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देश

लोनधारकों को राहत या इंतजार? RBI ने रेपो रेट को रखा स्थिर

नई दिल्ली
केंद्रीय बैंक RBI ने 3 से 5 जून तक चली मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद रेपो रेट 5.25 पर बरकरार रखने का फैसला लिया है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने शुक्रवार सुबह 10 बजे MPC मीटिंग में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी दी. वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रेपो रेट नहीं बढ़ाने के फैसले को जानकार, एक राहत की तरह मान रहे हैं. इस फैसले से स्‍पष्‍ट है कि अगर आपने रेपो रेट से लिंक्‍ड होम लोन, कार लोन या अन्‍य तरह का बैंक लोन लिया है, तो आपके लोन की EMI नहीं बढ़ेगी। 

कैसी रहेगी देश की GDP ग्रोथ? 
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान मामूली रूप से कम कर दिया है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बताया कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए रियल GDP ग्रोथ अनुमान  6.9 से कम कर 6.6 फीसदी कर दिया है। 

    जून 2026 तिमाही: 6.6%
    सितंबर 2026 तिमाही: 6.3%
    दिसंबर 2026 तिमाही: 6.5%
    मार्च 2027 तिमाही: 6.8%

 
इस साल अनुमान से ज्‍यादा रह सकती है महंगाई

महंगाई दर पर RBI का अनुमान है कि इस साल देश में महंगाई थोड़ी ज्‍यादा रह सकती है. इसमें तेल और गैस की बढ़ी कीमतों का बड़ा रोल रहेगा. मार्च में महंगाई दर 3.4 फीसदी और अप्रैल में 3.5 फीसदी रही थी, जबकि इससे पहले फरवरी 2026 में महंगाई दर 3.2 रही थी.  ये आंकड़े केंद्रीय बैंक के 4% के लक्ष्‍य से कम थे. हालांकि आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ सकती है. RBI के अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर 5.1 फीसदी रह सकती है। 

    जून 2026 तिमाही: 4.2%
    सितंबर 2026 तिमाही: 5.1%
    दिसंबर 2026 तिमाही: 5.9%
    मार्च 2027 तिमाही: 5.4%

हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। वित्त वर्ष 2026-27 में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 6-8 अप्रैल 2026 को हुई थी।

RBI MPC मीटिंग के अन्य बड़े फैसले
    ग्रोथ का अनुमान घटाया: वेस्ट एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटों के चलते RBI ने आर्थिक विकास दर
यानी GDP ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। अब चालू वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ आउटलुक को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।

    स्टांस 'न्यूट्रल' रखा: महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बावजूद मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अपनी नीति का रुख 'न्यूट्रल' (तटस्थ) बनाए रखने का फैसला किया है। कमेटी स्थिति पर नजर रखते हुए डेटा के आधार पर आगे कदम उठाएगी।

    महंगाई को लेकर चिंता: गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि हालांकि रिटेल महंगाई अभी टारगेट के दायरे में है, लेकिन वैश्विक तनाव के कारण फ्यूल (ईंधन) और एनर्जी की बढ़ती कीमतें आगे चलकर खुदरा बाजार और आम जनता की जेब पर दबाव डाल सकती हैं।

    कमजोर मानसून का डर: पश्चिम-दक्षिण मानसून में कमी (कम बारिश) के अनुमान को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसका सीधा असर खेती-किसानी की पैदावार और ग्रामीण इलाकों में मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार की फसल विविधीकरण यानी डायवर्सिफिकेशन जैसी योजनाएं इसके असर को कम करने में मदद करेंगी।

    सर्विस सेक्टर मजबूत: अच्छी बात यह है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां अब भी मजबूत बनी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर है और GST रेशनलाइजेशन व स्थिर रोजगार के चलते शहरी क्षेत्रों में कंजम्पशन (खपत) को सहारा मिल रहा है।

रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है?

RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अक्सर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं।

रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है?
किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है।

पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है।

इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।

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