मिशन लाइफ, ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा पर्यावरणीय गतिविधियों के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम के दौरान पोस्टर प्रतियोगिता एवं विभिन्न पर्यावरणीय गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों, विद्यालयों और ईको क्लबों को सम्मानित भी किया गया।
          
समारोह में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के सदस्य सचिव   राजु अगसिमनि, प्रदेशभर से आए शिक्षकों, ईको क्लब समन्वयकों, विद्यार्थियों, विभागीय अधिकारी कर्मचारी एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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