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उत्तर प्रदेश

फ्यूल सरचार्ज से महंगी हुई बिजली, बढ़कर आएगा बिल

 लखनऊ

 बढ़ती महंगाई की मार से परेशान बिजली उपभोक्ताओं को जून में 10 प्रतिशत ज्यादा बिल भी देना होगा। भीषण गर्मी के चलते मई में कहीं अधिक बिजली का उपभोग होने से उपभोक्ताओं का वैसे ही जून में बढ़कर बिल आना था।

अब बिजली कंपनियां मार्च माह के ईंधन अधिभार शुल्क(फ्यूल सरचार्ज) के लिए मई के बिल के साथ जून में सभी श्रेणियों के लगभग 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं से 1610 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूली भी करेंगी।

इस संबंध में पावर कारपोरेशन ने आदेश जारी किया है। उपभोक्ताओं को जुलाई में भी जून के बिल के साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है।

चूंकि विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश में विद्युत खरीद लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट अनुमोदित किया है और पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने 5.94 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद दिखाते हुए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डाला है, इसलिए विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मुख्य्मंत्री योगी आदित्यनाथ तथा ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से अधिभार शुल्क के तौर पर बिजली के बिल में की गई 10 प्रतिशत वृद्धि पर रोक लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि बिजली कंपनियों ने विद्युत उत्पादन कंपनियों से दो वर्ष पुराने बकाए को जोड़ते हुए बिल तैयार कराया है। इसमें पुराने बकाए का 1400 करोड़ रुपये शामिल है।

संबंधित आदेश में लिखा है कि अधिभार 20 प्रतिशत वसूला जाना चाहिए, जिससे यह लगता है कि जुलाई में भी उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार वसूलना जा सकता है। वर्मा ने आयोग से मांग की है कि ईंधन अधिभार वसूलने पर रोक लगे। उन्होंने कहा है कि मार्च में महंगी बिजली खरीदने की विस्तृत जांच हो।

उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस निकल रहा है। ऐसे में ईंधन अधिभार बढ़ाने की स्थिति में उपभोक्ताओं पर भार डालने के बजाय उसे सरप्लस से ही समायोजित (एडजस्ट) किया जाए।

उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डालने के मामले को वह जल्द ही आयोग के समक्ष उठाएंगे। वह ईंधन अधिभार निर्धारण संबंधी नियमों में आवश्यक संशोधन की मांग करेंगे।

उल्लेखनीय है कि मई में ईंधन अधिभार के एवज में 1.52 प्रतिशत बिजली का बिल कम हुआ था। इससे पहले अप्रैल में 2.14 प्रतिशत अधिक बिल देना पड़ा था।

 

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