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मध्यप्रदेश

सूखे पेयजल स्रोतों की करायें जांच, नल जल योजनाएं बिना किसी बाधा के हो संचालित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नागरिकों को समुचित पेयजल आपूर्ति हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नागरिकों को पर्याप्त और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। गर्मी के मौसम और बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था की सतत् निगरानी की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि जहां जैसी आवश्यकता हो, वहां वैसी त्वरित व्यवस्थाएं की जाएं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में जल अभाव की स्थिति बन रही है, वहां तत्काल वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कर पानी उपलब्ध कराया जाए। बैठक में पीएचई की मैदानी योजनाओं एवं पेयजल आपूर्ति की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  सम्पत्तिया उइके ने बताया कि विभाग तेजी से अपनी लक्ष्य पूर्ति की ओर बढ़ रहा है। मार्च 2028 से पहले प्रदेश में हर घर नल से जल के उद्देश्य से जल जीवन मिशन का काम पूरा कर लिया जायेगा। मिशन का 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। उज्जैन राजस्व संभाग सहित प्रदेश के 11 जिलों में जल जीवन मिशन का शत् प्रतिशत कार्य हो चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शत-प्रतिशत कार्य करने वाले ऐसे गांवों/ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन/सम्मानित किया जाये, जिन्होंने बेहतर तरीके से नल जल योजनाओं का संचालन/संधारण किया। मंत्री  उइके ने बताया कि बोरवेल में गिरने से होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं/मृत्यु को रोकने के लिए प्रदेश में बोरवेल अधिनियम बनाया गया है। ऐसा अधिनियम बनाने वाला मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य है। उन्होंने विभागीय संरचना और गतिविधियों को अधिक बेहतर बनाने के लिए विभाग के सिविल विंग, मैकेनिकल विंग और जल निगम को एकीकृत करने का सुझाव दिया। मंत्री  उइके बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान- 2026 में डिंडोरी और मंडला जिले में 8 हजार से अधिक एकल ग्राम नल जल योजनाओं पर काम पूरा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग को बधाई देते हुए कहा कि इस काम को 'कर्म स्थान से जन्म स्थान की ओर' अवधारणा से जोड़ा जाये।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश में जल आपूर्ति व्यवस्था एवं अधोसंरचनात्मक विकास के लिए केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय से तत्काल समन्वय करें। केन्द्र सरकार से मध्यप्रदेश को जल जीवन मिशन अन्तर्गत लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त होना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  सीआर पाटिल ने मध्यप्रदेश को यह आवंटन जारी करने की सहमति दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से राज्य में ऐसा मैकेनिज्म तैयार करने को कहा जिससे कि सभी नलजल योजनाएं बिना किसी बाधा के संचालित होती रहे। उन्होंने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जल बचाने वाले और इस पुनीत कार्य में सहयोग देने वालों का राज्य एवं जिला स्तर पर सम्मान कार्यक्रम आयोजित करें। बताया गया कि विभाग द्वारा जल महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसमें प्रदेश में एकल एवं समूह नल जल योजना के संचालन एवं प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल महोत्सव कार्यक्रम को जल गंगा संर्वधन अभियान के साथ जोड़ने और जल बचाने के लिए अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। जल गंगा संर्वधन अभियान के तहत विभाग द्वारा ग्रामीण, शहरी एवं स्कूलों में स्थापित जल स्रोतों की वाटर टेस्टिंग की जा रही है। साथ ही हैंडपंपों की जांच एवं नल जल योजना के ऑपरेटर्स को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल स्रोतों के लिए पीएचई केवल टयूबवेल जैसे माध्यम पर ही आश्रित न रहे। जल स्रोत के रूप में तालाब सरोवर निर्माण से कई लाभ होंगे। इससे जल संरक्षण के साथ जल स्तर में वृद्धि होगी। क्षेत्र में वॉटर रिचार्जिंग बढ़ेगी। जल संग्रहण क्षमता बढ़ने के साथ ही नल-जल योजना के संचालन के लिए स्थायी जल संरचना भी उपलब्ध हो सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कार्य में म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिसर (मैपकास्ट) की विशेषज्ञ सेवाओं का भी लाभ लें।

प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी  मनीष सिंह ने बताया कि विभागीय स्तर पर पेयजल आपूर्ति की गहन मॉनीटरिंग की जा रही है। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों के साथ ही नगरीय क्षेत्रों में भी पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार किया गया है। पेयजल आपूर्ति में आ रही समस्या की सूचना मिलते ही उसे तत्काल दूर किया जा रहा है। पेयजल से निर्माण कार्य करने वालों पर सख्ती की जा रही है। उन्होंने बताया कि म.प्र. जल निगम के समूह ग्राम पेयजल प्रदाय योजनाओं के संचालन एवं संधारण खर्चे को कम करने के लिए प्रदेश में सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा परियोजना स्थापित की जा रही हैं। पीएचई सोलर एण्ड विंड एनर्जी का बल्क यूजर है। प्रमुख सचिव  सिंह ने बताया कि प्रदेश में दिसम्बर 2023 से अब तक 16.50 लाख से अधिक  क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन दिये गये, साथ ही 15 हजार 238 नवीन नलकूप/हैंडपंप भी स्थापित किये गये। प्रदेश के 14 हजार 200 गांवों में जल प्रदाय व्यवस्था का शत् प्रतिशत काम पूरा कर इन्हें हर घर जल घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के करीब 75 प्रतिशत परिवारों को नल से जल के तहत कवर कर लिया गया है।  

म.प्र. जल निगम के प्रबंध संचालक  वी.एस. कोलसानी ने बताया कि उज्जैन राजस्व संभाग की एकल ग्राम नल जल योजनाओं के काम पूरे कर लिये गये है। यहां 7 लाख 9 हजार 65 परिवारों को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन दे दिए गये है। प्रदेश की 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल से प्रमाणित करा लिया गया है। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं की उपयोगिता के आंकलन और हितग्राहियों से शिकायतें/सुझाव प्राप्त कर उनका निराकरण करने के लिए ऑनलाइन जल दर्पण पोर्टल भी तैयार किया गया है। उन्होंने बताया गया कि विभाग में प्रचलित प्रमुख विकास योजनाओं के लिए वर्ष 2026-27 के लिए 5 हजार करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। जल जीवन मिशन का कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। जल जीवन मिशन 2.0 की तैयारी की जा रही है। विभाग में रिक्त पदों की भर्ती भी तेजी से की जा रही है। विभागीय कार्यों में गुणवत्ता एवं सेवाओं में सुधार के लिए डिजिटल माध्यम से जल प्रदाय की मॉनिटरिंग, एकल नल जल योजनाओं आई.ओ.टी. सेंसर्स लगाने तथा राज्य एवं जिला स्तर पर एक कमांड एण्ड कंट्रोल सेन्टर की स्थापना का प्रस्ताव दिया है। अक्टूबर 2026 में जल उत्सव आयोजित किया जायेगा।

बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव (वित्त)  मनीष रस्तोगी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

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