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मध्यप्रदेश

भीषण गर्मी में MP में बियर की किल्लत, सरकार और ठेकेदारों के आंकड़ों में बड़ा फर्क

भोपाल
 मध्य प्रदेश में इस बार गर्मियों का सीजन बियर के शौकीनों के लिए काफी मायूस करने वाला साबित हो रहा है। राज्य में बियर की सप्लाई में भारी गिरावट आई है, जिससे कई बड़े शहरों के आउटलेट्स खाली पड़े हैं। इस संकट की मुख्य वजह आबकारी विभाग द्वारा इसी साल फरवरी में रायसेन स्थित एक निजी मैन्युफैक्चरिंग और बॉटलिंग यूनिट को बंद किया जाना है। इस फैक्ट्री के बंद होने से बाजार में अचानक बड़ा गैप आ गया, जिसकी भरपाई समय रहते नहीं की जा सकी।

सरकार का दावा बनाम इंडस्ट्री की हकीकत
आबकारी कमिश्नर दीपक सक्सेना के मुताबिक, विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए दूसरे राज्यों और स्थानीय डिस्टिलरीज से बैकअप अरेंजमेंट किया है। सरकार का दावा है कि शुरुआती 45% के घाटे को अब घटाकर सिर्फ 14% पर ले आया गया है। हालांकि, शराब कारोबारियों और इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जमीनी स्तर पर यह किल्लत अभी भी 45% के आसपास बनी हुई है, क्योंकि सरकार समय पर वैकल्पिक टेंडर जारी करने में नाकाम रही। दरअसल, पीक सीजन में राज्य में रोजाना दो लाख क्रेट बियर की मांग रहती है, जिसमें से आधी सप्लाई अकेले रायसेन की इसी बंद पड़ी यूनिट से होती थी।

मध्य प्रदेश का सिस्टम उत्तर प्रदेश जैसा नहीं है, जहां कंपनियां सीधे ठेकेदारों से संपर्क करती हैं। यहां सरकार के मदर डिपो से सप्लाई होती है। जब सरकार हमसे भारी आबकारी ड्यूटी लेती है, तो मांग के मुताबिक स्टॉक देना भी उसी की जिम्मेदारी है। विभाग रायसेन प्लांट के बंद होने के बाद के हालात का अंदाजा लगाने में पूरी तरह फेल रहा।

देशव्यापी है बियर की कमी
इसके अलावा, भोपाल के सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र सिंह धाकड़ ने बताया कि बियर की कमी इस बार देशव्यापी है। इस साल नए सिरे से हुए ठेकों और नीलामी में देरी के कारण वेंडर गर्मियों के लिए एडवांस स्टॉक जमा नहीं कर पाए। रही सही कसर छोटे कस्बों के वेंडर्स ने पूरी कर दी, जिन्होंने प्रीमियम बियर के बड़े स्टॉक पहले ही बुक कर लिए, जिससे भोपाल जैसे मुख्य शहरों में हाई-एंड ब्रांड्स की भारी कमी हो गई है।

 

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