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मध्यप्रदेश

जल संरक्षण में मध्यप्रदेश की अग्रणी पहचान, CM डॉ. यादव ने दिया प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन को श्रेय

जल संरक्षण में मध्यप्रदेश के अग्रणी होने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के दर्शन और मार्गदर्शन को है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भविष्य की जरूरतों के अनुसार दी गई अंतर्राज्यीय परियोजनाओं को मंजूरी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदानीरा समागम में जल संवर्धन की प्रदर्शनी का किया अवलोकन

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दर्शन और मार्गदर्शन के कारण मध्यप्रदेश जल संरक्षण और जल संचयन के कार्यों में देश में अग्रणी है। प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण में किये जा रहे अच्छे कार्य के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने राज्यों को अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं के बलबूते भविष्य की आवश्कताओं का अनुमान लगाते हुए आवश्यक जल के प्रबंध के लिए भी सजग बनाया है। मध्यप्रदेश, केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए दी गई मंजूरी से वृहद स्तर पर लाभान्वित होगा। मध्यप्रदेश इस वर्ष गुड़ी पड़वा से ही प्रारंभ जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से लगभग साढ़े तीन लाख कुओं बावड़ियों, पोखरों, जलाशयों और अन्य जलसंरचनाओं को उपयोगी बनाने के महत्वपूर्ण कार्य में लगा है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार की शाम भारत भवन के बहिरंग में 27 मई से 2 जून तक आयोजित सदानीरा जल गंगा संवर्धन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन भी किया। मेपकास्ट (मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद) के सहयोग से लघु चित्रों में जल, भूगर्भीय जल स्रोत, मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान और जलचर-जलीय जीवन के प्राण तत्व नामक प्रदर्शनियों के साथ ही 'वीर भारत न्यास' और 'मेपकास्ट' द्वारा प्रकाशित अंतर्जलि यात्रा, जिलों के भूजल एटलस और अन्य प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में फिजी, साइप्रस, मैक्सिको सहित अन्य देशों के उच्चायुक्त और राजदूत भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अनेक नदियों का उद्गम स्थल है। प्रदेश की नदियां प्रवाहित होते हुए गंगा-यमुना जैसी नदियों में जाकर मिलती हैं। यह प्रदेश का सौभाग्य है कि हमारे विंध्याचल और सतपुड़ा के पर्वत मध्यप्रदेश को परमात्मा की अनुपम कृति हैं। वनांचलों से जल धाराएं आती हैं जो नदियों को समृद्ध बनाती हैं। नर्मदा मैया के साथ ही ताप्ती, बेतवा, चंबल जैसी नदियां अपार जल राशि से समृद्ध हैं। चंबल नदी का जल प्रदेश की गणना देश की स्वच्छ नदियों में करवाता है, इसके कारण घड़ियाल भी इसी नदी में सर्वाधिक पाए जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदि काल से जल सहेजने के कार्य चल रहे हैं। राजा भोज के काल की तकनीक की चर्चा करें तो भोपाल की बड़ी झील श्रेष्ठ जल संरक्षण प्रणाली का उदाहरण है, जिसमें आबादी को हानि पहुंचाए बिना जल सहेजने, उसके उपयोग और अतिरिक्त जल की निकासी का श्रेष्ठ प्रबंध किया गया। प्रदेश में जनता की भागीदारी से जल गंगा संवर्धन अभियान का संचालन चल रहा है। प्रदेश में कृषि उत्पादन में वृद्धि का आधार भी यही जल और उसका उचित प्रबंधन है। भूगर्भ के जल भण्डारण का कृषि क्षेत्र में संतुलन के साथ उपयोग किस तरह किया जाए यह विज्ञान के सहयोग से संभव है। मेपकास्ट द्वारा इस क्षेत्र में किये जा रहे अनुसंधान महत्वपूर्ण हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास और सहयोगी संस्थाओं को इस सार्थक आयोजन के लिए बधाई दी। इस अवसर पर केंद्रीय भू-जल बोर्ड के प्रतिनिधि अशोक विश्वास, मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी भी उपस्थित थे। वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्मृति चिन्ह प्रदान किए।

कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल सहित बड़ी संख्या में जल संरक्षण क्षेत्र के विद्वान, विद्यार्थी, सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि और अन्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जुड़े कलाधर्मी उपस्थित थे।

 

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