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धर्म/ज्योतिष

“लोग क्या कहेंगे” छोड़ो! असली जिंदगी तब शुरू होगी

संदीप माहेशवरी के मुताबिक हम एक ऐसे समाज में खुद को कैद नहीं करना चाहिए  जहां हमारी खुशियों का रिमोट कंट्रोल दूसरों के हाथों में है.  कोई हमारे बारे में क्या सोचता है, समाज में हमारी प्रतिष्ठा (Status) क्या है और लोग हमारी पोस्ट पर कितने लाइक्स दे रहे हैं. इसी अंधी दौड़ ने आज के युवाओं और प्रोफेशनल्स की मानसिक शांति को छीन लिया है.  दूसरों को प्रभावित (Impress) करने की चाहत में लोग अक्सर अपनी असलियत को छिपाने लगते हैं और एक नकली मुखौटा ओढ़ लेते हैं.

इस दिखावे की संस्कृति का सबसे बुरा असर हमारे फैसलों और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है.  सिर्फ लोगों की वाह-वाही लूटने के लिए महंगे फोन, आलीशान शादियां या महंगी गाड़ियों के लिए कर्ज (Loan) लेना आज आम हो चुका है.  लेकिन सच तो यह है कि जिन लोगों को दिखाने के लिए आप कर्ज के दलदल में धंस रहे हैं, उन्हें आपकी दिक्कतों से कोई फर्क नहीं पड़ता.  जब महीने के आखिर में मानसिक तनाव और ईएमआई (EMI) का बोझ बढ़ता है, तब इंसान को समझ आता है कि उसने दूसरों के चक्कर में अपनी ही जिंदगी को मुश्किल बना लिया है.

खुद के लिए जिएं, दूसरों के लिए नहीं
जीवन में सच्ची सफलता और मानसिक सुकून तब मिलता है जब आप दूसरों की नजरों में उठने के बजाय खुद की नजरों में उठते हैं.  समाज की परवाह किए बिना अपनी आर्थिक सीमा (Financial Budget) में रहना और अपने करियर व गोल्स (Goals) पर फोकस करना ही असली समझदारी है.

जिस दिन आप लोग क्या कहेंगे के इस सबसे बड़े मानसिक रोग से मुक्त हो जाएंगे, उस दिन आप खुलकर जीना शुरू कर देंगे. दूसरों की नकली दुनिया की तुलना अपने असली जीवन से करना बंद करें.  खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दें, क्योंकि जब आप अंदर से मजबूत और आर्थिक रूप से सुरक्षित होंगे, तो समाज में आपकी असली वैल्यू अपने आप बढ़ जाएगी.

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