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सम्राट कैबिनेट की नई भूमि नीति मंजूर, किसानों को बाजार दर से कई गुना ज्यादा भुगतान

पटना

बिहार के लोगों को जमीन अधिग्रहण में अब और ज्यादा मुआवजा मिलेगा। भूमि अधिग्रहण से संबंधित नई नीति को सम्राट कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। इसके तहत राज्य सरकार अगर आपकी जमीन लेगी तो अब 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क प्रोत्साहन राशि के रूप में देगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस मीटिंग में कुल 27 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।

बैठक के बाद विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सम्राट कैबिनेट ने बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026 को मंजूरी दी है। लोकहित की परियोजनाओं के लिए आपसी सहमति के आधार पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से यह नीति लाई गई है।

इसके तहत शहरी क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण के दौरान भूमि का मूल्य बाजार मूल्य अथवा सर्किल दर (एमवीआर), जो भी अधिक होगा, उसके दोगुने के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया जाएगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह दाम बाजार मूल्य अथवा सर्किल दर, जो भी अधिक होगी, उसके चार गुना के बराबर होगा। इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत राशि प्रोत्साहन के रूप में दी जाएगी। सरकार द्वारा खरीदी जाने वाली जमीन पर स्टांप और पंजीयन शुल्क भी नहीं लगेगा।

11 नई सेटेलाइट टाउनशिप परियोजना में होगी आसानी
बिहार के 11 प्रमुख शहरों के आसपास नई सेटेलाइट टाउनशिप विकसित की जा रही है। चिह्नित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर फिलहाल रोक लगाई गई है। माना जा रहा है कि इन टाउनशिप को विकसित करने के लिए जमीन का अधिग्रहण नई नीति के आधार पर किया जाएगा। पिछले दिनों राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया था कि किसी भी रैयत (जमीन मालिक) का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा, छपरा, सोनपुर समेत 11 शहरों में विकसित होने वाली सेटेलाइट टाउनशिप के अधिकतर चिह्नित क्षेत्र ग्रामीण इलाकों में हैं। ऐसे में सम्राट सरकार की नई नीति का फायदा किसानों को मिलेगा।

राज्य सरकार की ओर से पूर्व में स्पष्ट किया गया था कि नई टाउनशिप में जमीन मालिकों को भी हिस्सेदारी दी जाएगी। अगर जो रैयत हिस्सेदारी नहीं चाहते, उन्हें बाजार मूल्य से कहीं ज्यादा मुआवजा दिया जाएगा। इसी क्रम में नई नीति लाई गई है। इसके अलावा विभिन्न परियोजनाओं को लागू करने में भी सरकार को आसानी होगी। 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के जरिए प्रशासनिक अधिकारी को जमीन मालिकों को तैयार भूमि अधिग्रहण के लिए और सहजता से तैयार कर सकेंगे।

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